पति की हत्याकर शव बोरे में भरकर फेंका, बेटी की गवाही से मां, प्रेमी और उसके भाई को उम्रकैद
Husband Killer Wife:आगरा के बहुचर्चित ताजगंज हत्याकांड में कोर्ट ने पति की हत्या करने वाली पत्नी उसके प्रेमी और भाई को उम्रकैद की सजा सुनाई है। फैक्ट्री संचालक नरेश की हत्या कर शव को बोरी में भरकर खाली प्लाट पर फेंका गया था। बेटी की गवाही को मां को करतूतों की सजा आसानी से मिली है।

Husband Killer Wife: पिता की हत्या में बेटी की गवाही ने मां और उसके प्रेमी समेत तीन लोगों को जिंदगी भर के लिए जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है। ताजगंज क्षेत्र में वर्ष 2021 में फैक्ट्री संचालक नरेश कुमार की हत्या कर शव को बोरे में बांधकर खाली प्लॉट में फेंका गया था। इस चर्चित मामले में पांच साल बाद अदालत ने फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट शिव कुमार ने मृतक की पत्नी प्रेमिता उर्फ प्रमिता निवासी सिद्धार्थ नगर गोबर चौकी, उसके प्रेमी रविकांत राजपूत और उसके भाई शशिकांत राजपूत निवासी नगला केवल, शिकोहाबाद (फिरोजाबाद) को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास तथा कुल दो लाख 80 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
अभियोजन की ओर से ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी मृत्युंजय सिंह और एडीजीसी विजय वर्मा ने वादी, विवेचक सहित दस गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध किए। उन्होंने अदालत से अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोर दंड देने की मांग की।
ससुर की शिकायत के बाद बहू पर कसा शिकंजा
वादी सुरेश चंद निवासी सिद्धार्थ नगर ने ताजगंज थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया था कि आठ जून 2021 की सुबह उन्हें फोन पर बेटे नरेश कुमार की हत्या की सूचना मिली। वह परिजनों के साथ नगला कली स्थित पुष्पांजलि होम्स पहुंचे तो घर के पीछे खाली प्लॉट में बेटे का शव बोरे से बंधा मिला। उन्होंने शुरुआत से ही बहू प्रेमिता पर शक जताया था। नरेश जूते का कारखाना चलाते थे।
प्रेमी के साथ ऐसे बढ़ गई थी नजदीकियां
पुलिस विवेचना में प्रेमिता के प्रेमी रविकांत राजपूत और उसके भाई शशिकांत राजपूत की भूमिका सामने आई। जांच के दौरान तीनों के खिलाफ हत्या समेत अन्य धाराओं के साथ एससी-एसटी एक्ट की धाराएं भी बढ़ाई गईं। घटनास्थल से बरामद खून से सनी ईंट और शराब की बोतल (अद्धा) को विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया। महिला के मोबाइल की कॉल डिटेल और सीडीआर से प्रेमी के साथ लगातार संपर्क के प्रमाण मिले। इसके बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जांच में सामने आया कि महिला और उसका प्रेमी एक राजनीतिक दल के कार्यकर्ता थे। इसी दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं, जिसका नरेश विरोध करता था।
14 वर्षीय बेटी की गवाही बनी सबसे अहम साक्ष्य
ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी मृत्युंजय सिंह ने बताया कि आरोपियों को सजा दिलाने में मृतक की 14 वर्षीय पुत्री की गवाही निर्णायक साबित हुई। घटना के समय उसकी उम्र करीब दस वर्ष थी। उसने अदालत को बताया कि उसकी मां ने तीनों भाई-बहनों को कमरे में बंद कर बाहर से कुंडी लगा दी थी। उन्हें कोल्ड ड्रिंक दी गई और टीवी की आवाज तेज कर दी गई थी। रात करीब तीन बजे दरवाजा खुलवाने पर पहले मां ने दरवाजा नहीं खोला। बाद में दरवाजा खुला तो कमरे के बेड पर खून के धब्बे थे और मां ने रात में स्नान भी किया था।
अभियोजन ने वादी सुरेश चंद, मृतक के भाई सोनू, डॉ. रविंद्र कुमार सिंह, पुलिसकर्मी श्याम सुंदर, विवेचक शैलेंद्र सिंह चौहान, उपनिरीक्षक केवल सिंह, तत्कालीन क्षेत्राधिकारी राजीव कुमार सिंह, निरीक्षक उमेश चंद त्रिपाठी तथा मृतक की पुत्री सहित दस गवाहों को अदालत में पेश किया।
कमरे की दीवारों और फर्श पर मिले थे खून के निशान
विवेचना के दौरान पुलिस को कमरे की दीवारों और फर्श पर खून के धब्बे मिले। कमरे का सामान बिखरा पड़ा था। घटनास्थल पर शव के पास खून से सनी ईंट और शराब की बोतल मिली थी। शव से करीब 100 मीटर दूर एक बोरा भी बरामद हुआ, जिसमें बेडशीट, तकिया, दस्ताने और खून से सने कपड़े मिले थे। इन सभी साक्ष्यों ने हत्या की गुत्थी सुलझाने और अदालत में आरोप सिद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।
पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।


