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1 अक्तूबर, 2020|11:53|IST

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गांधी जी के आगमन पर जली थी विदेशी कपड़ों की होली

गांधी जी के आगमन पर जली थी विदेशी कपड़ों की होली

1 / 41929 का दौर था, आजादी की लड़ाई महात्मा गांधी के नेतृत्व में लड़ी जा रही थी। गांधी जी जगह जगह जाकर लोगों से स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करने व विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर देश प्रेम की अलख जगा रहे थे। 11...

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2 / 41929 का दौर था, आजादी की लड़ाई महात्मा गांधी के नेतृत्व में लड़ी जा रही थी। गांधी जी जगह जगह जाकर लोगों से स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करने व विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर देश प्रेम की अलख जगा रहे थे। 11...

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3 / 41929 का दौर था, आजादी की लड़ाई महात्मा गांधी के नेतृत्व में लड़ी जा रही थी। गांधी जी जगह जगह जाकर लोगों से स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करने व विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर देश प्रेम की अलख जगा रहे थे। 11...

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4 / 41929 का दौर था, आजादी की लड़ाई महात्मा गांधी के नेतृत्व में लड़ी जा रही थी। गांधी जी जगह जगह जाकर लोगों से स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करने व विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर देश प्रेम की अलख जगा रहे थे। 11...

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1929 का दौर था, आजादी की लड़ाई महात्मा गांधी के नेतृत्व में लड़ी जा रही थी। गांधी जी जगह जगह जाकर लोगों से स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करने व विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर देश प्रेम की अलख जगा रहे थे। 11 अक्टूबर 1929 को हरदोई के विक्टोरिया हॉल के परिसर में उनकी जनसभा का आयोजन किया गया।

पांच हजार से अधिक जनसमूह को बापू के संबोधन ने देशप्रेम की भावना से ओतप्रोत कर दिया। विदेशी के बहिष्कार की अपील का इतना असर पड़ा कि लोगों ने विदेशी कपड़ो की होली जलाई। महिलाओं देश को आजाद करवाने की लड़ाई को धार देने के लिए अपने गहनों को सभा स्थल पर ही दान देना शुरू कर दिया। रजवाड़ो से जुड़ी बेरुआ स्टेट की रानी विद्या देवी, रानी लक्ष्मी देवी, तारा देवी सहित हजारों महिलाओं ने विदेशी वस्त्रों को न पहनने की शपथ लेकर खादी वस्त्र पहनने का संकल्प लिया।

देश की आजादी के बाद इस स्थान पर ही गांधी भवन बनाया गया। आज भी गांधी भवन में प्रतिदिन उनके प्रिय भजन रघुपति राघव राजाराम की रामधुन बजा कर उन्हे श्रद्धांजलि दी जाती है। गांधी भवन में गांधी जी की आदमकद प्रतिमा भी बनाई गई है। गांधी की विचारधारा से प्रेरित गांधीवादी लोग आज भी गांधी भवन में जुटते हैं और उनके संकल्पों को आगे ले जाया जा रहा है।

महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह के दौरान 25 मार्च 1930 को हरपालपुर क्षेत्र के खसौरा गांव में स्वतंत्रता सेनानियों ने निषिद्घ नमक सार्वजनिक रूप से बनाया था। तब अंग्रेजी पुलिस ने स्वतंत्रता सेनानियों पर जमकर अत्याचार कर खसौरा गांव के 16 लोगों को जेल भेज दिया गया था। इनमें नमक आंदोलन का नेतृत्व कर रहे बाबू मोहनलाल वर्मा भी शामिल थे।

गांव के बड़े बुजुर्ग हो जाते हैं कि महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह के दौरान आम जनमानस के अंदर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश फैल गया था। जनपद में प्रशासन भी पूरी तरह से सतर्क था। क्योंकि कटियारी क्षेत्र का इलाका बहुत ही दुर्गम हुआ करता था। कई नदियों होने के कारण प्रशासनिक अधिकारियों का आसानी से पहुंच पाना संभव ना होता था। इसीलिए स्वतंत्रता सेनानियों ने कटियारी क्षेत्र के खसौरा बाजार में सार्वजनिक रूप से नमक बनाने का फैसला किया। सैकड़ों स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एकत्रित थे। सीरा और लोनी जमा की गई थी।

पिहानी कोतवाली के ठीक सामने एक छोटा सा गांधी पार्क सन 1973 में स्वतंत्र दिवस की रजत जयंती पर राष्ट्रपिता की स्मृति में बनवाया गया था। तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष स्वर्गीय प्रकाश चंद बाजपेयी ने यहां पर एक विजय स्तंभ भी बनवाया था। उस समय यहां पर फूलों के खूबसूरत गमले आसपास लगाए गए थे तथा इसकी शोभा देखते ही बनती थी। धीरे-धीरे नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष बदलते रहे और यह गांधी पार्क भी उपेक्षित हो गया।

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  • Web Title:Holi of foreign clothes was burnt on arrival of Gandhi