कांवड़ मार्ग पर चिकन, मटन शॉप बंद करने के नोटिस पर हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका, जानें क्या कहा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सावन माह में चिकन मटन शॉप को बंद किए जाने के नोटिस के विरुद्ध दाखिल जनहित याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि याची अधिवक्ता है और उसने याचिका पब्लिक इंटरेस्ट में नहीं, बल्कि पब्लिसिटी इंटरेस्ट में दाखिल की है।

Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सावन माह में चिकन मटन शॉप को बंद किए जाने के नोटिस के विरुद्ध दाखिल जनहित याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि याची अधिवक्ता है और उसने याचिका पब्लिक इंटरेस्ट में नहीं, बल्कि पब्लिसिटी इंटरेस्ट में दाखिल की है। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली एवं न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने दिया है। अमरोहा के अधिवक्ता नासिर फारूक ने जनहित याचिका में सावन माह के दौरान चिकन शॉप बंद किए जाने के नोटिस की वैधानिकता को चुनौती दी थी। प्रदेश सरकार की ओर से अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय ने याचिका का विरोध किया।
जनहित याचिका में कहा गया था कि अमरोहा में कांवड़ मार्ग से हटकर जो चिकन व मटन की दुकानें थीं, पुलिस ने उन्हें भी अनडेटेड नोटिस जारी करके बंद करा दिया है। इस कारण सैकड़ों लोगों की आजीविका पर संकट उत्पन्न हो गया है। याची के अधिवक्ता मुस्तकीम अहमद ने हाईकोर्ट से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए जारी किए गए अनडेटेड नोटिस को रद्द करने की मांग की थी। याची का कहना था कि नोटिस में सिर्फ चार सोमवार का जिक्र किया गया है लेकिन पूरे सावन माह में चिकन और मटन की शॉप नहीं खुलने दी जा रही हैं। साथ ही कांवड़ मार्ग के अलावा गलियों और कांवड़ मार्ग से हटकर जो दुकानें हैं, उन्हें भी बंद करा दिया गया है। इस कारण बड़ी संख्या में लोगों के सामने रोज़गार का संकट खड़ा हो गया है।
संदिग्ध लेनदेन पर खाता फ्रीज नहीं कर सकती जांच एजेंसी: HC
वहीं दूसरी ओर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक अहम फैसले में कहा है कि यदि साइबर अपराध से जुड़ा संदिग्ध लेनदेन किसी निश्चित रकम तक सीमित है तो जांच एजेंसी किसी व्यक्ति का पूरा बैंक खाता डेबिट फ्रीज नहीं कर सकती। खाते पर लगाई गई रोक संदिग्ध अपराध की रकम तक ही सीमित और आनुपातिक होनी चाहिए। न्यायालय ने कहा कि जांच अधिकारी को संबंधित बैंक को एफआईआर, खाते पर रोक लगाने का आधार और लियन के लिए निर्धारित रकम की जानकारी देनी होगी। साथ ही कानून के अनुसार संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट को भी इसकी सूचना देनी होगी। न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने रितेश यादव की याचिका निस्तारित करते हुए पारित किया। न्यायालय ने सम्बंधित बैंक को उनके खातों को डी-फ्रीज करने और 36 हजार रुपये से अधिक की रकम के संचालन की अनुमति देने का निर्देश दिया। कहा कि 36 हजार रुपये पर लियन बना रहेगा। न्यायालय ने कहा कि साइबर अपराध की जांच के दौरान बैंक खाता फ्रीज करने की शक्ति का इस्तेमाल इस तरह नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति की पूरी वित्तीय गतिविधियां और वैध कारोबार ही ठप हो जाए।
बैंक खाता फ्रीज होने पर हाईकोर्ट पहुंचा था याची
याची ने कई बैंकों में अपने खाते फ्रीज किए जाने के बाद हाईकोर्ट का रुख किया था। याची के अनुसार, कर्नाटक में साइबर अपराध की जांच के सिलसिले में उसके बंधन बैंक खाते में 36 हजार रुपये की संदिग्ध रकम आने के बाद खाते फ्रीज किए गए थे। इसके साथ ही कोर्ट ने अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों को निर्देश दिया कि वे इस शिकायत निवारण व्यवस्था का पालन करें और खातों के फ्रीज होने या डिजिटल बैंकिंग सेवाएं रोके जाने से संबंधित शिकायतों के लिए उचित नोडल व्यवस्था बनाएं। शाखाओं और वेबसाइट पर भी इस प्रक्रिया की जानकारी प्रमुखता से उपलब्ध कराने को कहा गया। न्यायालय ने अपने आदेश की प्रति आरबीआई को भी भेजने का निर्देश दिया, ताकि उसे सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अनुपालन के लिए भेजा जा सके। यही भी स्पष्ट किया कि उसके निर्देश साइबर अपराध की जांच के लिए जांच एजेंसियों की वैधानिक शक्तियों को कम करने के लिए नहीं हैं, बल्कि इन शक्तियों का इस्तेमाल पारदर्शी, आनुपातिक और कानून के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए हैं।


