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25 फरवरी, 2021|11:36|IST

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बैंकों की लापरवाही से मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना पर ग्रहण

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हरदोई। हिन्दुस्तान संवाद

शासन व प्रशासन बेरोजगारों को रोजगारपरक व आत्मनिर्भर बनाने का लाख दावा करें। मगर हकीकत यह है कि रोजगार पाने के लिए लोगों को काफी मुश्किलों से गुजरना पड़ रहा है। बैंकों की निष्क्रियता ने क्षेत्र में मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना पर ग्रहण लगा दिया। इसका लाभ पाने के लिए काफी मुश्किलों से गुजरना पड़ रहा।

ब्लॉक क्षेत्र में वित्तीय वर्ष 2019-20 में योजना के तहत कुल 29 का लक्ष्य निर्धारित है। मगर सात माह बाद लाभार्थियों को चक्कर लगाने पड़े हैं। शासन व प्रशासन का दावा है कि युवाओं को उसका लाभ समय से दिया जा रहा है, मगर यह लाभ सिर्फ कागजों में मिल रहा है। वास्तविक रूप से रोजगार के लिए ऋण का इच्छुक व्यक्ति बैंक के चक्कर काटकर परेशान हो जा रहा है। मगर उसे ऋण नहीं मिल पा रहा।

बैंक की इस कार्यप्रणाली से आवेदक दो-तीन बार प्रयास करके हिम्मत हार जा रहे हैं। दूसरी राह तलाश रहे हैं। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना में कस्बे की कई बैंकों में ग्रामीण सुस्त रफ्तार देखकर इस बात की उम्मीद कम है। अपना लक्ष्य पूरा कर सकेगा।

बैंकों की निष्क्रियता की वजह से जरूरतमंदों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। बैंक कर्मी ध्यान दे दें तो न सिर्फ बेरोजगारों को राहत मिल जाएगी। बल्कि योजना की प्रगति भी सुधर जाएगी। बैंक ऑफ इंडिया की मैनेजर पूजा ने कहा कि बैंककर्मी लक्ष्य को पूरा करने पर बल दें। तकनीकी समस्याओं के चलते कुछ बाधा आ रही है। मगर बैंक कर्मी यह सुनिश्चित करें कि लाभार्थी कहीं से लाभ प्राप्त नहीं कर रहा है। डिफाल्टर नही है।

साण्डी के भाजपा विधायक प्रभाष कुमार ने मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत आवेदकों को ऋण कराने में देरी पर नाराजगी जताई है। उन्होंने जिलाधिकारी समेत उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा है। उन्होंने मांग की है कि बैंकों के स्तर से लंबित पत्रावलियों का निस्तारण कराकर आवदेकों को जल्द से जल्द ऋण मुहैया कराया जाए।

लीडबैंक मैनेजर बीएन शुक्ला का कहना है कि प्रगति की स्थिति ठीक है। लक्ष्य के सापेक्ष प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना में 125 फीसदी व मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में 80 फीसदी प्रगति हो चुकी है। इस बार आवेदन ज्यादा आए हैं। कुछ लोग क्षमता से ज्यादा ऋण लेना चाहते हैं। ऐसे में ऋण की रिकवरी को भी ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाए जाते हैं। एसबीआई के स्तर पर कुछ तकनीकी दिक्कत से फार्म रिजेक्ट हो रहे हैं। इसके समाधान के लिए प्रयास चल रहे हैं। दोनों योजनाओं में कोई भी लापरवाही या देरी नहीं हो रही है।

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  • Web Title:Negligence of banks eclipsed Chief Minister 39 s self-employment scheme