
किसी आरोपी की स्वतंत्रता...जमानत अर्जियों में देर से जानकारी देने पर हाई कोर्ट नाराज; दरोगा सस्पेंड
कोर्ट को बताया गया कि एसएसपी को पत्र भेजने के बावजूद कोई इंस्ट्रक्शन नहीं भेजा गया। इस देरी को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने एसएसपी बलिया को तलब किया। कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए एसएसपी ओम वीर सिंह ने 25 नवंबर को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताया कि उन्हें पत्र भेजा गया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत अर्जियों पर पुलिस की ओर से इंस्ट्रक्शन (जानकारी) आने में देरी पर नाराजगी जताई है। इससे याचिकाओं के निस्तारण में बेवजह विलम्ब होता है। कोर्ट ने डीजीपी को सर्कुलर जारी कर सभी जिला पुलिस प्रमुखों को निर्देश देने को कहा है कि इंस्ट्रक्शन भेजने में किसी भी प्रकार की लापरवाही न की जाए। यदि ऐसा होता है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
बलिया के विनोद राम की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने कहा कि किसी आरोपी की स्वतंत्रता को सिर्फ इसलिए कम नहीं किया जा सकता कि पुलिस अधिकारियों ने कोर्ट को जरूरी जानकारी देने में लापरवाही की। याची के मामले में गत आठ अक्टूबर को सुनवाई में अपर शासकीय अधिवक्ता को जांच और अगवा किए गए व्यक्ति की बरामदगी के बारे में जानकारी प्राप्त करने को कहा गया। 17 नवंबर को सुनवाई पर कोर्ट को बताया गया कि बलिया के एसएसपी को पत्र भेजने के बावजूद कोई इंस्ट्रक्शन नहीं भेजा गया। इस देरी को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने एसएसपी बलिया को तलब किया। कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए एसएसपी ओम वीर सिंह ने 25 नवंबर को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताया कि उन्हें पत्र भेजा गया था। इसके बावजूद जांच अधिकारी ने जरूरी इंस्ट्रक्शन नहीं पहुंचाया। इस पर संबंधित एसआई के खिलाफ जांच शुरू की गई और जांच तक के लिए उसे सस्पेंड कर दिया गया है।
कई आदेशों के बावजूद प्रोफार्मा आदेश दुर्भाग्यपूर्ण
वहीं एक अन्य आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों के बावजूद प्रिंटेड प्रोफार्मा में मजिस्ट्रेट द्वारा सम्मन आदेश जारी करने को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामले में प्रोफार्मा भरकर जारी आदेश से स्पष्ट है कि मजिस्ट्रेट ने न्यायिक विवेक का इस्तेमाल नहीं किया और मकैनिकल आदेश जारी किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी ने पिंकी की याचिका पर दिया है।
नई अदालतों के सृजन की धीमी प्रगति पर कोर्ट नाराज
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्रदेश में न्यायिक ढांचे के विस्तार को लेकर राज्य सरकार की सुस्ती पर कड़ा रुख अपनाते हुए, 900 नई अदालतों तथा संबंधित पदों के सृजन के संबंध में दाखिल शपथ पत्रों को असंतोषजनक बताया है। हालांकि न्यायालय ने उम्मीद भी जताई है कि सरकार अब ठोस कार्रवाई करेगी। वहीं मामले की अगली सुनवायी के लिए 11 दिसम्बर की तिथि नियत करते हुए, वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव या सचिव स्तर के अधिकारी तथा प्रमुख सचिव, विधि (एलआर) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है।
डायल 112 पर हत्या की झूठी सूचना देने वाले को सजा
डायल 112 पर हत्या की झूठी सूचना देने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) सत्यवीर सिंह ने दोषी को दो साल नौ माह की सजा सुनाई है। उसने पुलिस को फोनकर मुबाकरपुर कस्बे के पास हत्या की सूचना दी थी। पुलिस के पहुंचने पर सूचना फर्जी निकली थी। आरोपी ने पांच जनवरी 2023 को डायल 112 पर फोन कर बताया कि मुबारकपुर कस्बे के पास हत्या हो गई है। इस पर डायल 112 की पीआरवी वैन 1021 मौके पर पहुंची थी।





