शिक्षकों के स्थानांतरण और 2026 की तबादला नीति पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक, प्रमुख सचिव से मांगा एफिडेविट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के तबादले और उन्हें सरप्लस घोषित करने की राज्य सरकार की नीति पर नाराजगी जताते हुए वर्ष 2026 की तबादला नीति के उस हिस्से और उसके तहत जारी किए गए ट्रांसफर ऑर्डर पर रोक लगा दी है।

Allahabad Highcourt Order: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के तबादले और उन्हें सरप्लस घोषित करने की राज्य सरकार की नीति पर नाराजगी जताते हुए वर्ष 2026 की तबादला नीति के उस हिस्से और उसके तहत जारी किए गए ट्रांसफर ऑर्डर पर रोक लगा दी है, जो शिक्षा के अधिकार कानून का उल्लंघन करते हैं। कोर्ट ने सरकार द्वारा बार-बार अपने ही पुराने आश्वासनों को तोड़े जाने पर नाराजगी जताई है और प्रमुख सचिव को दो सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने विपिन कुमार आर्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याची की ओर से कोर्ट को बताया गया कि राज्य सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए गत एक जून को एक गाइडलाइन/सर्कुलर जारी किया था। इस नीति में सरप्लस (अतिरिक्त) कर्मचारियों का निर्धारण करने के लिए 20 नवंबर 1976 के एक पुराने शासनादेश का सहारा लिया गया है।
इस नीति के तहत याची को सरप्लस घोषित कर 30 जून को उनका तबादला राजकीय इंटर कॉलेज प्रयागराज से कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान पिछले कई वर्षों का रिकॉर्ड पेश करते हुए बताया गया कि सरकार हर बार एक ही गलती दोहरा रही है। वर्ष 2017 में जब 1976 के इस शासनादेश को चुनौती दी गई थी, तब कोर्ट ने माना था कि यह शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 में तय छात्र-शिक्षक अनुपात का पालन नहीं करता। उस वक्त सरकार ने कोर्ट में बाकायदा हलफनामा देकर वादा किया था कि अपनी गलती सुधारेंगे और आरटीई एक्ट के नियमों के तहत ही फ्रेश ट्रांसफर एक्सरसाइज करेंगे।
यह भी बताया गया कि सरकार ने अपने वादे के उलट 2018 और फिर 2022 में भी इसी पुराने 1976 के ढर्रे पर नीतियां बनाईं, जिन पर हाईकोर्ट ने अलग-अलग याचिकाओं में रोक लगाई। 2022 में हुई याचिका अब तक विचाराधीन है। अब 2026 में सरकार ने फिर से बिना आरटीई एक्ट 2009 के प्रावधानों का पालन किए एक जून का सर्कुलर जारी कर दिया। कोर्ट ने सरकारी वकील से इस पर जवाब मांगा तो उन्होंने निर्देश प्राप्त करने के लिए समय की मांग की। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों और सरकार द्वारा खुद दिए गए हलफनामे के बावजूद अधिकारी लगातार नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
कोर्ट ने अगले आदेश तक एक जून 2026 के शासनादेश और उसके तहत जारी 30 जून 2026 के ट्रांसफर ऑर्डर को स्थगित कर दिया। साथ ही कहा कि याची को उनके वर्तमान तैनाती स्थल यानी राजकीय इंटर कॉलेज प्रयागराज में काम करने से न रोका जाए और ट्रांसफर ऑर्डर को अमल में न लाया जाए। कोर्ट ने प्रदेश सरकार के संबंधित उच्चाधिकारी को आदेश दिया है कि वह 28 जुलाई से पहले व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करें और बताएं कि कोर्ट में दिए गए पुराने आश्वासनों का बार-बार उल्लंघन क्यों किया जा रहा है।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
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यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
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करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
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है।


