
हिंदू एक होंगे तो आसुरी शक्तियां खुद टूटेंगी; वृंदावन में बोले मोहन भागवत
मोहन भागवत ने कहा है कि आसुरी शक्तियां हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं लेकिन हमको जैसे तैयार होना चाहिए, अभी वैसे तैयार नहीं हुए हैं। हिंदू एक होंगे तो आसुरी शक्तियां खुद टूट जाएंगी। हिंदू समाज कभी किसी दूसरे की वीरता से, शौर्य से, बल से नहीं हारा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि आसुरी शक्तियां हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं लेकिन हमको जैसे तैयार होना चाहिए, अभी वैसे तैयार नहीं हुए हैं। हिंदू एक होंगे तो आसुरी शक्तियां खुद टूट जाएंगी। हिंदू समाज कभी किसी दूसरे की वीरता से, शौर्य से, बल से नहीं हारा। जब भी पराजय हुई, तब फूट के कारण हुई। आज देश को भेदभाव मुक्त भारत की आवश्यकता है।
मोहन भागवत शनिवार को वंशीवट स्थित श्री नाभापीठ सुदामा कुटी में जगद्गुरु रामानंदाचार्य महाराज के 726वें जयंती महोत्सव तथा सुदामा कुटी के संस्थापक महंत सुदामा दास महाराज के वृंदावन आगमन के शताब्दी महोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। यह समारोह कुंभ मेला क्षेत्र में 21 जनवरी तक मनाया जाएगा। इस मौके पर मोहन भागवत ने कहा कि आसुरी शक्तियां अंदर से खोखली हो गई हैं। सारी दुनिया में हार गई हैं। उनकी व्यथा दुनिया के ध्यान में आई है लेकिन यह भी सत्य है कि जैसे-जैसे हम धार्मिक समाज, सनातन समाज, हिंदू समाज के सब लोग एक होते जाएं जाएंगे, भक्ति के आधार पर सबको अपना मानकर अपनाते जाएंगे, हम मजबूत होते जाएंगे। उन्होंने कहा कि हमें भक्ति की शक्ति के आधार पर चलना है। सात्विक शक्ति के आधार पर चलना है। उन्होंने कहा कि सबको जोड़ते चले जाएं तो निश्चित है कि आने वाले 20-30 वर्षों में भारत विश्व गुरु बनकर संपूर्ण दुनिया को सुख-शांति भरा नया जीवन देने वाला राष्ट्र बनेगा।
देश की आवश्यकता, भेदभाव मुक्त भारत
मोहन भागवत ने कहा कि आज भेदभाव मुक्त भारत की आवश्यकता है। दुनिया भारत को भाषा, जाति, संप्रदाय आदि बातों से एकजुट नहीं मानती। अब समय आ गया कि दुनिया जितने प्रकार से हिंदुओं को अलग-अलग मानती है, उतने प्रकार के हिंदुओं में मेरे अपने मित्र होने चाहिए। कुटुंब प्रबोधन की विचारधारा से हम सबको आगे बढ़ना है। अपने देश की परंपरा अगली पीढ़ी को बतानी है। अपने कुटुंब के नए बच्चों को यह पढ़ाना है।
परिचय पुस्तिका का किया विमोचन
संतों के सानिध्य में आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने सुदामा कुटी परिचय पुस्तिका का विमोचन भी किया। मंच से साध्वी ऋतंभरा, स्वामी ज्ञानानंद, महंत कमल नयन दास, वासु देवानंद, कुमार स्वामी, महंत राजेन्द्र दास, महंत बलराम दास, डॉ.मनोज मोहन शास्त्री, राम कृपाल त्रिपाठी, रामकृष्ण आचार्य, रामशरण दास, गौरी शंकर दास, ईश्वरचंद्र दास महाराज आदि ने विचार रखे।





