DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   उत्तर प्रदेश  ›  हरदोई  ›  80 प्रतिशत अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन नहीं, आंकड़ों में सब ठीक
हरदोई

80 प्रतिशत अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन नहीं, आंकड़ों में सब ठीक

हिन्दुस्तान टीम,हरदोईPublished By: Newswrap
Thu, 17 Jun 2021 05:50 AM
80 प्रतिशत अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन नहीं, आंकड़ों में सब ठीक

हरदोई। संवाददाता

कोरोना काल में काफी दिन से स्कूल बंद चल रहे हैं। अब शिक्षा विभाग के जिम्मेदार कोरोना से निपटने के लिए ऑनलाइन क्लासेज को बेहत्तर विकल्प मानकर चल रहे हैं। इसीलिए सरकार ने ई-पाठशाला शुरू भी की है। मगर संसाधनों के अभाव में बेहतर ढंग से ई-पाठशाला चलाने में तमाम तरह की दिक्कतें आएंगी।

पहली जुलाई से स्कूल तो खुल रहे हैं, लेकिन शिक्षक-शिक्षिकांए ही विद्यालय परिसर में उपस्थित रहकर विभागीय कार्यों को ही करेंगें। वे ऑनलाइन ई-पाठशाला से बच्चों को पढ़ाते रहेंगे। विभागीय जानकारों के अनुसार लगभग 80 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र के अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन नहीं हैं। केवल 20 प्रतिशत ही अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन हैं। कई अभिभावक ऐसे हैं जिनके पास बच्चों की संख्या दो से तीन है पर फोन केवल एक है। कोरोना के संक्रमण के चलते अभिभावकों में से बहुतों की नौकरी चली गई। जो व्यवसाय करते थे उनके व्यवसाय भी लड़खडा गया है।

इससे वे ई-पाठशाला के लिए पर्याप्त संसाधनों को नहीं जुटा पा रहे हैं। बच्चों की ई-पाठशाला को लेकर अभिभावक चिंतित हैं। लेकिन सरकारी आंकडे दुरूस्त हैं। उनके अनुसार अधिकतर अभिभावकों के पास संसाधन हैं। विभाग ने सभी स्कलों में प्रेरणा मित्रों को चयनित किया गया है। संसाधन न होने पर ये घर-घर जाकर बच्चों को भेजी गई सामग्री उपलब्ध कराएंगे। ई-पाठशाला में शिक्षक यूटयूब के लिंक शेयर करेंगे। दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम के समय के बारे में जानकारी देंगे। कुछ अध्यापक अपने अपने विषय के पाठयोजना के अनुसार कुछ मैटर को शेयर करते हैं।

एक जुलाई से शिक्षको को यह कार्य करने होंगे

शत प्रतिशत बच्चों को नामांकन करना होगा। मध्यान्ह भोजन की परिवर्तन लागत को अभिभावकों को उनके खातो में स्थान्तरित कराना होगा। निशुल्क पाठय पुस्तकों का वितरण करना होगा। मिशन प्रेरणा को सफल संचालन करना होगा। कुछ अध्यापकों की डयूटी कोविड में भी लगाई गई है। माध्यमिक विद्यालयों के लिए की कक्षा 9 से 12 तक की कक्षाओं का ऑनलाइन शिक्षण कार्य किया जा रहा है। कान्वेट स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाओं 24 मई से ही संचालित हो रही हैं। वहां भी अभी बच्चों को स्कूल नहीं बुलाया जा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में धड़ाम ऑनलाइन पढ़ाई

पिहानी। ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन पढ़ाई बच्चों के लिए कोई खास लाभकारी नहीं रही। बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाये जाने की योजना ग्रामीण क्षेत्रों में काफी हद तक असफल रही है। हालांकि शिक्षकों ने व्हाट्सएप ग्रुप व जूम एप के माध्यम से बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने की कोशिश भी की। लेकिन उसका कोई विशेष नतीजा नहीं निकल सका।

अभिभावक विवेक कुमार निवासी अंदा इब्राहिमपुर का कहना है कि सिग्नल ठीक से न मिलने के कारण मोबाइल से अक्सर बात तक नहीं हो पाती है। ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई कैसे संभव हो सकती है।

रामाकांत आदर्श जूनियर हाई स्कूल के प्रधानाचार्य मानवेन्द्र मिश्रा ने कहा कि जिनके पिता जागरूक व बच्चे लगनशील हैं, उन्हें ऑनलाइन पढ़ाई का लाभ मिल रहा है। विकल्प के तौर पर ई-पाठशाला जरूरी है।

सर्वेश जनसेवा इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य सर्वेश का कहना है कि क्लास में सभी बच्चों पर नजर रखी जाती है जबकि एक मोबाइल पर सिर्फ एक ही बच्चा पढ़ाई कर पाता है। ई-पाठशाला कामचलाऊ व्यवस्था रहेगी।

छात्र शिवा यज्ञसैनी का कहना है कि मोबाइल पर पढ़ाई करने में कई समस्याओं से जूझना पड़ता है। नेटवर्क डाउन रहता है। एक लिमिटेड समय के बाद भी हम अपना प्रश्न नहीं पूछ पाते हैं। ऑनलाइन शिक्षा ठीक नहीं है।

डाटा की भी समस्या होती है

मल्लावां। गंगा कटरी इलाके में मुश्किल से 10 प्रतिशत बच्चों के अभिभावकों के पास ही स्मार्ट फोन हैं। उसमें भी डाटा के लिए रूपये नहीं होते हैं। अभिभावक प्रमोद, राजकुमार, कुलदीप, अजय कुमार का कहना है कि जो भी थोड़ा बहुत बच्चों को आता था, वह भी सब भूल गए हैं। घर पर रहते रहते बच्चे ऊब गए हैं। रोस्टर के अनुसार बच्चों को स्कूल में बुलाकर पढ़ाना चाहिए। क्लासरूम जैसी पढ़ाई की गुणवत्ता छोटे बच्चों के लिए मोबाइल पर हो पाना मुश्किल है।

बीएसए हेमंतराव ने कहा कि ई-पाठशाला के लिए शिक्षकों को निर्देश दिए जा चुके हैं। ई-पाठशाला को सफल बनाने के लिए स्कूल खुलते ही निरीक्षण भी कराया जाएगा। बच्चों को ई-पाठशाला का अधिक लाभ के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। शिक्षकों और प्रेरणा मित्रों के मदद से अधिक से अधिक लाभ दिए जाने का प्रयास किया जा रहा है।

घर से ही पढ़ाने को कहा जाए

बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों का कहना है कि जब स्कूल में बच्चों को नहीं आना है तो अध्यापक को बुलाना उचित नहीं है। ई-पाठशाला का संचालन सहायक अध्यापक घर पर से कर सकते हैं। जरूरी हो तो केवल हेडटीचर को विभागीय कार्यों के संचालन के लिए स्कूल में बुलाया जाए।

संबंधित खबरें