
महिलाओं पर खास नजर, रसोई से लेकर कामकाजी जीवन तक राहत की कोशिश
Hathras News - केंद्रीय बजट में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएँ पेश की गई हैं। घरेलू महिलाओं की रसोई से जुड़े मामलों, कामकाजी महिलाओं की जरूरतों और छात्राओं की शिक्षा पर ध्यान दिया गया है। महंगाई को कम करने के लिए खाद्य वस्तुओं और पोषण योजनाओं पर जोर दिया गया है। इस बजट को महिलाओं के जीवन के हर पहलू को सशक्त करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
हाथरस। केंद्रीय बजट में इस बार महिलाओं को लेकर सरकार ने व्यापक दृष्टिकोण अपनाने का प्रयास किया है। घरेलू महिलाओं की रसोई से जुड़ी चिंताओं, कामकाजी महिलाओं की जरूरतों और छात्राओं की शिक्षा को ध्यान में रखकर कई स्तरों पर प्रावधान किए गए हैं। महंगाई के दौर में घरेलू रसोई पर पड़ रहे बोझ को कम करने के उद्देश्य से खाद्य वस्तुओं, पोषण और आय से जुड़ी योजनाओं पर जोर दिया गया है। घरेलू महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूहों, लघु उद्यम और घरेलू स्तर पर आय बढ़ाने वाली योजनाओं को विस्तार देने की बात कही गई है। जिससे रसोई चलाने वाली महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
कामकाजी महिलाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास और सुरक्षित कार्य वातावरण से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाने का संकेत दिया गया है। छात्राओं के लिए शिक्षा, छात्रावास और तकनीकी प्रशिक्षण के अवसर बढ़ाने पर भी फोकस रखा गया है। स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं की सेहत, मातृत्व और बच्चों के पोषण को बेहतर बनाने की कोशिश की गई है। कुल मिलाकर यह बजट महिलाओं के जीवन के हर पहलू घर, रसोई और कार्यस्थल को संतुलित रूप से सशक्त करने की दिशा में कदम माना जा रहा है। हालांकि इसका लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचना जरूरी होगा। वर्जन इस बजट में महिला सशक्तिकरण को केवल नारे तक सीमित नहीं रखा गया, उसे जमीन पर उतारने की ठोस कोशिश दिखती है। शी-मार्ट्स जैसी पहल महिला उद्यमियों को छोटे काम से आगे बढ़ाकर अपने उत्पाद की पहचान, सही बाजार और आत्मनिर्भरता देगी, जो लंबे समय में आर्थिक मजबूती का आधार बनेगी। दीप्ती वाष्र्णेय। हर जिले में गर्ल्स होस्टल की घोषणा बेहद सराहनीय कदम है। इससे खासकर स्टेम जैसी पढ़ाई कर रही छात्राओं को सुरक्षित माहौल मिलेगा और परिवारों का भरोसा बढ़ेगा। आवास की चिंता खत्म होने से बेटियां बिना रुकावट अपनी उच्च शिक्षा पूरी कर सकेंगी। राखी चौहान। बजट में घरेलू रसोई पर ध्यान देना जरूरी था, क्योंकि महंगाई सबसे पहले गैस, दाल, तेल और सब्जी पर असर डालती है। अगर योजनाओं से रसोई का खर्च कम हुआ तो घर की महिलाएं सबसे ज्यादा राहत महसूस करेंगी। चारु शर्मा। घरेलू महिलाओं को आय से जोड़ने की बात अच्छी है, लेकिन इसे सिर्फ कागजों तक सीमित न रखा जाए। अगर घर से काम और स्वयं सहायता समूहों को सही बाजार मिले तो रसोई की चिंता काफी हद तक कम हो सकती है। अनुराधा गुप्ता। कामकाजी महिलाओं के लिए कौशल और रोजगार की बात सराहनीय है, पर घरेलू जिम्मेदारियों के साथ काम करने वाली महिलाओं के लिए लचीले अवसर भी जरूरी हैं, तभी बजट का असली फायदा नजर आएगा। ऋतु वाष्र्णेय। रसोई से जुड़ी महंगाई हर महिला को प्रभावित करती है। बजट में पोषण और खाद्य योजनाओं पर जोर देने से उम्मीद है कि बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ेगा। रजनी आंधीवाल। कामकाजी महिलाओं के लिए सुविधाएं बढ़ाना सही कदम है, लेकिन घर और दफ्तर के दोहरे बोझ को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाई जानी चाहिए, तभी महिलाएं वास्तव में आगे बढ़ सकेंगी। लक्ष्मी सविता। घरेलू रसोई से जुड़ी योजनाएं अगर ईमानदारी से लागू हुईं तो महिलाओं को उधार और कटौती के बिना घर चलाने में मदद मिलेगी, जो हर मध्यम वर्गीय परिवार की बड़ी जरूरत है। चंद्रकांता शर्मा।

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