
कई दलों की खाक छान चुके हैं वफादारी का दम भरने वाले जनप्रतिनिधि
Hardoi News - भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ने कई विधायकों और मंत्रियों पर लगाए हैं सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलने के आरोपहरदोई, संवाददाता। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व जिलाध्यक्ष सौरभ मिश्र नीरज ने जनपद के कई विधायक...
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ने कई विधायकों और मंत्रियों पर लगाए हैं सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलने के आरोप हरदोई, संवाददाता। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व जिलाध्यक्ष सौरभ मिश्र नीरज ने जनपद के कई विधायक और मंत्री पर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिलने व भाजपा से चीटिंग करने का आरोप लगाया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनकी टिप्पणी ने जनपद की राजनीति में भूचाल ला दिया है। बिहार चुनाव में भाजपा की आशातीत सफलता के बाद भाजपा पर हमलावर होते अए व अन्य दलों से गलबहियां करने वाले जनप्रतिनिधि भी बचाव की मुद्रा में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष के बयानों को हल्के में नहीं लिया जा सकता है।
टिकट कटने की आशंका के चलते कई जनप्रतिनिधि अन्य दलों में अपनी संभावनाएं तलाश रहे हैं। वर्तमान विधायकों और मंत्रियों में पहली बार संडीला से विधायक बनीं अलका अर्कवंशी के साथ दो बार सवायजपुर से विधायक रहे माधवेंद्र प्रताप सिंह रानू व बिलग्राम-मल्लावां से विधायक रहे आशीष सिंह आशू पर दलबदल का कोई आरोप नहीं है। इसके अलावा अन्य विधायक कई दलों की खाक छान चुके हैं। 1- रामपाल वर्मा पूर्व में बेनीगंज व वर्तमान में बालामऊ विधानसभा से लगातार कई बार चुनाव जीत चुके विधायक रामपाल वर्मा जमीनी नेता हैं। 1985 में उन्होंने निर्दलीय ही चुनाव जीत कर अपने राजनीतिक वर्चस्व का परिचय दिया था। 1989 व 1991 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर, 1996 में सपा से, 2002 व 2007 में बसपा से, 2017 व 2022 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते हैं। कई राजनीतिक दलों से चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंच चुके रामपाल वर्मा की क्षेत्र में पकड़ देखते हुए आज भी उनपर कोई भी दल दांव लगा सकता है। 2- श्याम प्रकाश 1996 में बसपा के टिकट पर पहली बार विधानसभा पहुंचे श्याम प्रकाश बेबाक टिप्पणियों और विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं। 2002 के चुनाव में उन्होंने पार्टी बदल कर सपा से चुनाव लड़ा और दोबारा विधायक चुन लिए गए। 2007 का चुनाव भी वो सपा के टिकट पर लड़े पर चुनाव जीत न सके। 2012 के चुनाव में एक बार फिर से वो सपा के सिंबल पर चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे। 2017 और 2022 में वो भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए। हालांकि उनके अब तक के भाजपा के साथ किए सफर से कही अधिक समय तक सपा के साथ उनका सफर रहा है। 3- रजनी तिवारी बसपा के पूर्व विधायक उपेंद्र तिवारी की राजनीतिक विरासत संभाल रहीं रजनी तिवारी भाजपा की प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री पद संभाल रही हैं। हालांकि उनकर राजनीतक सफर भी बसपा के साथ ही शुरू हुआ था। 2007 में उनके पति बसपा से विधायक चुने गए, उनके देहांत के पश्चात बिलग्राम विधानसभा में हुए उपचुनाव में वो विधायक चुनी गईं। 2012 में वो सवायजपुर विधानसभा क्षेत्र से बसपा के सिंबल पर दोबारा चुनाव जीतीं। 2017 में उन्होंने शाहाबाद विधानसभा का रुख किया और भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता। 2022 के चुनाव में दोबारा चुनाव जीत कर विधायक के साथ ही मंत्री भी बन गईं। 4- नितिन अग्रवाल कांग्रेस, लोकतांत्रिक कांग्रेस, सपा, बसपा का सफर तय कर भाजपा में आए वरिष्ठ नेता व पूर्व सांसद नरेश अग्रवाल की राजनीतिक विरासत संभाल रहे नितिन अग्रवाल का राजनीतिक सफर भी उपचुनाव से शुरू हुआ। 2007 में सपा से चुने गए नरेश अग्रवाल के विधायक पद छोड़ने के बाद 2008 में हुए उपचुनाव में नितिन अग्रवाल ने बसपा के सिंबल पर चुनाव जीता। हालांकि 2012 चुनाव आते आते उनकी निष्ठा बदल गई और वो सपा के टिकट पर चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे। 2017 का चुनाव भी उन्होंने सपा के टिकट पर जीता पर विधायक बनने के बाद भी वो भाजपा के साथ रहे। 2022 का चुनाव उन्होंने भाजपा के टिकट पर लड़ा और राज्यमंत्री बनाए गए। 5- प्रभाष कुमार 2002 के चुनाव में प्रभाष कुमार ने बसपा के टिकट पर अहिरोरी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा पर उन्हें जीत नहीं मिली। 2007 के चुनाव में उन्होंने पार्टी बदल कर किस्मत आजमाई पर फिर से चुनाव हार गए। भाजपा के टिकट पर उन्होंने तीसरा चुनाव लड़ा और सांडी विधानसभा क्षेत्र से विधायक बन गए। 2022 में लगातार दूसरी बार वो भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए।

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