गोरखपुर पुलिस के लिए चुनौती बनें हिस्ट्रीशीटर, ढूंढे नहीं मिल रहे; जानें पूरा माजरा

Mar 07, 2026 05:51 am ISTPawan Kumar Sharma शिवम सिंह, गोरखपुर
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गोरखपुर में अपराध पर अंकुश लगाने के लिए जिन हिस्ट्रीशीटरों की गतिविधियों पर पुलिस को लगातार नजर रखनी थी, उनमें से  32 हिस्ट्रीशीटर अब खुद पुलिस के लिए चुनौती बन गए हैं। इसका खुलासा यक्ष एप पर पुलिस सत्यापन में हुआ है।

गोरखपुर पुलिस के लिए चुनौती बनें हिस्ट्रीशीटर, ढूंढे नहीं मिल रहे; जानें पूरा माजरा

Gorakhpur News: यूपी के गोरखपुर जिले में अपराध पर अंकुश लगाने के लिए जिन हिस्ट्रीशीटरों की गतिविधियों पर पुलिस को लगातार नजर रखनी थी, उनमें से शहर के 32 हिस्ट्रीशीटर अब खुद पुलिस के लिए चुनौती बन गए हैं। इसका खुलासा यक्ष एप पर पुलिस सत्यापन में हुआ है।

पुलिस को उनके बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल पा रही है। वे हिस्ट्रीशीटर अपने दर्ज पते पर नहीं रह रहे हैं और कई के बारे में यह भी स्पष्ट नहीं है कि उनकी मौत हो चुकी है या वे अभी जिंदा हैं। दिक्कत यह है कि जब तक की हिस्ट्रीशीटर की मौत की पुष्टि न हो जाए तक तक हिस्ट्रीशीट नष्ट नहीं की जा सकती है।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इन सभी हिस्ट्रीशीटरों की हिस्ट्रीशीट उनके आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए लंबे समय पहले खोली गई थी, ताकि उनकी नियमित निगरानी की जा सके। थाने स्तर पर बीट पुलिस और चौकी प्रभारियों को समय-समय पर इनके सत्यापन और गतिविधियों की रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन लंबे समय से इनका सत्यापन नहीं हो पाया। अब इनमें से 32 हिस्ट्रीशीटर पुलिस की पहुंच से बाहर हो गए हैं। हालांकि ये आंकड़े अब तक की फीडिंग के बाद के हैं। यह भविष्य में और बढ़ सकता है। हाल ही में यक्ष एप लांच होने के बाद सभी थानों में खोली गई हिस्ट्रीशीटों का सत्यापन कर उनकी ऑनलाइन फीडिंग का काम शुरू किया गया।

इसके बाद जब पुलिस टीम संबंधित पते पर पहुंची तो पता चला कि कई हिस्ट्रीशीटर वर्षों पहले ही वहां से जा चुके हैं। कुछ के मकान बंद मिले, जबकि कई जगह पड़ोसियों ने बताया कि वे लंबे समय से दिखाई नहीं दिए। पुलिस को इन हिस्ट्रीशीटरों का वर्तमान ठिकाना पता नहीं चल पा रहा है। ऐसे में यह भी तय नहीं हो पा रहा है कि वे दूसरे जिले या राज्य में रह रहे हैं या फिर उनकी मौत हो चुकी है। पुलिस को उनके पुराने परिचितों, रिश्तेदारों और संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही आधार, बैंक और दस्तावेजों के माध्यम से पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

अपराध की गंभीरता के हिसाब से खोली जाती है हिस्ट्रीशीट

बदमाश के आपराधिक इतिहास की फाइल को ही हिस्ट्रीशीट कहते हैं। अपराध की गंभीरता को देखते हुए बदमाशों की निगरानी के लिए हिस्ट्रीशीट खोली जाती है। बदमाश लगातार अपराध कर रहा हो तो निगरानी के लिए यह व्यवस्था होती है। बदमाश को पहले एक्टिव लिस्ट पर लाया जाता है, फिर उसकी निगरानी हिस्ट्रीशीट के माध्यम से होती है। इसके लिए थाने पर फ्लाई सीट रजिस्टर होता है। इसमें हिस्ट्रीशीटरों की इंट्री होती है। हर हिस्ट्रीशीटर की निगरानी के लिए एक-एक सिपाही की ड्यूटी लगती है।

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पवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।

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