एक-दूसरे के कमरे में नहीं जाते थे पति-पत्नी, रेशमा कैमरे से करती थी जुड़वा बेटियों की निगरानी

Ajay Singh संवाददाता, कानपुर दक्षिण
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शशिरंजन मिश्र और रेशमा छेत्री के बीच 12 साल पहले पहली नजर में प्यार हो गया था। दोनों ने परिवारों की मर्जी के बगैर शादी की। फिर पति-पत्नी के रिश्ते इतने खराब हुए कि एक-दूसरे के कमरे में प्रवेश तक पर रोक लग गई।शशिरंजन जुड़वा बेटियों के साथ एक कमरे में सोता था और रेशमा छोटे बेटे के साथ दूसरे कमरे में।

एक-दूसरे के कमरे में नहीं जाते थे पति-पत्नी, रेशमा कैमरे से करती थी जुड़वा बेटियों की निगरानी

उत्तर प्रदेश के कानपुर से रविवार तड़के एक दवा कारोबारी द्वारा 11 साल की जुड़वा बेटियों की बेरहमी से हत्या किए जाने की खबर आई तो हर कोई हैरान रह गया। इस घटना के बाद हर कोई जानना चाह रहा है कि आखिर एक पिता इतना बेरहम कैसे हो गया। कोई उसे मनोरोगी बता रहा तो कोई नशे का आदि। इसके साथ ही हत्यारोपी पिता शशिरंजन मिश्र और उसकी पत्नी रेशमा छेत्री की 12 साल पुरानी लव स्टोरी भी सामने आई है। लोग उस लव स्टोरी के इस त्रासदीपूर्ण अंत से हैरान हैं। 12 साल पहले जिस रेशमा को शशिरंजन में अपनी पूरी दुनिया नजर आती थी वही रेशमा आज चीख-चीख कर उसके लिए फांसी की सजा की मांग कर रही है। रेशमा और शशिरंजन लंबे समय से अलग-अलग कमरों में सोते थे। शशिरंजन जुड़वा बेटियों के साथ एक कमरे में और रेशमा छोटे बेटे के साथ दूसरे कमरे में। दिनों दिन उग्र होते जा रहे शशिरंजन के रवैए को देखते हुए रेशमा को जुड़वा बेटियों की सुरक्षा की चिंता भी थी। वह सीसीटीवी कैमरे से उन पर नजर रखती थी। न रेशमा शशिरंजन के कमरे जा सकती थी न शशिरंजन रेशमा के कमरे जाता था। वारदात वाली रात भी अगर रेशमा अपना कमरा अंदर से बंद कर न सोई होती तो शायद शशिरंजन उसे और छोटे बेटे को भी मौत के घाट उतार देता।

शशिरंजन मिश्रा और रेशमा छेत्री के बीच 12 साल पहले पहली नजर में प्यार हुआ था। बाद में सब कुछ वैसा नहीं रहा। समय बीतने के साथ न सिर्फ झगड़े बढ़े बल्कि भरोसा भी टूट गया। एक ही छत के नीचे दोनों का एकाकी जीवन शुरू हो गया था। रात में जुड़वा बेटियों को लेकर एक कमरे में शशिरंजन रहने लगा तो दूसरे कमरे में छोटे बेटे के साथ रेशमा छेत्री सोने लगी। शशिरंजन के कमरे में पत्नी को प्रवेश की इजाजत नहीं थी। बनारस के पहाड़िया इलाके में पैदा हुए शशिरंजन मिश्रा के पिता शेखर मिश्रा की बिहार के गया जिले में पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में अकाउंटेंट की नौकरी लगी तो पूरा परिवार वहीं बस गया। बड़ा भाई राजीव मिश्रा आज भी परिवार के साथ गया में ही रहता है, जबकि शशिरंजन मेडिकल कंपनी में एमआर की नौकरी करने लगा। इसके बाद साल 2011 में कानपुर आ गया। स्वरूपनगर में किराए पर कमरा लेकर रहने लगा। कमरे से कुछ दूरी पर स्थित एक सैलून में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के कलिमपुर निवासी रेशमा छेत्री काम कर रही थी। शशिरंजन की नजर पड़ी तो रेशमा उसे पसंद आ गई। दोनों ने परिजनों की रजामंदी के बगैर वर्ष 2014 में प्रेम विवाह कर लिया। कुछ समय बाद वह दवाइयों का सप्लायर बन गया। हालांकि शशिरंजन नशे का लती निकला, दोनों में खूब झगड़ा होने लगा।

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रेशमा ने बताया कि शशि नशे में आए दिन मारपीट करता। इस दौरान जुड़वा बेटियां हुई और बाद में एक बेटा हुआ। हरकतों से तंग आकर रेशमा बेटे को लेकर नौ महीने के लिए मायके चली गई। कुछ समय पहले ही वापस लौटी। हालांकि इसके बाद दोनों में पति-पत्नी जैसा कुछ रहा ही नहीं। रेशमा ने बताया कि शशिरंजन न तो अपने कमरे में आने देता था न ही अपना बाथरूम प्रयोग करने देता। बेटियों से भी बातचीत नहीं करने देता था।

कैमरों से बेटियों की निगरानी करती थी रेशमा

रेशमा ने बताया कि बच्चियों को वह अपने कमरे में ही सुलाता था। वह रात भर जाग कर बेटियों की सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से निगरानी करती रहती थी। शनिवार रात भी रेशमा यही कर रही थी। हालांकि कमरे में अंधेरा नजर आ रहा था। कमरे के बाहर लगे कैमरे में देर रात दो बजे शशिरंजन, रिद्धि को टॉयलेट कराने के लिए निकलता हुआ दिखाई दिया। जब पति वापस कमरे में गया तो रेशमा को कुछ शंका हुई, वह चुपके से दरवाजा खोल बाहर की ओर बनी खिड़की में कान लगाकर खड़ी हुई, कोई आवाज न आने पर अपने कमरे में आकर सो गई। इसके बाद रेशमा का दरवाजा पुलिस ने खटखटाया तो दोनों बेटियों की लाशें पड़ी मिलीं।

ताला बंद करके न सोती पत्नी तो उसे भी मार डालता

शशिरंजन दिनों दिन उग्र होता जा रहा था। रेशमा को किसी अनहोनी की आशंका सताने लगी थी। शशि उसे अपने कमरे में भी नहीं आने देता था, इसपर वह बेटे को लेकर अलग कमरे में सोती थी। इस दौरान दरवाजा अंदर से बंद रहता था। पूछताछ में शशिरंजन ने कहा कि अगर पत्नी जग रही होती तो उसे भी मार देता। रेशमा ने बताया कि शशिरंजन की मां गीता मिश्रा का 6 फरवरी 2024 को बीमारी से निधन हो गया था, इसके बाद से वह अक्सर बहकी हुई बातें करता था। कहता था कि मैं भी मां के पास जाऊंगा, बेटियों को भी साथ ले जाऊंगा। इसके बाद से वह लगातार निगरानी करती रहती थी।

पुलिस के एक भी सवालों के नहीं दिया स्पष्ट जवाब

पुलिस ने आरोपित को हिरासत में लेकर कई सवाल किए। हत्या क्यों की इसपर पहले उसने कहा कि उसकी मौत तय हैं, इसके बाद बेटियों की देखभाल कौन करेगा, इसी लिए उन्हें मार दिया। फिर कहा कि उसका कई लोगों ने रुपये ले रखा है, इसी के चलते तनाव में मार डाला। पुलिस ने पूछा कि क्या पत्नी के चरित्र पर शक था, तो उसने नहीं में जवाब दिया।

गला और सांस नली कटने से हुई दोनों बच्चियों की मौत

रिश्तों का खून करने वाले शशिरंजन मिश्रा अपनी जुड़वा बेटी रिद्धि और सिद्धी को बहुत ही निर्दयता के साथ मौत के घाट उतारा। उसने पहले बेटियों का गला दबाया। फिर दोनों के गले पर चापड़ से वार करके सांस नली को पूरी तरह से डैमेज कर दिया। यह खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ। पैनल व वीडियोग्राफी से पोस्टमार्टम के बाद शाम 5:45 पर बेटियों के शव को गठरी में लिपटा देख मां बिलख पड़ी। फिर वह शव वाहन से नजीराबाद हिन्दू कब्रिस्तान पहुंची। जहां दोनों बेटियों के शव को दफनाया गया।

डाक्टर बोले पिता इतना निर्दयी कैसे हो सकता

बच्चियों के शव देख पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टर भी स्तब्ध रह गए। बोले- कोई पिता इतना निर्दयी कैसे हो सकता है। जो प्यार करने का दावा करके फूल जैसी बच्चियों की हत्या कर दे। यह तो पूरी तरह से हैवानियत है।

मनोरोग विशेषज्ञ बोले

जीएसवीएम के मनोरोग विभागाध्यक्ष प्रो.धनंजय चौधरी ने बताया कि लंबे समय तक नींद की गोली खाने से दिमाग खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। मन में गलत विचार काफी आते हैं। मानिसक रूप से व्यक्ति संवेदनशील हो जाता है और छोटी-छोटी बातों पर बड़ा कदम उठा लेता है।

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लेखक के बारे में

Ajay Singh

अजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।

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