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22 अक्तूबर, 2020|12:04|IST

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सरकारी अस्पतालों में दवाओं की किल्लत

सरकारी अस्पतालों में दवाओं की किल्लत

1 / 2जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। वहीं अस्पतालों में दवाओं की कमी है। रोज हजारों मरीज परेशान होते हैं पर इस समस्या से जिम्मेदार अंजान हैं। इसका खामियाजा गरीब मरीजों को भुगतना पड़...

सरकारी अस्पतालों में दवाओं की किल्लत

2 / 2जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। वहीं अस्पतालों में दवाओं की कमी है। रोज हजारों मरीज परेशान होते हैं पर इस समस्या से जिम्मेदार अंजान हैं। इसका खामियाजा गरीब मरीजों को भुगतना पड़...

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जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। वहीं अस्पतालों में दवाओं की कमी है। रोज हजारों मरीज परेशान होते हैं पर इस समस्या से जिम्मेदार अंजान हैं। इसका खामियाजा गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। वह महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर हैं।

जिला अस्पताल में कुछ ऐसी महत्वपूर्ण दवाएं हैं, जो काफी दिनों से नहीं है। मरीज उन दवाओं के लिए अपनी जेब खाली करने को मजबूर हैं। यह हाल जिला अस्पताल का ही नहीं, बल्कि जनपद में उन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक में है जो दूरदराज में स्थित हैं। वहां पर भी मरीजों को पूरी दवा नहीं मिल पा रही है। इसके कारण मरीजों को या तो प्राइवेट अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है या फिर वह मेडिकल स्टोर पर महंगी दर पर दवा खरीदने को मजबूर होते हैं।

40 लाख की आबादी वाले इस जनपद में दो जन औषधि केंद्र हैं। इनमें एक जन औषधि केंद्र जिला अस्पताल में है, जहां पर सिर्फ 12 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। शेष अन्य दवाओं का टोटा लगा हुआ है। मरीजों की मानें तो कई बार यह मामला उठा चुके हैं, लेकिन उसके बावजूद भी जिम्मेदार जन औषधि केंद्र पर अभी दवा नहीं उपलब्ध करा पाए हैं। करीब तीन चार महीने से दवाओं का टोटा लगा है। यहां तक काफी दिनों तक जन औषधि केंद्र में ताला भी लटक चुका है, लेकिन उसके बावजूद भी जन औषधि केंद्र की स्थिति सही नहीं हो सकी।

जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके शाक्य का कहना है की जन औषधि केंद्र पर दवाओं की कमी के बारे में उच्च अधिकारियों को सूचना दी जा चुकी है। जिला अस्पताल में अगर कोई भी दवा कम है तो जानकारी नहीं है। किसी ने कोई शिकायत भी नहीं की है। उनके पास डिमांड पत्र नहीं आया है। आने पर उसे तत्काल मंगाया जाएगा। किसी भी मरीज को भटकना नही होगा।

जिला अस्पताल में ओपीडी में दवा लेने आए संजय अवस्थी, सारीपुर से राजेश, दिनेश, राजाराम के मुताबिक ओपीडी में डॉक्टर की ओर से लिखी गई सारी दवा जिला अस्पताल से नहीं मिलती हैं। यदि डॉक्टर चार प्रकार की दवाएं लिखते हैं तो औसतन उनमें दो प्रकार की दवाएं बाहर मेडिकल स्टोर पर खरीदनी पड़ रही हैं।

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  • Web Title:Shortage of medicines in government hospitals