
Hindustan Special: गांवों के पास जाएंगे बाघ-तेंदुए तो लोगों को तुरंत चल जाएगा पता, जानें कैसे
गांव में बढ़ रहे खूंखार जानवरों के हमले से बचने को लेकर वन विभाग ने एक नई तकनीकी अपनाएगी। जिससे गांव के पास जानवरों के पहुंचने की जानकारी मिल जाएगी।
Hindustan Special: दुधवा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में बाघ और तेंदुए के लगातार बढ़ते हमलों के बीच वन विभाग ने ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए नई तकनीक का प्रयोग शुरू किया है। गांवों के पास वन्यजीवों की मौजूदगी का समय रहते पता लगाने के लिए सेंसर युक्त हाईटेक अलर्ट डिवाइस लगाई गई है, जो सायरन बजाकर ग्रामीणों को तत्काल सतर्क करेगी।
इस पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत बफर जोन के गुलरा गांव से की गई है। यहां स्थापित की गई डिवाइस 250 मीटर के दायरे में बाघ या तेंदुआ के पहुंचते ही तेज सायरन बजाकर चेतावनी देगी। इससे ग्रामीण समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंच सकेंगे और संभावित हमलों को टाला जा सकेगा। पहले अक्सर जानवरों की मौजूदगी की जानकारी न होने के कारण गंभीर घटनाएं हो जाती थीं।
वन विभाग को मिलेगा रियल टाइम अलर्ट
यह डिवाइस केवल ग्रामीणों को ही नहीं, बल्कि वन विभाग के अधिकारियों को भी तुरंत मोबाइल नोटिफिकेशन भेजेगी। इससे रेस्क्यू टीम और गश्ती दल तेजी से मौके पर पहुंच सकेंगे। खास बात यह है कि यह तकनीक सिर्फ बाघ और तेंदुए तक सीमित नहीं है, बल्कि हाथी और गैंडे जैसे अन्य बड़े वन्यजीवों की मौजूदगी का भी पता लगा सकेगी।
25 दिन का परीक्षण, फिर सभी प्रभावित गांवों में लगेगी डिवाइस
मझगई रेंज के रेंजर अंकित कुमार के अनुसार, इस डिवाइस का परीक्षण 25 दिनों तक किया जाएगा। इस दौरान इसके प्रभाव, सटीकता और उपयोगिता का आकलन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। यदि परिणाम सकारात्मक रहे तो बफर जोन के सभी संवेदनशील और प्रभावित गांवों में ऐसी डिवाइसें लगाई जाएंगी।
बाघ-तेंदुओं के लगातार हमलों से दहशत में हैं ग्रामीण
खीरी जिले के दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के दर्जनों गांव लंबे समय से बाघ और तेंदुए के हमलों से परेशान हैं। बीते कुछ वर्षों में कई ग्रामीणों की जान जा चुकी है। हाल ही में तीन दिन पहले ही बफर जोन में बाघ के हमले में एक बालक की मौत हो गई थी। ऐसे में वन विभाग की यह नई पहल ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ-साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।





