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हरदोई

शिक्षामित्रों में आक्रोश: काम 12 माह, दाम केवल 11 माह का

हिन्दुस्तान टीम,हरदोईPublished By: Newswrap
Thu, 17 Jun 2021 05:50 AM
शिक्षामित्रों में आक्रोश: काम 12 माह, दाम केवल 11 माह का

हरदोई। संवाददाता

बेसिक शिक्षा विभाग शिक्षामित्रों को 11 माह का वेतन देता है। मगर कार्य 12 माह लिया जा रहा है। इसे शिक्षा मित्र भेदभाव मान रहे हैं। शिक्षामित्र संघ व शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों ने 12 माह के मानदेय की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार काम कराए तो बदले में दाम भी दे।

बेसिक शिक्षा विभाग का यह मानना है कि जून में परिषदीय स्कूलों में अवकाश रहता है। इसलिए मानदेय नहीं दिया जाता है। यह सिलसिला 1999 से चला आ रहा है। लेकिन कोविड काल में जून में शिक्षामित्रों से ई-पाठशाला व कोविड में निगरानी समिति में काफी शिक्षामित्रों की ड्यूटी लगाई गई है। लेकिन उसके लिए शासन से मानदेय देने के लिए कोई आदेश नहीं आया है। जनपद में करीब 4500 शिक्षामित्र हैं। पंचायत निर्वाचन में चार शिक्षामित्रों की कोरोना संक्रमण से मृत्यु हो गई थी। लगभग 400 शिक्षामित्र कोरोना संक्रमित हुए थे। इसके बावजूद इन्हें मुआवजा पाने के लिए चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। शिक्षामित्र कहते हैं कि वे काम करने में पीछे नहीं हैं लेकिन सरकार वेतन देने में भेदभाव कर रही है।

शिक्षामित्र संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष अरूण दीक्षित ने बताया कि शिक्षामित्रों को 12 माह का मानदेय मिलना ही चाहिए। इसके लिए मुख्यमंत्री के जन्म दिवस पर जनपद से काफी संख्या में ट्वीट किए गए। उन्होंने कहा कि जो शिक्षामित्र टेट पास हैं उनको परमानेंट किया जाए। सुपर टेट से उन्हें छूट दी जाए। कोरोना काल में जिन शिक्षकों ने पंचायत चुनाव ड्यूटी में जान गंवाई है उन्हें मुआवजा व परिजन को नौकरी मिले। जरूरत पड़ी तो हक पाने के लिए संघर्ष भी किया जाएगा।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष शिवशंकर पांडेय ने कहा कि शिक्षामित्रों को उनका हक दिलाए जाने के लिए प्रयास किया जा रहा है। शासन से 12 माह के मानदेय के लिए शीघ्र वार्ता की जाएगी। पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने वाले जो शिक्षक कोरोना से बीमार पड़े उनको वाजिब मुआवजा सरकार को देना चाहिए। इलाज के नाम पर भी हजारों रुपये खर्च करके शिक्षामित्र आर्थिक बोझ तले दब गए हैं।

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