
अवैध बसों–कारों का धंधा चरम पर, प्रशासन उदासीन
Hardoi News - मल्लावां में दिल्ली के लिए चल रही स्लीपर निजी बसों के अवैध संचालन से सरकार को लाखों रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है। यात्री सस्ती कीमतों के कारण निजी बसों और कारों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि प्रशासन इस अव्यवस्था पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है।
मल्लावां। कस्बे से दिल्ली के लिए चल रही स्लीपर निजी बसों पर प्रशासन लगाम लगाने में नाकाम साबित हो रहा है। स्थिति यह है कि अवैध संचालन के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी जानकर भी अनजान बने हुए हैं, जिससे सरकार को हर महीने लाखों रुपये का राजस्व नुकसान उठाना पड़ रहा है। कस्बे और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग दिल्ली सहित अन्य शहरों के लिए यात्रा करते हैं। निजी बसों का किराया रोडवेज से कम होने के कारण यात्री इन्हें ही प्राथमिकता देते हैं। कस्बे से दो बसों का आवागमन रोजाना हो रहा है, जो शाम को चुंगी नंबर दो से दिल्ली के लिए रवाना होती हैं।
इसी प्रकार मल्लावां चौराहे से ईको और लग्जरी कारों द्वारा लखनऊ के लिए खुलेआम सवारी ढोई जा रही है। ये वाहन एक यात्री से 130 रुपये का किराया लेते हैं, जबकि रोडवेज बस का किराया दुबग्गा तक 111 रुपये है। समय बचाने के कारण यात्री कारों में बैठना पसंद करते हैं, जो लगभग एक से सवा घंटे में लखनऊ पहुंचा देती हैं, जबकि रोडवेज बसें दो से सवा दो घंटे लगाती हैं। इन वाहनों के अवैध संचालन से सरकार को हर महीने भारी राजस्व हानि हो रही है। पुलिस भी इस अव्यवस्था से वाकिफ होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई से बचती दिख रही है। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर दी जाती है।

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