
विश्व टॉयलेट दिवस: रेवड़ी की तरह बांटे शौचालय, अब पात्रों को भी संकट
Hardoi News - स्वच्छ भारत मिशन फेज वन: 600000 से अधिक शौचालय बनेफेज टू : 1.5 लाख से अधिक व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण हुआ। - 1293 ग्राम पंचायतों में बनाए गए सार्वजनिक शौचालय फोटो 14: स्वच्छ भारत मिशन योजना के...
स्वच्छ भारत मिशन फेज वन: 600000 से अधिक शौचालय बने फेज टू : 1.5 लाख से अधिक व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण हुआ। - 1293 ग्राम पंचायतों में बनाए गए सार्वजनिक शौचालय फोटो 14: स्वच्छ भारत मिशन योजना के अंतर्गत बनाए गए सार्वजनिक शौचालय हरदोई, संवाददाता। स्वच्छ भारत मिशन योजना के अंतर्गत पंचायतों ने मनमानी करते हुए चहेतों को जम कर शौचालय आवंटित कर दिए। विभाग ने दरियादिली कुछ ऐसी दिखाई कि 2011 की जनगणना में दर्ज परिवारों की संख्या से भी अधिक शौचालय बांट दिए गए। अब कुछ ऐसा हाल हो गया है कि जनपद की 1293 ग्राम पंचायतों में से 80 फीसदी पंचायतों का शौचालय आवंटन का कोटा पूरा हो चुका है।
इन ग्राम पंचायतों में शौचालय आवंटन पर रोक लगा दी गई है ऐसे में बहुत से पात्र परिवार खुले में शौच करने को मजबूर हैं। शौचालय निर्माण की धनराशि आवंटन पर रोक लगे होने के कारण अब इन ग्राम पंचायतों में पात्र परिवारों को भी शौचालय नहीं मिल पा रहे हैं। इनसेट 100000 से अधिक निजी शौचालयों को रेट्रो फिटिंग योजना से मरम्मत का इंतजार जनपद में लगभग एक लाख से अधिक शौचालयों को मरम्मत का इंतजार है। ऐसे व्यक्तिगत शौचालय जो मरम्मत के अभाव में क्रियाशील नहीं है, शासन की रेट्रो फिटिंग योजना के अंतर्गत इन शौचालयों को ग्राम निधि से शौचालय लाभार्थियों को पांच हजार रुपये तक की धनराशि देकर उनकी मरम्मत करवाई जा सकती है। इसमें नए दरवाजे व पल्ले लगवाने, सोकपिट बनवाने, शौचालय की दीवार अथवा छत की मरम्मत करवा कर उन्हें क्रियाशील करवाया जाता है। हालांकि ग्राम निधि की धनराशि रेट्रो फिटिंग में देने की बजाय ग्राम प्रधान अन्य विकास कार्यों को करवा रहे हैं। अधिकांश ग्राम पंचायतों ने न तो रेट्रो फिटिंग का सर्वे करवाया है और न ही योजना के अंतर्गत अक्रियाशील शौचालयों की मरम्मत करवा कर उन्हें क्रियाशील किया है। इनसेट अधिकांश सार्वजनिक शौचालय बंद शहरी क्षेत्र के अधिकांश सार्वजनिक शौचालय तो क्रियाशील हैं, पर ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश शौचालय बदइंतजामी अथवा उपयोगिता न होने के चलते ठप पड़े हैं। ग्राम पंचायतों द्वारा सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण के दौरान स्थल चयन करने में की गई मनमानी अब भारी पड़ रही है। ग्राम पंचायतों में बाजार, बस स्टॉप व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर सार्वजनिक शौचालय न बनाए जाने के कारण उनकी उपयोगिता न के बराबर है। ऐसे में अधिकांश शौचालय बंद ही पड़े रहते हैं। वहीं शहर का घंटा घर रोड़ पर बना पिंक शौचालय भी बंद पड़ा है। कोट अभियान चलाकर सार्वजनिक शौचालयों को क्रियाशील किया गया है। रेट्रो फिटिंग के अंतर्गत शौचालयों का सर्वे न करने वाले 24 से अधिक ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन रोका जा चुका है। शतप्रतिशत शौचालयों को क्रियाशील किया जाएगा। हाल ही में शौचालय निर्माण के लिए मिले छह हजार से अधिक आवेदनों की जांच में पात्र पाए गए 3500 लाभार्थियों को शौचालय निर्माण के लिए धनराशि जारी की जा रही है। विनय कुमार सिंह जिला पंचायत राज अधिकारी

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