दिल्ली की जूता फैक्ट्री में आग से पाली के दो युवकों की जलकर मौत
Hardoi News - दिल्ली की एक जूता फैक्ट्री में आग लगने से पाली के दो युवकों अता वारिस और अमीरुद्दीन की जलकर मौत हो गई। दोनों रात को फैक्ट्री के अंदर सोते थे। आग लगने से असमधा के दो युवक भी घायल हुए हैं। परिवार में कोहराम मचा हुआ है।

पाली। दिल्ली की एक जूता फैक्ट्री में आग लगने से चपेट में आकर पाली के दो युवकों की जलकर मौत हो गई। वहीं, पड़ोस के गांव असमधा निवासी दो युवक गंभीर घायल हो गए। सूचना मिलते सभी के परिजनों में कोहराम मच गया। मोहल्ला मलिकाना निवासी 26 वर्षीय अता वारिस अपने 51 वर्षीय चचेरे भाई अमीरुद्दीन के साथ दिल्ली की एक जूता फैक्ट्री में काम करते थे। रात में फैक्ट्री के अंदर ही सोते थे। बुधवार रात में काम खत्म करने के बाद सभी मजदूर सो रहे थे। देर रात अचानक फैक्ट्री में आग लग गई। आग की लपटों के बीच फंसे अता वारिस और अमीरुद्दीन की जलकर मौत हो गई।
फैक्ट्री में आग लगने की घटना की जानकारी गुरुवार सुबह साढ़े सात बजे के आसपास अमीरुद्दीन के बड़े भाई मुन्ना के मोबाइल पर आए फोन से हुई। अता वारिस के पिता बलीउल्ला ने बताया कि अता वारिस एक साल पहले दिल्ली में काम करने गया था। फैक्ट्री में सितंबर 2025 से काम करना शुरू किया था। अता की मौत से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। काम की तलाश में चार दिन पहले गए थे दिल्ली मोहल्ला मलिकाना निवासी अमीरुद्दीन के परिजनों ने बताया कि अमीरुद्दीन शनिवार को दिल्ली गए थे। रविवार से अता वारिस के साथ जूता की फैक्ट्री में काम करना शुरू किया था। बुधवार देर रात फैक्ट्री में लगी आग की चपेट में आकर उनकी मौत हो गई। पत्नी अजरा सहित परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। अमीरुद्दीन की दो बेटियां हैं, जिसमें 12 साल की सादिका और 11 माह की हाफिजा है। असमधा के दो युवक हुए घायल दिल्ली में जूता फैक्ट्री में असमधा गांव के दो युवक जैनुल और आरिफ भी काम करते हैं। जान बचाने के लिए जैनुल फैक्ट्री की छत से नीचे कूद पड़ा, जिससे उसकी दोनों टांगे टूट गईं। गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं, आरिफ ने फैक्ट्री में आग लगने और अपने साथियों को आग की लपटों में जिंदा जलने का पूरा मंजर अपनी आंखों से देखा। सदमा लगने से वह बेहोश हो गया। गिरने से उसके सिर में चोट लग गई। परिजनों के मुताबिक, आरिफ को आईसीयू में भर्ती किया गया है। सोने के बाद लगी आग अता वारिस और अमीरुद्दीन के परिजनों ने बताया कि फैक्ट्री में यह लोग ठेका पर काम कर रहे थे, जिससे रात-दिन काम करते थे। बुधवार रात को खाना खाने के बाद गुरुवार तड़के तीन बजे तक सभी ने काम किया। इसके बाद सभी लोग फैक्ट्री के अंदर ही सो गए। सुबह चार- पांच बजे के आसपास आग लग गई। फैक्ट्री में मौजूद कच्चे माल और कैमिकल ने आग को भयंकर बना दिया। बचने और भागने का प्रयास दोनो ने किया लेकिन उन्हें आग की लपटों ने अपनी चपेट में ले लिया।

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