
माथे पर तिलक कर बहनों ने की भाईयों के लिए दीर्घायु कामना
संक्षेप: Hathras News - 19 अक्टूबर से शुरू हुआ दीपावली का पंचदिवसीय पर्व भाई दूज के साथ समाप्त हुआ। इस दौरान बहनों ने भाइयों की लंबी उम्र की कामना की और भाइयों ने उपहार भेंट किए। भाई दूज का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम का...
सासनी। दिनांक 19 अक्टूबर दिन रविवार से अंधकार पर प्रकाश की जीत के प्रतीक पंचदिवसीय पर्व दीपावली पर दीपों की सुंदर कतार और टिमटिमाती जगमगाती रंग-बिरंगी रोशनी से घर, गली, सड़क रोशन रहे। इस त्यौहार का भाई दूज के साथ गुरूवार को समापन हो गया। गुरूवार को भाई दूज पर भाई के लंबी उम्र की कामना हर बहन के मन व दिलों में सदियों से रही है। भाई के लंबी आयु की कामना का पर्व भाई दूज बुधवार को शहर और गांव में बहनों ने पूरे विधि-विधान व धार्मिक अनुष्ठान के साथ मनाया। भाई बहन के अटूट प्रेम को सूत्र में पिरोते इस त्योहार को जितना उत्साह बहनों में दिखा उतने ही भाई भी उत्साह में दिखाई दिए।
बहनों ने अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु की कामना की तो भाइयों ने भी उनकी सुरक्षा करने का संकल्प लेते हुए उपहार भेंट किया। भाई दूज के बारे में शिवशक्ति ज्योति आराधना केन्द्र संस्थापक आचार्य खगेन्द्र शास्त्री ने बताया कि भाई दूज के रूप में मनाए जाने वाले त्योहार के लिए ऐसा माना जाता है, कि दीपावली के बाद भाई दूज के दिन ही यमराज ने अपने बहन यमी के घर का रुख किया था। जहां पर यमराज की बहन यमी ने उनके माथे पर तिलक लगाकर उनके कल्याण की कामना की थी। मान्यता है कि इस दिन जो भी भाई अपनी बहन से माथे पर तिलक लगवाता है, वह कभी भी नर्क में नहीं जाता। एक अन्य दंत कथा के अनुसार भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध करने के बाद अपनी बहन सुभद्रा के घर का रुख किया था। जहां पर कृष्ण की बहन सुभद्रा ने दिए जलाकर भाई का स्वागत किया था, और तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र की कामना की थी। वर्तमान में भी यह प्रथा चली आ रही है। ऐसा माना जाता है कि दीपावली का पर्व इस त्योहार के बिना अधूरा है।

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