कॉलेज के गेट पर 30 दिनों तक खड़ा रहने की सजा वाले निर्देश को हाईकोर्ट ने पलटा, जानें क्या कहा

Feb 07, 2026 05:42 pm ISTDinesh Rathour लाइव हिन्दुस्तान, प्रयागराज
share

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने एकल पीठ के उस विवादास्पद निर्देश को दरकिनार कर दिया है जिसमें नोएडा के एक विश्वविद्यालय के छात्र को एक तख्ती लेकर कॉलेज के गेट पर 30 दिनों तक खड़ा रहने का आदेश दिया गया था।

कॉलेज के गेट पर 30 दिनों तक खड़ा रहने की सजा वाले निर्देश को हाईकोर्ट ने पलटा, जानें क्या कहा

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने एकल पीठ के उस विवादास्पद निर्देश को दरकिनार कर दिया है जिसमें नोएडा के एक विश्वविद्यालय के छात्र को एक तख्ती लेकर कॉलेज के गेट पर 30 दिनों तक खड़ा रहने का आदेश दिया गया था। मैं कभी किसी लड़की से छेड़खानी नहीं करूंगा। लिखी तख्ती के साथ छात्र को 30 दिनों तक कॉलेज के गेट पर खड़ा रहने का आदेश दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने हर्ष अवाना की ओर से दायर एक याचिका को यह कहते हुए निस्तारित कर दिया कि यह आदेश अनुचित और अपमानजनक था तथा इससे उसके चरित्र पर एक अमिट दाग लग जाएगा।

एक अन्य संस्थान की छात्राओं के साथ छेड़खानी के आरोपों के बाद नोएडा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय द्वारा उक्त छात्र को मार्च, 2023 में निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद, छात्र ने उच्च न्यायालय में इस निष्कासन को चुनौती दी और 29 अक्टूबर, 2025 को न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने निष्कासन के आदेश को रद्द कर दिया, लेकिन साथ ही छात्र को विश्वविद्यालय में पुन: दाखिला देने के लिए कई सख्त शर्तें लगा दीं। इन शर्तों में उक्त शर्त भी शामिल थी जिसके तहत छात्र को कॉलेज के गेट पर तीन नवंबर, 2025 से लगातार 30 दिनों तक सुबह 8:45 से 9:15 बजे तक एक तख्ती लेकर खड़ा रहना था।

विश्वविद्यालय को इसकी फोटोग्राफ लेने का निर्देश दिया गया था और इस शर्त का अनुपालन नहीं करने की स्थिति में छात्र को फिर से निष्कासित करने की विश्वविद्यालय को छूट दी गई थी। इस विशेष निर्देश को चुनौती देते हुए छात्र के अधिवक्ता ने खंडपीठ के समक्ष दलील दी कि यह दंड अत्यधिक अपमानित करने वाला है और इसका छात्र के भविष्य पर एक निरंतर, हानिकारक प्रभाव पड़ेगा। पीठ ने चार फरवरी, 2026 को दिए आदेश में कहा, हमारा दृढ़तापूर्वक यह मत है कि उक्त निर्देश की प्रकृति किसी भी परिस्थितियों में उचित नहीं है। इस प्रकृति का निर्देश न केवल अपमानजनक है, बल्कि इसका अपीलकर्ता के चरित्र पर एक अमिट दाग लगेगा।

Dinesh Rathour

लेखक के बारे में

Dinesh Rathour

दिनेश राठौर लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पिछले आठ सालों से काम कर रहे हैं। वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। कानपुर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। पत्रकारिता में 13 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश की डिजिटल मीडिया और प्रिंट जर्नलिज्म में अलग पहचान है। इससे पहले लंबे समय तक प्रिंट में डेस्क पर भी काम किया है। कुछ सालों तक ब्यूरो में भी रहे हैं। यूपी और राजस्थान के सीकर जिले में भी पत्रकारिता कर चुके हैं। यूपी की राजनीति के साथ सोशल, क्राइम की खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाते हैं। वायरल वीडियो की फैक्ट चेकिंग में दिनेश को महारत हासिल है।

और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News, Lucknow News, Meerut News, Ghaziabad News, Agra News और Kanpur News के साथ-साथ UP Board Result, UP Board 10th Result, UP Board 12th Result और UP News अपडेट हिंदी में पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।