
बेटों से कैसे छिपाए...दहशतगर्द बन चुकी है उनकी मां; जानें डॉ.शाहीन के पूर्व पति और बच्चों की कहानी
यह कहानी आतंकवाद में मुलव्विस होकर पकड़ी गई डॉ. शाहीन के पूर्व पति और उसके बच्चों की है। फारसी में शाहीन का मतलब है बाज। झपट्टा मारकर शिकार को दबोच लेने वाला खतरनाक परिंदा। खुफिया एजेंसियां कह रही हैं कि शाहीन इसी काम में तो लगी थी। डॉक्टर पिता की बेबसी अबूझ है।
यूपी के कानपुर में वीआईपी रोड के एक अपार्टमेंट का फ्लैट। कई दिन से उदासी और घबराहट इसके दर-ओ-दीवार में जज्ब है। यहां वालिदैन के साथ दो जवान हो रहे बच्चे रहते हैं। बड़ा बेटा 12 वीं तो छोटा 10 वीं में। ये बच्चे मोबाइल नहीं चलाते। इस घर में टीवी भी बंद करा दिया गया है। वालिद कई दिन से काम पर नहीं गए। बच्चे उलझन में हैं.. अब्बू को आखिर क्या हुआ है? वालिदा से पूछते हैं.. अम्मी क्या हुआ? वह घायल मुस्कुराहट के साथ कहती हैं.. कुछ नहीं। वालिद की रातें जागते हुए कट रही हैं। एक सवाल उन्हें मथे डाल रहा है.. इन बच्चों से कैसे छिपाऊं कि उनकी असली मां आतंकवादी बन चुकी है।
कहानी आतंकवाद में मुलव्विस होकर पकड़ी गई डॉ. शाहीन की है। फारसी में शाहीन का मतलब है बाज। झपट्टा मारकर शिकार को दबोच लेने वाला खतरनाक परिंदा। खुफिया एजेंसियां कह रही हैं कि शाहीन इसी काम में तो लगी थी।
इसी शाहीन के दो बच्चे वीआईपी रोड के एक फ्लैट में वालिद और दूसरी मां के साथ रह रहे हैं। फिजिक्स के सिद्धांत, केमिस्ट्री के फार्मूले और गणित के सवाल हल करने के दिनों में उन्हें वालिद की उदासी की गुत्थी हल करनी पड़ रही है। दरअसल डॉक्टर पिता की बेबसी अबूझ है। वह चाहते हैं.. बच्चे कभी न जानें कि उन्हें जन्म देने वाली मां डॉ. शाहीन मुल्क और इंसानियत की दुश्मन बन चुकी है। लेकिन किसी की ‘खांसी-खुजली’ तक को वायरल करने वाले इस दौर में वह बच्चों को इस इत्तला से कैसे बचा पाएंगे? फोन नहीं दिया, टीवी बंद करा दिया.. इससे क्या? तालीम के लिए ये बच्चे कॉलेज तो जाएंगे न।
इस बाबत बात करते हुए आंखों के डॉक्टर की आंखें डबडबा जाती हैं। 2012 में डॉ. शाहीन उन्हें तलाक देकर चली गई। बच्चे मांगे न मेहर की रकम। उस वक्त बड़ा बेटा सात और छोटा चार साल का था। 13 साल बीत गए। मां ने कभी इन बच्चों को पलटकर नहीं देखा। खुफिया एजेंसियों ने खुलासा किया है कि शाहीन अपने भाई के साथ लखनऊ से कानपुर आती रहती थी।
तब भी उसे कलेजे के टुकड़े याद नहीं आए? क्या उसे बच्चों से ज्यादा तबाही के मिशन से प्यार था? ऐसा ही होगा, तभी तो मां अपने छूटे बच्चों की एक झलक तक देखने की तलबगार न हुई। 15 गुणा 12 फीट के एक कमरे में पूरी-पूरी रात जाग रहे गमजदा और घबराए हुए बाप का वह क्या ख्याल करती? जो यह सोचकर ही कांप जाता है कि दुनिया कहीं उसके बेटों को दहशतगर्द मां के बच्चे न कहने लगे? अब यह इस समाज, सरकार और सिस्टम की जिम्मेदारी है कि बेवजह इन बेगुनाह बच्चों के नाम दहशतगर्द मां से न जुड़ें।
वालिद ने कहा-शाहीन ने इन्हें अपनी देह से जन्म जरूर दिया, वह इनकी मां नहीं है। पिछले 13 साल से जो इन्हें अपने दामन में ढककर पाल-पोस रही है, वही इनकी मां है। वे लोग जो इन बच्चों की शिनाख्त से वाकिफ हैं, मेहरबानी करें। इल्तजा है.. कभी सामना हो जाए तो बच्चों से शाहीन का जिक्र न करें। यह भी न जाहिर करें कि वे इन बच्चों का शाहीन से रिश्ता जानते भी हैं।





