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संशोधित खबर- सूखी ठंड से आलू की फसल को खतरा, झुलसा रोग आया

संशोधित खबर- सूखी ठंड से आलू की फसल को खतरा, झुलसा रोग आया

संक्षेप:

Hathras News - सूखी ठंड से आलू की फसल को खतरा, झुलसा रोग आया संशोधित खबर- सूखी ठंड से आलू की फसल को खतरा, झुलसा रोग आया संशोधित खबर- सूखी ठंड से आलू की फसल को खतरा,

Jan 05, 2026 01:01 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, हाथरस
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हाथरस। पिछल एक सप्ताह से जनपद में लगातार सूखी ठंड पड़ रही है। इसने आलू किसानों की चिंता को बढ़ा दिया है। इसकी वजह से जनजीवन जहां पूरी तरह से ठिठुर गया है वहीं आलू की फसल प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है। कृषि वैज्ञानिक किसानों को आलू की फसल को बचाने का सलाह दे रहे हैं। दूसरी तरफ लगातार सर्द हवाएं चलने से पारा लुढ़कता जा रहा है। शनिवार को अधिकतम तापमान 21 व न्यूनतम 9 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। वहीं रविवार को पारा लुढक कर अधिकतम 17 और न्यूनतम 7 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। कड़ाके की ठंड व गलन से हर कोई परेशान है।

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जगह-जगह लोग अलाव तापते देखे गए। रविवार को शाम करीब 4 बजे नाम मात्र की धूप निकलने से लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली। गलन इतनी बढ़ी कि सात बजे तक सड़कों पर सन्नाटा नजर आने लगा। सड़कों पर निकलने वाले लोग पूरी तरह से ऊनी कपड़ों से लैस थे। बाइक सवार भी हेलमेट लगा कर चल रहे थे। स्कूलों में छुट्टी होने की वजह से बच्चे राहत महसूस कर रहे थे। जिला प्रशासन की तरफ से रैन बसेरा में लोगों की ठहरने की व्यवस्था की गई है। जनपद में इस बार आलू का रकबा बढ़कर 52 हजार हेक्टेयर से ज्यादा है जो पिछले साल 50 हजार हेक्टेयर था। -- जनपद के इन क्षेत्रों में होता है ज्यादा आलू उत्पादन जिले में सादाबाद क्षेत्र आलू उत्पादान के मामले में सबसे आगे है। यहां आलू के अलावा दुसरी फसलें आपको नाम मात्र देखने को मिलेंगी। सहपऊ और सासनी में भी बड़े स्तर पर आलू की बुवाई की जाती है। वहीं सिकंदरा राऊ व हसायन में धान के साथ गेहूं, मक्का, बाजरा व दलहनी फसलों की खेती की जाती है। ------- वर्जन - ज्यादा सर्दी पड़ने से आलू की फसल में नुकसान का डर है। इससे बचने को दवा लगवा रहे हैं। लगातार कुछ दिन और ऐसी ठंड पड़ी तो आलू में लेट ब्लाइट आने से फसल खराब हो सकती है। - रामगोपाल सिंह, निवासी गढ़ऊआ -- पिछले एक सप्ताह से सर्दी कुछ ज्यादा ही पड़ रही है। मेरे एक खेत में लेट ब्लाइट आने से पूरे चक में फसल खराब हो गई है। इससे फसल के उत्पादन पर असर पड़ेगा। रोहित, दिनावली -- सूखी ठंड में पाला पड़ने से आलू की फसल को नुकसान होने से बचाने के लिए दवा लगवा रहा हूं, अगर एक बार रोग आ गया तो नुकसान हो जायेगा। इस बार उम्मीद थी मौसम ठीक रहने से उत्पादन बढ़ेगा, लेकिन अभी नुकसान का डर है। उमाशंकर पाठक, निवासी दिनावली -- बढ़ती सर्दी में पाला जमने के डर से दवा लगवा दी है। ऐसा नहीं करने पर आलू की फसल में लेट ब्लाइट यानी झुलसा रोग आने की संभावना रहती है। हल्की धूप के साथ तापमान अनुकूल रहे तो अच्छा रहे। भुवनेश सेंगर, निवासी बरसै ------ पाला से बचाने को आलू की फसल के लिए यह करें छिड़काव आलू की फसल में पाला की संभावना है। ऐसे में किसान अलर्ट रहे। वह सायनिक नियंत्रण के लिए कीटनाशक थायक्लोप्रिड 21.7 प्रतिशत एससी या फ्रिप्रोनिल 5 प्रतिशत एससी दवा का 0.5 मिली प्रति लीटर पानी में घोर छिड़काव करना चाहिए। जिन खेतों में झुलसा रोग का प्रकोप हो गया हो तो ऐसी स्थिति में रोकथाम के लिए अंत:ग्राही फफूदनाशक मेटालेक्जिकल युक्त रसायन दो ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर अथवा साइमोक्जोनिल फफूंदनाशक युक्त रसायन तीन किग्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर प्रथम छिड़काव करें तथा आठ से दस दिन बाद द्वितीय छिड़काव करें। - निखिलदेव तिवारी, जिला कृषि रक्षा अधिकारी --- वर्तमान समय में पाला पड़ रहा है। इससे आलू की फसल को काफी नुकसान होने की संभावना है। पाला से झुलसा रोग प्रभावित करेगा। ऐसे में किसान समय-समय पर आलू की फसल की सिंचाई करते रहें। खासकर पिछैती फसलों में इसका प्रभाव ज्यादा रहेगा। - सुनील कुमार, जिला उद्यान अधिकारी