तू डाल-डाल, मैं पात-पात, BJP के दांव से उसे ही पटकने की फिराक में अखिलेश; क्यों बना रहे 75 घोषणा पत्र?

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अखिलेश यादव चाहते हैं कि पार्टी केवल राज्य स्तर की समस्याओं तक ही सीमित न रह जाए। बल्कि हर जिले की समस्या उठाकर वह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी पहुंच बनाना चाहते हैं। क्या है उनका प्लान…

Samajwadi Party national president Akhilesh Yadav
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बड़ी तैयारी में हैं अखिलेश यादव।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल होने वाला है। इसको लेकर तमाम राजनीतिक दल तैयारियों में जुटे हुए हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने यूपी चुनाव के लिए खास प्लान का ऐलान किया है। इस योजना के तहत सपा, यूपी के सभी 75 जिलों के लिए 75 मैनिफेस्टो लेकर आएगी। पूरे प्रदेश के लिए भी उसका एक चुनावी घोषणापत्र होगा, लेकिन इसके अलावा वह प्रदेश के अलग-अलग जिलों के लिए अलग तैयारी कर रही है। अखिलेश यादव चाहते हैं कि पार्टी केवल राज्य स्तर की समस्याओं तक ही सीमित न रह जाए। बल्कि हर जिले की समस्या उठाकर वह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी पहुंच बनाना चाहते हैं।

क्या है इसके पीछे का मकसद

हर जिले के लिए अलग मैनिफेस्टो के पीछे अखिलेश यादव का खास प्लान है। इसके मुताबिक चुनाव तो पूरे प्रदेश का है, लेकिन हर जिले की समस्याएं अलग हैं। हर जिले का आर्थिक स्ट्रक्चर अलग है। इसके अलावा सामाजिक ढांचा और राजनीतिक प्राथमिकताएं भी अलग-अलग हैं। जैसे गौतमबुद्धनगर में तेजी से बढ़ते औद्योगिकीकरण को लेकर चिंताएं हो सकती हैं। लेकिन बुंदेलखंड में इससे इतर समस्याएं हो सकती हैं। इसी तरह पूर्वांचल में रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर और माइग्रेशन समस्या की जड़ हो सकता है। लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जहां मजबूत कृषि, शुगर और औद्योगिक अर्थव्यवस्था मजबूत है, उसके लिए चीजें अलग हो सकती हैं। यहां तक कि क्षेत्रीय स्तर पर, स्थानीय राजनीति में भी चीजें काफी अलग हैं। इसलिए सपा को लगता है कि प्रदेश स्तर पर कोई वादा करके वह शायद वोटरों में उतनी पहुंच ना बना पाए। सपा यह देखना चाहती है कि जिलावार क्या मुद्दे वोटर्स के जेहन में चल रहे हैं और उन्हीं को टारगेट करना चाहती है।

कैसे अंजाम दे रहे प्लान

इस प्लान के तहत समाजवादी पार्टी ने जिलास्तर के अपने कार्यकर्ताओं को वहां की समस्याओं की पहचान करने का जिम्मा सौंपा है। उन्हें यह जानकारी जुटी है कि कौन सी परियोजनाएं रुकी हैं, किन प्रोजेक्ट्स पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। स्थानीय लोगों में रोजगार और नौकरी के अवसरों के प्रति क्या सोच है। पहले, भी सपा विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक, आर्थिक और विकास मुद्दों को लेकर एक विस्तृत लिस्ट बना चुकी है। न्यूज 18 के मुताबिक डॉक्टर भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी लखनऊ में पॉलिटिकल साइंस डिपार्ट के हेड, डॉक्टर शशिकांत पांडेय के मुताबिक अखिलेश यादव की यह रणनीति यूपी में बेहद कारगर हो सकती है। उन्होंने कहा कि इससे जनता को महसूस होगा कि उनके मुद्दे की बात उठाई जा रही है और प्रदेश स्तर के नैरेटिव से उबरने में भी मदद मिलेगी।

फिर काम आएगा PDA

समाजवादी पार्टी इस चुनाव में भी अपनी चिर-परिचित अंदाज में उतर रही है और उसकी रणनीति पीडीए के इर्द-गिर्द रहेगी। असल में साल 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने उत्तर प्रदेश की 80 में से 37 सीटों पर हासिल की थी। भाजपा को 33 और कांग्रेस को छह सीटों पर जीत मिली थी। इस तरह सपा प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। सपा के इस प्रदर्शन के पीछे पीडीए-पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक वाली रणनीति का होना बड़ी वजह माना गया था। इसे पार्टी के परंपरागत मुस्लिम-यादव सपोर्ट बेस से आगे जाने की तैयारी माना गया।

हालांकि 2027 के विधानसभा चुनाव में पीडीए फॉर्मूला काम करे, इसकी पूरी गारंटी नहीं है। लोकसभा चुनाव में मुद्दे राष्ट्रीय होते हैं। वहीं, विधानसभा चुनाव में लोगों की आम जिंदगी से जुड़ी चीजें उनके लिए मायने रखती हैं। जैसे, सड़क, बिजली, खेती, स्कूल, हॉस्पिटल, नौकरी, किसानों की समस्या वगैरह। ऐसे में सपा का जिलावार मैनिफेस्टो, उसके पीडीए फॉर्मूले के साथ मिलकर काफी मददगार हो सकता है। डॉक्टर पांडेय के मुताबिक इससे पार्टी के संगठनात्मक मशीनरी में भी मदद मिल सकती है। अगर सभी 75 जिलों की समस्या, कागजों पर उतरी और पार्टी इसे लागू करने में सफल रही तो उनके पास स्पष्ट डेटा रहेगा कि कौन क्या चाहता है। ऐसे में वोटरों को अपने पाले में खींचने में मदद मिल सकती है।

जातिवार रणनीति में भी मिलेगी मदद

इसके अलावा, यूपी में जिलावार जातिगत आंकड़ा भी बदलता रहता है। अगर सपा इस रणनीति में सफल रही तो उसके पास एक ठोस आंकड़ा होगा कि किस जिले में कितनी जातियों का दबदबा है या कौन सी जातियां कमजोर हैं। ऐसे में क्षेत्रवार और जिलावार ओबीसी समुदाय, दलित, अपर कास्ट और अल्पसंख्यक वोटरों के लिए रणनीति बनाना उसके लिए काफी आसान हो जाएगा। प्रदेश स्तरीय चुनावी घोषणापत्र में इन बारिकियों पर काम नहीं हो सकता। लेकिन जिस तरह की तैयार सपा कर रही है, उसके लिए रणनीति बनाने का बड़ा मौका रहेगा।

इस सेगमेंट पर भी फोकस

इसके अलावा, समाजवादी पार्टी इस बार विधानसभा चुनाव में युवा, महिलाओं और नए वोटरों को लुभाने में जुटी है। पार्टी का फोकस जेन-जी और जेन अल्फा पर भी है। इसके अलावा रोजगार, शिक्षा और कॉम्पटीटिव एग्जाम्स तो हैं ही। सपा के मैनिफोस्टो में पेपर लीक रोकने और लखनऊ में आईटी इकोसिस्टम को बढ़ावा देने पर भी जोर रहने वाला है। यह उसके जिलावार मैनिफेस्टो एक्सपेरिमेंट में भी फिट बैठता है। लखनऊ, नोएडा या कानपुर का युवा वोटर, पूर्वी उत्तर प्रदेश के छोटे जिलों के वोटरों से अलग होगा। ऐसे में जिलावार आंकड़ों से सपा को यह अंतर समझने का मौका मिलेगा।

भाजपा के नैरेटिव को कैसे चुनौती

सपा का यह कदम ऐसे वक्त में आया है, जब भाजपा जिलास्तर पर अपनी पहुंच को मजबूत बनाने में जुटी है। मई से लेकर अब तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी के 75 में 44 से अधिक जिलों में कार्यक्रम कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने 115 विधानसभा क्षेत्रों में 38 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के डेवलपमेंट्स प्रोजेक्ट्स की बुनियाद रखी है। इसमें, स्कूल, सड़कें, हॉस्पिटल, पानी और बिजली के प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ टूरिज्म और स्किल डेवलपलमेंट की पहल शामिल हैं। भाजपा इसके जरिए अपने हर विधानसभा क्षेत्र में विकास के नैरेटिव को पहुंचा रही है। अब एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सपा को पार पाना है तो उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि उसकी रणनीति केवल प्रजेंटेशन तक सीमित न रह जाए। डॉक्टर पांडेय कहते हैं कि भाजपा के पास सरकारी मशीनरी है। वह जनता को दिखा सकती है कि उसके प्रोजेक्ट्स कैसे रफ्तार पकड़ रहे हैं। वहीं, सपा के लिए जिलावार चुनावी घोषणापत्र महज वादे से अधिक कुछ नहीं है।

यह है असली चुनौती

ऐसे में अखिलेश यादव के लिए चुनौती और ज्यादा बढ़ जाती है। उन्हें अपनी महत्वाकांक्षी सोच को एक प्रभावशाली चुनावी हथियार में तब्दील करना होगा। सभी 75 जिलों से उन्हें भरपूर रिस्पांस मिले। इसके अलावा राज्यस्तर पर बनने वाली रणनीति और जिलास्तर पर बनने वाली रणनीति में कोई विरोधाभास न रहे, इसका भी उन्हें ध्यान रखना होगा। सपा को स्थानीय मुद्दों और राज्यस्तरीय रणनीति में सामंजस्य बनाकर चलना होगा। हालांकि राजनीतिक तौर पर देखें तो यह रणनीति अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में प्रचार का तरीका बदलने का एक मौका तो दे ही रही है।

Deepak Mishra

लेखक के बारे में

Deepak Mishra

मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।

आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।

यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।

जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।

अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।

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