मकान बनवाने वालों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, नक्शा पास कराने के लिए बेटरमेंट चार्ज देना जरूरी नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि नक्शा पास कराने के लिए बेटरमेंट चार्ज जमा करने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने कहा कि अन्य सभी शुल्क जमा करने पर पीडीए को कानून के मुताबिक प्लान स्वीकृत करना होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी एवं न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने दिया है।

UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि नक्शा पास कराने के लिए बेटरमेंट चार्ज जमा करने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने कहा कि अन्य सभी शुल्क जमा करने पर पीडीए को कानून के मुताबिक प्लान स्वीकृत करना होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी एवं न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने प्रतीक सिंह की याचिका पर उनके अधिवक्ता सुनील दत्त कौटिल्य को सुनकर दिया है।
प्रतीक सिंह ने याचिका दाखिल कर मांग की थी कि प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) को निर्देश दिया जाए कि डिमांड नोट में बेटरमेंट चार्ज को छोड़कर अन्य राशि लेकर उनका नक्शा पास करे। याचिका में कहा गया कि उप्र नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा 35 के तहत जब तक मौके पर कोई विकास कार्य न हुआ हो, तब तक बेटरमेंट चार्ज नहीं लिया जा सकता। एडवोकेट एसडी कौटिल्य ने दलील दी कि अधिनियम की धारा 35 में बेटरमेंट चार्ज लगाने की पूरी प्रक्रिया दी गई है। यदि संबंधित स्थल पर प्राधिकरण द्वारा कोई सुधार या विकास कार्य नहीं किया गया है तो प्रारंभिक स्तर पर धारा 15(2-ए) के तहत ऐसा शुल्क नहीं वसूला जा सकता।
अन्य शुल्कों के संबंध में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण बनाम राजेश शर्मा मामले का हवाला दिया, जिसमें शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार विकास प्राधिकरणों को अधिनियम में तय प्रावधानों धारा 15(2-ए)) के बाहर जाकर कोई अतिरिक्त शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं दे सकती। कोर्ट ने कहा कि याची बेटरमेंट चार्ज को छोड़कर सभी शुल्क जमा करेगा। इसके बाद पीडीए जांच कर प्लान स्वीकृत करे। कोर्ट ने कहा कि मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण बनाम राजेश शर्मा केस में सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि धारा 41 के तहत राज्य सरकार विकास प्राधिकरणों को धारा 15(2-ए) में बताए गए शुल्कों के अलावा कोई और शुल्क वसूलने की इजाजत नहीं दे सकती।
बिल्डरों, मकान बनवाने वालों के लिए राहत भरा आदेश
यह आदेश यूपी के हजारों बिल्डरों और मकान बनवाने वालों के लिए राहत भरा हो सकता है। विकास प्राधिकरण अक्सर नक्शा पास करने के नाम पर इम्पैक्ट फीस, बेटरमेंट चार्ज जैसे कई अतिरिक्त शुल्क वसूलते हैं। हाईकोर्ट ने साफ किया कि धारा 15(2-ए) में जिन शुल्कों का जिक्र है, सिर्फ वही लिए जा सकते हैं।
पीडीए और राज्य सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा
कोर्ट ने दोहराया कि ले-आउट प्लान मंजूरी पर निरीक्षण शुल्क, पर्यवेक्षण शुल्क, उप-विभाजन शुल्क, इम्पैक्ट फीस आदि वसूलना संविधान के अनुच्छेद 265 के विपरीत है। कानून में जिसका जिक्र नहीं, वह टैक्स/फीस नहीं लगाई जा सकती। सिर्फ विकास शुल्क ही वैध है। कोर्ट ने मामले को विचारणीय मानते हुए प्रयागराज विकास प्राधिकरण और राज्य सरकार सहित अन्य विपक्षियों को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है।


