आजम खान की याचिका पर हाईकोर्ट का राज्य सरकार को नोटिस, रामपुर से मंगवाए सारे दस्तावेज

विधि संवाददाता, रामपुर
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हाईकोर्ट ने दो पैन कार्ड मामले में दोषसिद्धि और सजा को बढ़ाकर 10 वर्ष किए जाने को चुनौती देने वाली आज़म खान की याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने अगली सुनवाई से पूर्व रामपुर की अदालत के समस्त अभिलेख भी तलब किए हैं।

high Court issues notice to state government on Azam Khan petition in two PAN card case

UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो पैन कार्ड मामले में दोषसिद्धि और सजा को बढ़ाकर 10 वर्ष किए जाने को चुनौती देने वाली पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आज़म खान की याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति जय प्रकाश तिवारी ने मंगलवार को आजम खान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल एवं एनआई जाफरी और एडवोकेट अधिवक्ता शाश्वत आनंद व अंकुर आजाद को सुनकर दिया है।

कोर्ट ने मामले को जुलाई के दूसरे सप्ताह में फ्रेश केस के रूप में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अगली सुनवाई से पूर्व रामपुर की अदालत के समस्त अभिलेख भी तलब किए हैं। पुनरीक्षण याचिका में आज़म खान ने विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए), रामपुर के मूल दोषसिद्धि के निर्णय, उस दोषसिद्धि को बरकरार रखने वाले अपीलीय आदेश और उस बाद के निर्णय को चुनौती दी है, जिससे आईपीसी की धारा 467 के तहत उनकी सजा सात वर्ष से बढ़ाकर दस वर्ष कर दी गई थी।

मामले में अभियोजन का आरोप है कि नामांकन से संबंधित दस्तावेजों में दर्शाए गए पैन कार्ड विवरणों में हेरफेर किया गया था, जिसके आधार पर आईपीसी की धाराओं 420, 467, 468, 471 एवं 120-बी के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया गया। ट्रायल पूर्ण होने के बाद विशेष न्यायालय रामपुर ने आज़म खान एवं सह-अभियुक्त को दोषी ठहराया था। बाद में अपीलीय न्यायालय ने दोषसिद्धि को बरकरार रखा जबकि राज्य सरकार की सजा वृद्धि की अपील आंशिक रूप से स्वीकार कर ली थी, जिसके परिणामस्वरूप आईपीसी की धारा 467 के तहत आज़म खान की सजा सात वर्ष से बढ़ाकर दस वर्ष कैद कर दी थी। पुनरीक्षण याचिका में दोषसिद्धि के निष्कर्षों और सजा वृद्धि की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि विवादित निर्णय गंभीर कानूनी एवं तथ्यात्मक त्रुटियों से ग्रस्त हैं।

नाबालिग लड़कियों के लापता होने पर हाईकोर्ट सख्त

उधर, लखनऊ में नाबालिग लड़कियों के गायब व अगवा होने के मामलों पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने पुलिस कमिश्नर से राजधानी में इस तरह के मामलों पर स्पष्टीकरण मांगा है। इसके साथ ही डीसीपी, पूर्वी को निर्देश दिया है कि वे अपने मातहत आने वाले ऐसे सभी थाना प्रभारियों और विवेचकों के साथ अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से हाजिर हों, जिनके पास इस प्रकार के मामले लंबित हैं। मामले की अगली सुनवाई 10 जून को होगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरी की एकल पीठ ने 12 वर्षीय एक नाबालिग बच्ची के पिता की ओर से दायर की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर पारित किया है। ​मामले के अनुसार, 12 वर्ष की एक मासूम पिछले चार महीने से लापता थी। पुलिस की सुस्ती के बाद जब पिता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया, तब जाकर पुलिस हरकत में आई और बच्ची को बरामद कर कोर्ट में पेश किया।

Pawan Kumar Sharma

लेखक के बारे में

Pawan Kumar Sharma

पवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।

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