22 दिन बाद खुला राज,कब्र से निकला शव हासिम नहीं,सुभाष का निकला

Newswrap हिन्दुस्तान, हाथरस
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Hathras News - शव को बाहर निकालने के लिए खुदाई करते मजदूर 22 दिन बाद खुला राज,कब्र निकला शव हासिम नहीं,सुभाष22 दिन बाद खुला राज,कब्र निकला शव हासिम नहीं,सुभाष22 दिन

22 दिन बाद खुला राज,कब्र से निकला शव हासिम नहीं,सुभाष का निकला

​सासनी, संवाददाता। सासनी के इग्लास रोड स्थित नवनिर्मित दुर्गा धाम कॉलोनी में बीती 9 मई को मिले एक अज्ञात शव के मामले में पुलिस की एक बहुत बड़ी चूक सामने आई है। जिस शव को एक मुस्लिम परिवार ने अपने 24 वर्षीय बेटे हासिम पुत्र साबिर का बताकर पोस्टमार्टम कराया और सुपुर्द-ए-खाक कर दिया था, वह असल में शव गांव लोहर्रा निवासी 31 वर्षीय सुभाष का निकला। शनिवार को करीब 22 दिन के लंबे इंतजार के बाद पुलिस ने शव को निकलवाकर सुभाष के परिजनों को सौंप दिया, जिसके बाद पैतृक गांव में उसका दाह संस्कार किया गया। नौ मई को शव मिलने के बाद जब पुलिस मामले की छानबीन कर रही थी, तब कोतवाली चौराहे से कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस इगलास रोड स्थित पानी की टंकी के पास पहुंची। वहां पवन नामक व्यक्ति के घर पर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाली जा रही थी, तभी पवन के भाई ओमप्रकाश ने पुलिस को बताया कि उनका साला सुभाष निवासी लोहर्रा भी 5 मई की शाम से रहस्यमय परिस्थितियों में गायब है। परिजनों ने बारीकी से सीसीटीवी फुटेज देखी, तो फुटेज में दिख रहा युवक कोई और नहीं बल्कि लापता सुभाष ही था।​ 22 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ इस मर्डर मिस्ट्री में पूरी तरह खाली हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि सुभाष की हत्या आखिर किसने की? हत्या के पीछे की वजह क्या थी? और शव को दुर्गा धाम कॉलोनी में क्यों फेंका गया? इन सभी सवालों का जवाब मिलना अभी बाकी है और इलाके में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

स्पष्ट दिख रहे थे संकेत लेकिन न जांच में पकड़ सके न पोस्टमार्टम में

​सासनी, संवाददाता। ​​इस पूरे मामले में पुलिस और पोस्टमार्टम करने वाले पैनल की दूरदर्शिता पर बड़ा सवालिया निशान लगा है। जब शव का पोस्टमार्टम हुआ, तो कागजों में हासिम की उम्र करीब 24 वर्ष दर्शाई गई थी, जबकि मृतक सुभाष की उम्र करीब 31 वर्ष थी। उम्र के इस 7 साल के बड़े अंतर को भी पुलिस शुरुआती जांच में पकड़ने में नाकाम रही और आनन-फानन में शव दूसरे परिवार को सौंप दिया गया।

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हासिम के परिजनों द्वारा शव की पहचान किए जाने के बाद पुलिस को सूचना मिली थी कि हासिम जिंदा है और हैदराबाद में है। पुलिस की एक टीम उसे ढूंढने के लिए हैदराबाद भी रवाना हुई थी, लेकिन वहां पहुंचने पर पता चला कि हासिम वहां से भी कहीं और निकल गया है। इसके बाद पुलिस टीम को खाली हाथ वापस लौटना पड़ा था।इस मामले में एक और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। कानूनी प्रक्रिया के तहत दोनों पक्षों के DNA सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए थे। लेकिन सूत्रों का दावा है कि शनिवार को पुलिस ने बिना डीएनए रिपोर्ट का इंतजार किया। सिर्फ परिजनों से एफिडेविट लिखवाकर शव उनके सुपुर्द कर दिया। ​​मृतक सुभाष के पिता नौरंगीलाल ने दो शादियां हुई थीं। पहली पत्नी से एक बेटा और एक बेटी है, जबकि दूसरी पत्नी से भी एक बेटा और एक बेटी है। नौरंगीलाल ने अपनी दो बेटियों और एक बेटे की शादी पहले ही कर दी थी। सुभाष की इस तरह संदिग्ध मौत के बाद पूरे परिवार में कोहराम मचा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

हासिम हैदराबाद में

सीओ की माने तो 24 वर्षीय हासिम पुत्र साबिर की सासनी कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज थी,लेकिन वह हैदराबाद में मिल चुका है। परिजनों को वीडियो कॉल पर उसे दिखा दिया गया है। वह किन्हीं कारणों से अपने गांव आना नहीं चाहता है। परिवार के लोग भी संतुष्ट है। घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मजिस्ट्रेट की निगरानी में शव को कब्र से निकालकर सुभाष का शव उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। विसरा सुरक्षित कर लिया गया है। पूरे मामले की जांच की जा रही है। उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

हिमांशु माथुर, सीओ सिटी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुभाष का शव कब मिला?
सुभाष का शव 9 मई को मिला।

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