मां भद्रकाली शक्तिपीठ पर 21 कुंडीय शतचंडी यज्ञ बही भक्ति की बयार
मां भद्रकाली मंदिर में यज्ञ करते श्रध्दालु। मां भद्रकाली शक्तिपीठ पर 21 शतचंडी यज्ञ बही भक्तिमां भद्रकाली शक्तिपीठ पर 21 शतचंडी यज्ञ बही भक्तिमां भद्

सहपऊ। कस्बे के प्रसिद्ध मां भद्रकाली शक्तिपीठ मंदिर में आयोजित 21 कुंडीय शतचंडी महायज्ञ के चौथे दिन वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ विद्वान आचार्यों द्वारा हवन-पूजन संपन्न कराया गया। महायज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर मां भगवती का आशीर्वाद प्राप्त किया। विद्वानों ने बताया कि शतचंडी महायज्ञ सनातन धर्म का अत्यंत प्रभावशाली एवं दिव्य वैदिक अनुष्ठान है, जो मां दुर्गा की कृपा, शक्ति और विश्व कल्याण की कामना से संपन्न किया जाता है। इस अनुष्ठान में देवी महात्म्य (दुर्गा सप्तशती) के 700 श्लोकों का विशेष पाठ एवं विधिवत हवन-पूजन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे मां भगवती की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है。
महायज्ञ का महत्व
आचार्यों ने बताया कि शतचंडी महायज्ञ साधक और उसके परिवार को मां दुर्गा का विशेष संरक्षण प्रदान करता है। यह अनुष्ठान नकारात्मक शक्तियों, भय एवं संकटों से रक्षा कर आत्मबल और आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक माना जाता है। साथ ही ग्रह दोष, वास्तु दोष तथा जीवन की विभिन्न बाधाओं के निवारण के लिए भी इसका विशेष महत्व है。
परिवार के लिए लाभ
उन्होंने कहा कि श्रद्धा और आस्था के साथ किए गए इस महायज्ञ से परिवार में सुख-समृद्धि, धन-धान्य और ऐश्वर्य की वृद्धि होने की मान्यता है। इसके अतिरिक्त मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और उत्तम स्वास्थ् की प्राप्ति के लिए भी यह अनुष्ठान लाभकारी माना जाता है।
उपस्थित लोग
इस अवसर पर पंकज शुक्ला एडवोकेट, राजकुमार, नरेंद्र मोहन, कौशल शुक्ला आदि मौजूद रहे
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