11 जिलों के 140 बच्चों को श्रम मुक्त कर बदली तकदीर
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस::140 बच्चों को ब्रजघाट तीर्थ नगरी में दी जा रही है शिक्षा -केवल झुग्गी-झोपड़ी में कूड़ा बीन कर अपने परिवार के लिए काम करने व

हापुड़। हर वर्ष 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बाल श्रम के खिलाफ वैश्विक आंदोलन को बढ़ावा देना और दुनिया भर में बाल श्रम को जड़ से खत्म करने के लिए जागरूकता और आवश्यक कदम उठाना है। जिसके लिए सरकार ने हर जिले में श्रम विभाग को जिम्मा दे रखा है और सुनवाई के लिए बाल कल्याण विभाग भी है। परंतु इन सब से अलग कोई संस्था भी है जिसने एक नहीं बल्कि पश्चिमी यूपी के 10 महानगरों में सिसकते बचपन को नई रोशनी औप नया भविष्य देने का प्रण ले रखा है। परिवार की जिम्मेदारी के बोझ तले जिस बपचन को खेल खिलौने के बीच रखा जाता है वे बच्चे चाय, नाश्ते की दुकान, होटल, गैराज, ढाबा आदि स्थानों पर काम करने को विवश होते हैं। इसके अलावा हर शहर और महानगर में अलग कोने में पड़ी झुग्गी झोपड़ी में पैदा होने वाले बच्चे किताबों को हाथ में लेने के स्थान पर कूड़ा बीनने तथा भीख मांगने का काम करने लगते हैं। परंतु एनसीआर की तीर्थनगरी ब्रजघाट में एक दंपति ने कूड़े बीनने वाले बचपन को शिक्षा-सेवा के लिए अपने पास रख लिया है। जिन्होंने आज उनका भविष्य ही बदल दिया है।
11 महानगरों के 140 बच्चों की बदली तकदीर--
नेह नीड़ में 10 महानगरों की 72 बस्तियों से 140 बालक हो गये हैं।
इसके अतिरिक्त हमने इस वर्ष से नेह नीड़ परिसर में ही आस पास के पांच गांव से भी अभावग्रस्त परिवारों के 30 बालकों का चयन दैनिक विद्यार्थी के रूप में किया है। यह बालक छात्रावास में नहीं रहेंगे परंतु उनकी संपूर्ण शिक्षा का दायित्व स्कूल ड्रेस तथा पुस्तकों आदि सहित नेह नीड ने लिया है। तो एक दंपति कन्हैया लाल जी और उनकी पत्नी रिया वर्मा ने लिया। जो एनसीआर में ब्रजघाट तीर्थनगरी में करोड़ों की जमीन में करोड़ों की इमारत बनाकर कूड़े बनने वाली बस्तियों से लिए बचपन को देश का भविष्य बनाने में जुटे हुए हैं।
गोद लेने वाले परिवार भी आए सामने--
नेह नीड बस अब दंपति की नही बल्कि एक बड़ी संस्था के रुप में उभर कर आई है। जिसमें दिल्ली-नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ और हापुड़ के कई धनाढ्य परिवार भी जुड़ गए हैं। दिल्ली-नोएडा के कई परिवार ऐसे है जिन्होंने 20 से अधिक बच्चों को गोद ले रखा है। यानि की उनकी पढाई, लिखाई, पहनना, खाना सब उनका जिम्मा है। इसके अलावा हापुड़ के विपिन गुप्ता आदि ने भी ऐसे कई बच्चों के पालन पोषण का जिम्मा संभाल रखा है।
25 साल के जिले को बाल सुधारगृह की दरकरार
हापुड़, वरिष्ठ संवाददाता
बच्चे बाल श्रम करते मिले---
बाल कल्याण समिति अध्यक्ष अभिषेक त्यागी ने बताया कि अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक पुलिस के साथ मिलकर जिले में 41 बच्चे बाल श्रम मुक्त कराए गए हैं। जबकि 2025 से 26 तक भी इतने बच्चे मुक्त कराए। त्यागी ने बताया कि जो बच्चों से जानकारी की गई और उनके परिजनों को सौंपा गया तो पता चला है कि छोटे बच्चों को उनके मां-बाप ही घर के काम चलाने के लिए जबरन मजदूरी के लिए भेज रहे हैं।
11 बच्चे मांग रहे थे भीख--
इस वर्ष में बाल कल्याण समिति ने ब्रजघाट और रेलवे रोड से 11 बच्चे ऐसे पकड़े जो भीख मांग रहे थे। बच्चों से जानकारी की गई तो कुछ बच्चे पिता के नशे के शोक को पूरा करने के लिए भीख मांग रहे थे। जबकि कुछ बच्चों को नशे की तरफ धकेला है।
आज तक नहीं है बालगृह
बाल सुधार गृह न होने के कारण बच्चों को रोकना मुश्किल हो रहा है। 2011 में जिला बनने के बाद से आज तक बालगृह नहीं मिल पाया है। बच्चों को अपराध में लिप्त होने पर नोएडा, रामपुर तथा मेरठ के बालगृह में भेजा जाता है।
सामान्य प्रश्न
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


