
तीन वर्ष बीते, नहीं बन सके 191 आंगनबाड़ी केंद्र
Hardoi News - हरदोई में तीन वर्ष पूर्व स्वीकृत आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण धीमी गति से चल रहा है, जिससे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली सरकारी सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं। मुख्य विकास अधिकारी ने निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं, लेकिन अब तक केवल आधे केंद्र ही तैयार हो पाए हैं।
हरदोई। तीन वर्ष पूर्व स्वीकृत हुए आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण अधर में लटका हुआ है। आंगनबाड़ी केंद्रों का यह हाल तब है, जब पंचायत एवं बाल विकास विभाग की ओर से देय बजट दो वर्ष पूर्व ही दिया जा चुका है। जनपद स्तरीय अधिकारियों के निर्देशों के बाद भी कार्यदाई संस्था के रूप में काम कर रही क्षेत्र पंचायतें बेपरवाह होकर अपनी ही रफ्तार में काम कर रही हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार ने बताया वित्तीय वर्ष 2022-23 में जहां 101 आंगनबाड़ी केंद्र बनाए जाने थे। वहीं, वर्ष 2023-24 में अतिरिक्त 90 केंद्रों के निर्माण का लक्ष्य तय था। कुल 191 केंद्रों के निर्माण के लिए प्रति केंद्र 11 लाख 84 हजार रुपये की लागत निर्धारित है।

इनमें से दो लाख पंचायत विभाग और दो लाख बाल विकास विभाग द्वारा जारी किए जा चुके हैं, जबकि शेष धनराशि मनरेगा कनवर्जेंस से लगाई जानी है। जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार अनुसार अब तक लगभग आधे आंगनबाड़ी केंद्र बनकर तैयार हो चुके हैं, जबकि करीब एक तिहाई केंद्र फिनिशिंग लेवल पर पहुंच गए हैं। हालांकि कई केंद्र ऐसे भी हैं जहां निर्माण कार्य सुस्त गति से चल रहा है। कुछ स्थानों पर श्रमिकों की कमी, तो कहीं सामग्री की समय पर उपलब्धता न होने से कार्य प्रभावित बताया जा रहा है। हाल ही में मुख्य विकास अधिकारी सान्या छाबड़ा ने निर्माण कार्यों की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताई। उन्होंने उपायुक्त श्रम एवं रोजगार, सभी खंड विकास अधिकारियों और संबंधित विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सभी केंद्रों का निर्माण समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाए। सीडीओ ने बच्चों और गर्भवती महिलाओं से जुड़ी योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों का समय पर बनाए जाने के लिए चेतावनी भी जारी की है। इसके बाद भी केंद्रों का निर्माण रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया सभी केंद्रों की प्रगति रिपोर्ट प्रतिदिन मॉनिटर की जा रही है और जिन स्थानों पर कार्य रुका है, वहां समन्वय स्थापित कर समस्या का समाधान कराया जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी आंगनबाड़ी केंद्र तैयार हो जाएंगे। समय पर न बन पाने से बच्चों की पोषण योजनाएं प्रभावित आंगनबाड़ी केंद्र समय से तैयार न होने का सीधा असर बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं पर पड़ता है। केंद्र न बन पाने से कई जगह टीकाकरण, स्वास्थ परीक्षण, पूरक पोषण वितरण और प्री-स्कूल शिक्षा की गतिविधियाँ प्रभावित होती हैं। अस्थाई भवनों में संचालित केंद्रों में सुरक्षा, स्वच्छता और स्थान की कमी के कारण लाभार्थियों की संख्या पर भी प्रभाव पड़ता है। निर्माण में देरी से न केवल योजनाओं की गुणवत्ता घटती है, बल्कि पोषण स्तर सुधारने के लक्ष्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

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