
सड़क पर हार्ट अटैक: सीना पकड़कर लुढ़क गया लड़का, देखकर दौड़े दरोगा ने यूं बचा ली जान
दरोगा ने सड़क पर अचानक गिरे युवक की हालत देखी तो दौड़ते हुए वहां पहुंच गए। नब्ज नहीं मिलने पर उन्होंने तत्काल सीपीआर देना शुरू कर दिया। कुछ देर बाद युवक की स्थिति सामान्य होने पर दरोगा ने उसकी पत्नी के साथ अस्पताल भेजा। वहीं युवक को CPR देते हुए एक शख्स ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
यूपी के कानपुर में एक दरोगा ने सीपीआर ट्रेनिंग का इस्तेमाल करते हुए कार्डियक अरेस्ट के शिकार एक ल़ड़के की जान बचा ली। लड़का, राह चलते अचानक सीना पकड़ कर पहले बैठा फिर लुढ़क गया था। चौकी के पास खड़े दरोगा ने युवक की स्थिति देखी तो दौड़ कर नब्ज पर हाथ रखा। नब्ज नहीं मिलने पर उन्होंने तत्काल सीपीआर देना शुरू किया। कुछ देर बाद युवक की स्थिति सामान्य होने पर दरोगा ने उसकी पत्नी के साथ अस्पताल भेजा। वहीं युवक को सीपीआर देते हुए वहां से गुजर रहे एक शख्स ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। जिसके बाद विभाग से लेकर सोशल मीडिया पर दरोगा की तारीफ हो रही है।

गाजियाबाद के अतरौली गांव निवासी किसान बृजेंद्र सिंह के बेटे रोहित तोमर 2019 में यूपी पुलिस में दरोगा के पद भर्ती हुए। उन्होंने बताया कि पुलिस की ट्रेनिंग के दौरान उन्हें सीपीआर की भी ट्रेनिंग दी गई थी। इसके बाद 2024 में शहर के कैंट थाने में तैनाती के दौरान भी उन्होंने सीपीआर की ट्रेनिंग ली थी। ट्रेनिंग के बाद से कभी भी ऐसी स्थिति नहीं आई थी कि वह किसी को सीपीआर दे सके।
वर्तमान में वह मूलगंज थाना अन्तर्गत बकरमंडी चौकी प्रभारी हैं। मंगलवार दोपहर करीब डेढ़ बजे वह चौकी के बाहर खड़े थे। इस दौरान उन्हें एक महिला के जोर-जोर से रोने की आवाज सुनाई दी। उन्होंने देखा तो चौकी से चंद कदम की दूरी पर करीब 40 साल का एक युवक जमीन पर बेसुध हालत में गिरा पड़ा है। उसके साथ मौजूद बुर्का पहने हुई महिला रो रही है।
युवक के साथ मौजूद दूसरे शख्स और अन्य लोगों ने उसके मृत होने की बात कही। लेकिन उसकी स्थिति देखकर उन्हें कार्डियक अरेस्ट होने का एहसास हुआ। तत्काल उन्होंने युवक को उठाकर बेंच पर लिटाया। उसे सीपीआर देना शुरू किया। इस बीच व्यक्ति के साथ मौजूद उसकी पत्नी ने भी मुंह लगाकर उसे सांस दी। करीब तीन मिनट तक सीपीआर देने पर उसने आंख खोल दी। उन्होंने तत्काल ई-रिक्शा कराकर महिला को उर्सला अस्पताल भेजा। जहां स्थिति खतरे से बाहर होने के कारण डॉक्टर ने प्राथमिक इलाज कर उन्हें घर भेज दिया। रोहित ने कहा कि उस वक्त उसकी जान बचाना प्राथमिकता थी, लिहाजा मैं उनका नाम-पता भी नहीं पूछ सका।





