हल्की सी आंधी में चरमराई व्यवस्था, 38 घंटे अंधेरे में डूबा रहा गढ़ऊआ गांव।
Hathras News - हल्की सी आंधी में चरमराई व्यवस्था, 38 घंटे अंधेरे में डूबा रहा गढ़ऊआ गांव।हल्की सी आंधी में चरमराई 38 घंटे अंधेरे मेंहल्की सी आंधी में चरमराई 38 घंटे

हल्की सी आंधी में चरमराई व्यवस्था, 38 घंटे अंधेरे में डूबा रहा गढ़ऊआ गांव। -(A) हल्की सी आंधी में चरमराई व्यवस्था, 38 घंटे अंधेरे में डूबा रहा गढ़ऊआ गांव।
गांव में अंधेरा
सासनी ।बिजली विभाग की लापरवाही और खोखले दावों की पोल एक बार फिर खुल गई है। सासनी के बिजलीघर उपकेंद्र छौडा गढ़ऊआ के अंतर्गत आने वाले गांव गढ़ऊआ में गुरुवार को आई आंधी बारिश के चलते शनिवार करीब दस बजे तक विद्युत आपूर्ति ठप्प रही । भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण बूंद-बूंद पानी और रोशनी के लिए तरस गए , लेकिन जिम्मेदार मूकदर्शक बने बैठे रहे हैं।सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि गढ़ऊआ गांव से बिजली घर की दूरी मात्र 1 किलोमीटर है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब बिजली घर के बिल्कुल नाक के नीचे महज़ एक किलोमीटर के दायरे में विभाग का यह हाल है, तो दूर-दराज के अन्य गांवों की स्थिति क्या होगी? वहां की बदहाली तो सिर्फ भगवान भरोसे ही छोड़ी जा सकती है。
ग्रामीणों की शिकायतें
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में कोई बड़ा चक्रवात या तूफान नहीं आया था। हल्की सी आंधी आते ही विद्युत व्यवस्था का इस कदर पूरी तरह से ध्वस्त हो जाना और घंटों तक ब्रेकडाउन रहना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मानसून से पहले की जाने वाली रखरखाव (मैंटिनेंस) के दावों की जमीनी हकीकत इस 38 घंटे के ब्लैकआउट ने बयां कर दी है।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब भी समस्या की जानकारी देने या बिजली आपूर्ति के बारे में पूछने के लिए संबंधित अधिकारियों को फोन लगाया जाता है, तो अधिकारियों के फोन रिसीव ही नहीं होते। उपभोक्ताओं की शिकायतों को इस तरह अनसुना करना बिजली विभाग की तानाशाही को दर्शाता है।
विभाग का स्पष्टीकरण
बिजली विभाग के जेई देवेन्द्र कुमार का कहना हैं कि गुरुवार को देवीय आपदा आने की बजह से एक पोल क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसे शुक्रवार की शाम को लगा दिया गया था, जिस समय लाइन पर काम चल रहा था उस समय फिर से आंधी बारिश आ गईं थी जिस की बजह से काम नहीं हो पाया था, शनिवार करीब दस बजे बिद्युत व्यबस्था को सुचारु रूप से चालू कर दिया गया हैं ।
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