Hathras News: भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए भक्त गंगाजल व जल लेकर पहुंचे शिवालय
Hathras News: भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए भक्त गंगाजल व जल लेकर पहुंचे शिवालयभगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए भक्त गंगाजल व जल लेकर पहुंचे शिवालयभगवान शिव का

Hathras News: भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए भक्त गंगाजल व जल लेकर पहुंचे शिवालय हसायन। विकासखंड क्षेत्र के कस्बा से लेकर देहात क्षेत्र में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को तीसरे सोमवार पर शिवालय व देवालयों में महाकाल के भक्तों का सैलाब सड़क से लेकर शिवालय तक उमड़ता दिखाई दिया। भगवान भोलेनाथ के भक्तो ने श्रध्दा,आस्था,विश्वास की त्रिवेणी प्रवाहित होते हुए दिखाई दी।
शिव भक्तों का उत्साह
सोमवार को शिव भक्त गंगाघाट कछला व सोरों जी लहरा गंगाघाट से डाक कावंड,कंधा कावंड,हस्त कावंड,दंडवत कावंड में गंगाजल लेकर भगवान भोलेनाथ शिव शंभू का जल से अभिषेक करने के लिए पहुंचे।श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को तीसरे श्रावणी सोमवार को भोर की पहली किरण से शिवालयों में गंगाजल के साथ विधि विधान के साथ पूजा अर्चना कर रुद्राभिषेक भी किया।शिव भक्त शिवालय में भगवान शिव के भक्त भगवान शिव की मूर्ति,शिवलिंग व भगवान शिव परिवार का जल,दुग्ध से अभिषेक करते हुए बेलपत्र, धतूरा, शहद, घी, दही के अलावा मनोकामना पूर्ण कराए जाने के लिए आरती उतारकर पूजा करते हुए दिखाई दिए।श्रावण मास के तीसरे सोमवार में कावंडिए की पायल की रून झुन के साथ बम भोले,जय महाकाल,जय शिव शंभू के जयकारे के अलावा कावंडिए भी गंगाघाट से गंगाजल लेकर जाते दिखाई दिए।क्षेत्र के गांंव अंडौली में श्रावण मास के तीसरे सोमवार को शिव भक्त कावंडिए अपने अपने एैंच्छिक स्वेच्छानुसार डाक,कंधा सोल्डर कलश कावंड,हस्त कावंड लेकर पहुंचे शिव भक्तों के आगमन के दौरान वातावरण भक्तिमय दिखाई दिया।
नाग पंचमी का उत्सव
नाग पंचमी पर बच्चों ने की नाग देव स्थल पर पहुंचकर पूजा अर्चना
हसायन।विकासखंड क्षेत्र के कस्बा व देहात क्षेत्र में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के पांचवे दिवस में पंचमी तिथि को वैदिक सनातन धर्म के अनुयाईंयो के द्वारा नाग पंचमी का त्योहार मनाया। नाग पंचमी के पर्व को लेकर बच्चो में काफी उत्साह दिखाई दिया। नाग पंचमी के अवसर पर सोमवार को बच्चों के द्वारा अपने अपने घर से पात्र में दुग्ध लेकर नाग देवता के स्थल पर अर्पित करते दिखाई दिए।
वैदिक सनातन धर्म के श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ही नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है।महिलाओं ने घर घर में परंपरागत तरीके से दीवार पर काले रंग के कोयले से सर्प सांपो की आकृति उकेरकर व प्रतीकात्मक कागज पर छपे हुए प्रतीकात्मक सर्प नाग देवता के छायाचित्र को चस्पा कर विधि विधान के साथ नाग देवता की सेवई,चावल,खीर सहित विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाकर पूजा अर्चना की। बच्चों ने भी नाग देवता के निवास विश्राम स्थल पर दुग्ध अर्पित कर वहां से दुग्ध पात्र में मिट्टी खोदकर अपने घर पर पहुंचे। जहां पर महिलाओ ने नाग देव विश्राम निवास स्थल से आई मिट्टी को घर घर में सुखाकर मिट्टी में गेह,जौ का बीजारोपण किया।नाग पंचमी से श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को दस दिन रह जाते है। नाग पंचमी मनाए जाने के कई पौराणिक मत है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने कालिया नाग का मान मर्दन किया था। नाग देवता की पूजा करने से हर समय नाग देव की परिवार घर कृपा बनी रहती है, साथ ही सर्प के दंशित होने का भी भय नहीं रहता है। महाभारत में राजा जन्मेजय के द्वारा किए गए सर्प यज्ञ को आस्तिक मुनि के द्वारा रोके जाने के कारण नाग प्रजाति को जीवनदान मिलने के कारण माना गया है।
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