जिला कृषि अधिकारी का तीन दिन में करें तबादला, कृषि निदेशक को हाईकोर्ट का आदेश
कृषि निदेशक को इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच ने आदेश दिया है कि वह तीन दिन में श्रावस्ती के जिला कृषि अधिकारी बलजीत बहादुर वर्मा का जिले के बाहर तबादला करें ।

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने आदेश के बावजूद याची कर्मचारी को ज्वाइन न कराने तथा वेतन जारी करने के एवज में जिला कृषि अधिकारी के कार्यालय में रिश्वतखोरी होने के आरोपों के मामले में सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने निदेशक, कृषि को आदेश दिया है कि वह तीन दिन में श्रावस्ती के जिला कृषि अधिकारी बलजीत बहादुर वर्मा का जिले के बाहर तबादला करें। इसके साथ ही न्यायालय ने उक्त अधिकारी व याची कर्मचारी के एक कथित बातचीत के संबंध में सीडीआर प्रस्तुत करने का भी आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने कर्मचारी महेंद्र प्रताप सिंह की विशेष अपील पर पारित किया। कर्मचारी ने अपने निलंबन आदेश को चुनौती दी थी। न्यायालय ने 5 फरवरी को निलंबन आदेश पर रोक लगाते हुए, कर्मचारी को वेतन-भत्तों का लाभ देने का आदेश दिया था।
कर्मचारी का आरोप है कि न्यायालय के स्पष्ट स्थगन आदेश के बावजूद श्रावस्ती के जिला कृषि अधिकारी ने आदेश का पालन नहीं किया और कहा कि कोई स्थगन आदेश नहीं है, सिर्फ जवाबी हलफ़नामा मांगा गया है। याची ने इस बातचीत की कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की, जिसे कोर्ट ने स्वयं सुना। न्यायालय ने जब कोर्ट में मौजूद जिला कृषि अधिकारी से इस बातचीत के संबंध में पूछताछ की तो उन्होंने पहले कथन से इनकार किया, बाद में कहा कि उन्हें याद नहीं है।
मौजूदा हालात में जिला कृषि अधिकारी का उसी कार्यालय में बने रहना उचित नहीं
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि जिला कृषि अधिकारी के कार्यालय में तैनात एक लिपिक सुनील कुमार मौर्य को कर्मचारी का वेतन जारी करने के नाम पर पांच हजार रुपये रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया है और मामले की जांच चल रही है। इन परिस्थितियों को गंभीर मानते हुए खंडपीठ ने कहा कि मौजूदा हालात में जिला कृषि अधिकारी का उसी कार्यालय में बने रहना उचित नहीं है। यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ अवमानना कार्यवाही सहित अन्य विधिक कार्रवाई पर भी विचार किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 18 मई को होगी।
तथ्य छिपाकर याचिका दाखिल करने पर एक लाख का हर्जाना
वहीं एक दूसरे मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में तथ्यों को छिपाकर याचिका दाखिल करना एक वादकारी को भारी पद गया। न्यायालय ने याची पर एक लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। यह आदेश न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की एकल पीठ ने चंद्रमा देवी अग्रहरी की याचिका को खारिज करते हुए, पारित किया। सुनवायी के दौरान न्यायालय ने पाया कि याची ने एक आपराधिक परिवाद मामले में एसीजेएम, सुल्तानपुर द्वारा जारी तलबी आदेश को चुनौती दी है जबकि उसी आदेश के विरुद्ध उसने सुल्तानपुर के ही सत्र न्यायालय के समक्ष पुनरीक्षण प्रार्थना पत्र भी दाखिल कर रखा है तथा इस तथ्य का खुलासा याची द्वारा अपने वाद पत्र में नहीं किया गया है। न्यायालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए, एक लाख रुपये का हर्जाना लगाया जिसमें से तीस हजार रुपये मामले के परिवादी को दिए जाएंगे जबकि 70 हजार रुपये राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को देय होंगे।
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Deep Pandeyदीप नरायन पांडेय लाइव हिन्दुस्तान में पिछले आठ सालों से यूपी की खबरें करते हैं। डिजिटल, टीवी और प्रिंट जर्नलिज्म में 15 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले दीप नरायन पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं। दीप अब डिजिटल मीडिया के जाने माने नाम बन गए हैं। दीप हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को बेहतर समझते हैं। यूपी की राजनीति के साथ क्राइम की खबरों पर अच्छी पकड़ है। सामाजिक, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और हेल्थ पर भी लिखते हैं। दीप पाठकों की पसंद को समझने और उसी तरह से न्पूज प्रस्तुत करने में माहिर हैं। दीप सरल भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुंचाते हैं। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने-लिखने में भी रुचि रखते हैं। मास कम्युनिकेशन में बीए और एमए दीप नरायन पांडेय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोंडा के रहने वाले हैं। दीप ने पत्रकारिता की शुरुवात लखनऊ से की। टीवी चैनल से करियर का आगाज करने वाले दीप इसके बाद प्रिंट अमर उजाला लखनऊ में भी रहे। हिन्दुस्तान प्रिंट में वाराणसी, गोरखपुर, फिर लखनऊ में कार्य के दौरान विभिन्न जिलों के डेस्क इंचार्ज रहे हैं। यूपी विधानसभा चुनाव 2012, 2017, 2022, लोकसभा चुनाव, पंचायत चुनावों के दौरान बेहतर कवरेज कर चुके हैं।
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