जेवर मिले तो कहां गए? मां की मौत के बाद उठे सवालों से आईपीएस आशुतोष मिश्र नाराज
एक तरफ मां की मौत तो दूसरी तरफ गलतबयानबाजी से आईपीएस अधिकारी आशुतोष मिश्रा बेहद नाराज हैं। मां के गायब जेवर घर से ही बरामद होने की खबरों पर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई है।
आईपीएस अधिकारी आशुतोष मिश्र मां इंद्रावती की मौत के बाद घटना को लेकर चल रही कुछ खबरों से बेहद आहत हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी असंतोष जताते हुए जेवरात बरामदगी की खबरों को उन्होंने खारिज कर दिया। मामले में पहली बार खुलकर बोलते हुए आईपीएस ने सवाल उठाया कि जेवर बरामद हुए हैं तो आखिर हैं कहां? उन्होंने निष्पक्ष जांच के लिए वरिष्ठ अफसरों पर भरोसा जताया, लेकिन बिना पुष्टि माल बरामदगी की सूचनाएं प्रसारित होने पर स्थानीय पुलिस अधिकारियों पर नाराजगी जताई।
आशुतोष मिश्रा की मां इंद्रावती का शव 16 अगस्त की सुबह पैतृक आवास पर मिला था। उनके पहने जेवर गायब थे और मुंह में कपड़ा ठूंसा मिला था। इसकी सूचना आशुतोष मिश्रा ने एडीजी जोन प्रवीण कुमार को दी, जिसके बाद शाम को अज्ञात के खिलाफ हत्या और लूट की रिपोर्ट दर्ज की गई। सोमवार शाम गायब जेवरों में से कुछ घर पर मिलने की सूचनाएं प्रसारित होने के बाद चर्चाएं तेज हो गईं। इस पर आशुतोष मिश्रा ने कहा, माल बरामद हुआ है तो है कहां, आखिर किसने पुष्टि की है। गहना मिल जाता और कारण पता चल जाता तो यह मेरे लिए सबसे बड़ी बात होती।
उन्होंने कहा कि डीजीपी, एडीजी और डीआईजी मामले की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों से गलत सूचनाओं को रोकने का प्रयास करने की अपील की। आशुतोष ने कहा कि मैं मां का पिंडदान करने में लगा हूं, लेकिन कुछ लोग कुछ और ही बांधने में लगे हैं। उन्होंने इससे उनकी सामाजिक छवि पर असर पड़ने की बात भी कही।
आशुतोष ने बताया कि पुलिस गांव के कुछ लोगों के साथ परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ कर रही है। उन्होंने अपील की कि पूछताछ नियमानुसार की जाए और पुलिस के कठोर तरीकों का इस्तेमाल न किया जाए। उन्होंने कहा कि घटना को अंजाम देने वाला सामने आए, यही सबसे जरूरी है।
बिसरा रिपोर्ट का इंतजार
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से नाखुश आईपीएस ने मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं। बिसरा रिपोर्ट और अन्य जांचों के नतीजों से मौत की वजह स्पष्ट होने की उम्मीद है। पुलिस हत्या और लूट के मामले में घटनास्थल से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। महरुआ थानाध्यक्ष शशांक शुक्ला ने बताया कि जेवर गायब होने के मामले में शक के आधार पर अगल-बगल के छ लोगों को सुबह हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
मौत के तार तलाशने में जुटी जांच टीमें
आईपीएस आशुतोष मिश्रा की मां इंद्रावती की मौत की जांच कर रही टीमें एक-एक कड़ी जोड़ने में जुटी हैं। घटनास्थल की परिस्थितियों के साथ मृतका के करीबियों और संपर्क में रहने वाले लोगों की गतिविधियों की पड़ताल हो रही है। कॉल डिटेल भी खंगाली जा रही हैं। मंगलवार देर शाम दो लोगों को थाने लाकर पूछताछ किए जाने की भी चर्चा रही।
इंद्रावती गांव आने पर दालान में ही सोती थीं। पुलिस पता लगा रही है कि घर की दिनचर्या और आने-जाने की जानकारी किनको थी। घटना की रात आसपास मौजूद लोगों और संदिग्ध गतिविधियों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस घटना से पहले और बाद में हुई फोन बातचीत और संबंधित नंबरों की गतिविधियां खंगाल रही है। एसओजी समेत कई टीमें जांच में लगी हैं। फिलहाल विभिन्न संभावित पहलुओं को सामने रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
आखिर आईपीएस अफसर बेटे की निगाह ने क्या देखा..
इंद्रावती की मौत को लेकर जांच भले ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद अलग दिशा में बढ़ रही हो, लेकिन इस मामले में बड़ा सवाल है कि मौके पर पहुंचे उनके आईपीएस बेटे आशुतोष मिश्र ने ऐसा क्या देखा, जिससे उन्हें मां की मौत सामान्य नहीं लगी? एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के तौर पर घटनास्थल और शव को देखने के बाद आशुतोष मिश्रा ने हत्या और लूट की आशंका जताते हुए मुकदमा दर्ज कराया। इसका मतलब यह है कि मौके की कोई न कोई परिस्थिति उनके संदेह का कारण जरूर बनी होगी। शव की स्थिति, मुंह से खून निकलना, घर के हालात या शरीर से जेवरों का गायब होना इनमें कौन-सी बात उनकी निगाह में सबसे ज्यादा खटकी, यह अभी जांच का अहम हिस्सा है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हार्ट अटैक से मौत की बात सामने आने के बाद हत्या की आशंका पर सवाल जरूर हैं, लेकिन शुरुआती परिस्थितियों से जुड़े सवाल खत्म नहीं होते। मौत स्वाभाविक थी तो जेवरों की कहानी क्या है? जेवर घटना के दौरान गायब हुए तो कहां गए? पूरे मामले में आईपीएस बेटे की पहली नजर इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि उसके बाद सामान्य मौत की सूचना ने हत्या और लूट के मुकदमे का रूप लिया। जांच में सामने आना बाकी है कि उनकी आशंका किन ठोस परिस्थितियों पर आधारित थी और बाद की जांच उन आशंकाओं को कितना सही या गलत साबित करती है। मौत का कारण रिपोर्ट ने बता दिया, लेकिन आईपीएस बेटे की निगाह में उस वक्त ऐसा क्या आया था इस सवाल का जवाब अभी बाकी है।
कैमरे से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक पर सवाल
आईपीएस अधिकारी आशुतोष मिश्रा की मां की मौत मामले में घटना से जुड़े कई ऐसे पहलू हैं, जिनका स्पष्ट होना जरूरी है। आईपीएस की मां अकेली रहती थीं तो सुरक्षा के लिहाज से कैमरों की व्यवस्था कितनी जरूरी थी, यह सवाल चर्चा में है। खासकर तब, जब परिवार का एक सदस्य पुलिस सेवा में वरिष्ठ पद पर हो। ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्गों के घरों पर अक्सर सुरक्षा व्यवस्था सीमित रहती है, लेकिन किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के परिवार से जुड़े घर में कम से कम मुख्य दरवाजे, आंगन और बाहर आने-जाने वाले रास्ते पर कैमरे होते तो घटना के समय और उससे पहले की गतिविधियों की पड़ताल में मदद मिल सकती थी।
सुलगते सवाल
1. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की बुजुर्ग मां के घर में सुरक्षा के लिए कैमरे क्यों नहीं थे। क्या आसपास के घरों या रास्तों पर लगे कैमरों की फुटेज पर्याप्त रूप से खंगाली गई। घटना के समय घर और आसपास की गतिविधियों की निगरानी कैसे हुई।
2. घर के भीतर सीसीटीवी नहीं था तो घटनास्थल के आसपास कितने कैमरे मौजूद थे। उनकी फुटेज पुलिस ने कितनी दूरी तक खंगाली। घटना से पहले और बाद में घर की ओर आने-जाने वाले लोगों की क्या गतिविधियां सामने आईं। फुटेज में संदिग्ध व्यक्ति, वाहन अथवा असामान्य गतिविधि दिखाई दी या नहीं, यह जांच की दिशा तय करने वाला बिंदु हो सकता है।
3. प्रारंभिक रिपोर्टों में मृतका के शरीर से जेवर गायब होने की बात सामने आई थी। इसी कारण हत्या-लूट की आशंका जताई गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हार्ट अटैक मौत का कारण बताया गया है, ऐसे में जेवर से जुड़ा पहलू भी स्पष्ट होना जरूरी है।
4. क्या जेवर वास्तव में गायब थे यदि थे तो वे कहां गए। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि मौत से पहले मृतका की दिनचर्या कैसी थी। उन्होंने आखिरी बार किससे बात की थी। घर पर कौन आया था। उनकी तबीयत कब बिगड़ी।


