Hindustan Special: टूरिज्म मैप पर आएगा यूपी का ये मंदिर, पांडवों से जुड़ा है कनेक्शन, क्यों हो रही इसकी चर्चा?
बरेली जिले की फरीदपुर तहसील में स्थित पहलऊनाथ शिव मंदिर को भी टूरिज्म मैप पर लाया जाएगा। मंदिर के विकास को 1.03 करोड़ रुपया जारी हुआ है।

Hindustan Special: धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यूपी सरकार लगातार कार्य कर रही है। इसी कड़ी में अब बरेली जिले की फरीदपुर तहसील में स्थित पहलऊनाथ शिव मंदिर को भी टूरिज्म मैप पर लाया जाएगा। मंदिर के विकास को 1.03 करोड़ रुपया जारी हुआ है। मान्यता है कि द्वापर युग के इस मंदिर की स्थापना पांडवों ने की थी। यहां का शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है।
फरीदपुर स्थित पहलऊनाथ शिव मंदिर का स्थानीय स्तर पर बहुत महत्व है। सावन के साथ-साथ महाशिवरात्रि पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि यह मंदिर द्वापर युग का है। यहां से गुजरते समय पांडवों को स्वयंभू शिवलिंग दिखे थे। इसके बाद पांडवों ने मंदिर की स्थापना की थी।
मंदिर परिसर में बाबा ने जीवित ली थी समाधि
यह स्थान अपनी ऐतिहासिक और तपस्यापूर्ण ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध है, जहां लंबे समय तक श्री श्री 1008 बाबा प्रह्लाद नाथ ने भी तपस्या की। बाबा ने मंदिर परिसर में ही जीवित समाधि ली थी। आज भी यह समाधि श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर काफी प्रसिद्ध होने के बाद भी मंदिर में बाहर से पर्यटक नहीं आते हैं। अब इस कमी को दूर करने की तैयारी है। पर्यटन विभाग यहां न केवल पर्यटक सुविधाएं विकसित कर रहा है बल्कि अपनी वेबसाइट पर भी इस मंदिर के विषय में जानकारी पोस्ट कर रहा है, ताकि दूर-दूर से लोग यहां आ सके।
विकास के लिए जारी हुआ बजट
पहलऊनाथ शिव मंदिर में पर्यटक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। मंदिर परिसर में बहुउद्देशीय हाॅल, संत विश्राम गृह, पाथ-वे और उद्यान के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। शासन ने परियोजना को मंजूरी देते हुए 103.05 लाख का बजट स्वीकृत किया है। इससे निर्माण कार्य शुरू भी हो गया है।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल
वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।
पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो
उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


