दागी वकीलों पर लगाम लगे; फर्जी डिग्रीधारकों की बढ़ती घुसपैठ पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता

विधि संवाददाता, प्रयागराज
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वकालत के पेशे में अपराधी और फर्जी डिग्रीधारी अधिवक्ताओं की बढ़ती मौजूदगी पर चिंता जताई है। कहा है कि यदि समय रहते इस प्रवृत्ति पर अंकुश नहीं लगाया गया तो न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास कमजोर होगा। बता दें कि वर्तमान में 4157 अधिवक्ताओं मामले दर्ज हैं।

high Court expressed concern criminals and lawyers holding fake degrees
फर्जी डिग्रीधारकों की बढ़ती घुसपैठ पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता

UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में वकालत के पेशे में कथित अपराधी तत्वों और फर्जी डिग्रीधारी अधिवक्ताओं की बढ़ती मौजूदगी पर गहरी चिंता जताई है। कहा है कि यदि समय रहते इस प्रवृत्ति पर अंकुश नहीं लगाया गया तो न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास कमजोर होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिवक्ता केवल अपने मुवक्किल के प्रतिनिधि नहीं, बल्कि न्याय वितरण प्रणाली के अभिन्न अंग होते हैं। ऐसे में उनके आचरण और पेशे की शुचिता बनाए रखना बार कौंसिल और न्यायपालिका दोनों की साझा जिम्मेदारी है।

न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने मोहम्मद कफील की याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश में अधिवक्ताओं के आपराधिक रिकॉर्ड, फर्जी डिग्रियों और बार कौंसिल की अनुशासनात्मक व्यवस्था पर व्यापक समीक्षा की। अदालत ने राज्य के डीजीपी, डीजीपी (अभियोजन), यूपी बार कौंसिल तथा रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसायटीज एवं चिट्स से विस्तृत रिपोर्ट तलब की। याची ने इटावा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा पुलिस अधिकारियों को तलब करने से इनकार करने वाले आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मजिस्ट्रेट के फैसले को बरकरार रखा गया था।

कुछ अधिवक्ताओं के खिलाफ दर्ज हैं 40 से अधिक केस

रिपोर्ट के अनुसार यूपी बार कौंसिल में 5.14 लाख से अधिक सक्रिय अधिवक्ता रजिस्टर्ड हैं। इनमें 4157 अधिवक्ताओं के खिलाफ कुल 5056 आपराधिक मामले दर्ज हैं। 418 अधिवक्ताओं पर तीन या उससे अधिक मुकदमे लंबित हैं, जबकि कुछ अधिवक्ताओं के खिलाफ 40 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज होने के बावजूद वे लगातार वकालत कर रहे हैं।

बार कौंसिल निभाए अपने वैधानिक दायित्व

निर्णय के अंत में हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्य केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि विधि व्यवसाय में गहरे संस्थागत और नैतिक संकट का संकेत देते हैं। अदालत ने कहा कि यूपी में वकालत के पेशे में गैंगस्टर, माफिया, आदतन अपराधियों और फर्जी शैक्षणिक योग्यता रखने वाले व्यक्तियों की घुसपैठ न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता के लिए गंभीर खतरा है। न्यायालय ने कहा कि बार कौंसिल यदि अपने वैधानिक दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन नहीं करती है तो विधि व्यवसाय की गरिमा और न्यायपालिका में आमजन का विश्वास दोनों प्रभावित होंगे। इसलिए कठोर, पारदर्शी और सतत सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।

105 वकीलों पर मुकदमा दर्ज करने का निर्देश

कोर्ट ने यूपी बार कौंसिल को निर्देश दिया कि फर्जी डिग्री वाले 105 अधिवक्ताओं के विरुद्ध धोखाधड़ी, जालसाजी और प्रतिरूपण सहित संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई जाए। साथ ही जिन अधिवक्ताओं के खिलाफ जघन्य अपराधों में आरोपपत्र दाखिल हो चुके हैं, उनके विरुद्ध तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर आवश्यकता पड़ने पर उनकी प्रैक्टिस का लाइसेंस निलंबित किया जाए। कोर्ट ने जिला न्यायाधीशों, पुलिस अधिकारियों और यूपी बार कौंसिल के बीच नियमित सूचना आदान-प्रदान की व्यवस्था विकसित करने के भी निर्देश दिए, ताकि ऐसे मामलों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

Pawan Kumar Sharma

लेखक के बारे में

Pawan Kumar Sharma

पवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।

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