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बैंक के कर्मचारी बनकर ठगी करने वाले गिरोह के दो आरोपी गिरफ्तार

लोगों को ईनाम का लालच देकर हासिल करते थे क्रेडिट कार्ड की जानकारी कार्ड की जानकारी गिरफ्तार ठगों में एक महिला को भी साइबर सेल ने गिरफ्तार किया फोटो...

बैंक के कर्मचारी बनकर ठगी करने वाले गिरोह के दो आरोपी गिरफ्तार
हिन्दुस्तान टीम,हापुड़Fri, 23 Feb 2024 11:15 PM
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थाना साइबर काइम व पिलखुवा पुलिस ने बैंक के अधिकारी/कर्मचारी बनकर कांल करके भोले-भाले लोगों को लालच देकर ठगने वाले अन्तर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एक युवती सहित दो ठगों को गिरफ्तार किया है। ठग लोगों को गिफ्ट वाउचर / बोनस देने के नाम पर अपनी बातों में फंसाकर क्रेडिट कार्ड की गोपनीय जानकारी हासिल कर ठगी करते थे। आरोपियों के पास से 18 हजार रुपये, एक आईफोन सहित 5 मोबाइल, एक लैपटॉप, रसीदें एवं रजिस्टर बरामद किया गया है।

पुलिस क्षेत्राधिकारी पिलखुवा जितेंद्र शर्मा ने बताया कि ये आरोपी बैंक के अधिकारी / कर्मचारी बनकर कॉल करके भोले-भाले लोगों को गिफ्ट वाउचर/बोनस देने के नाम पर अपनी बातों में फंसा लेते थे। थाना पिलखुवा में दर्ज आईटीएक्ट से सम्बन्धित मुकदमे में एक युवती सहित दो साइबर ठग दिल्ली निवासी साकिब खान व मेघालय की शिलांग निवासी वनीशा आर मरक को गिरफ्तार किया गया है। उनके कब्जे से 18 हजार रुपये की नकदी, एक आईफोन सहित 5 मोबाइल, लैपटॉप, रसीदें एवं रजिस्टर बरामद की गई हैं।

सीओ जितेन्द्र शर्मा ने बताया कि अभियुक्त शातिर किस्म के साइबर अपराधी हैं अभियुक्तगण के खातों में विगत 6 माह में करीब 30 लाख रूपये की धनराशि की ट्रांजेक्शन होना पाया गया है । जिनके द्वारा देश के विभिन्न राज्यों में सैकड़ों लोगों के साथ ऐसी घटनाएं कर लाखों रूपये का आर्थिक लाभ कमाया जा चुका है।

अपराध करने का तरीका-

गिरफ्तार आरोपियों द्वारा पूछताछ करने पर बताया गया कि उन दोनों ने मिलकर दो बेवसाइट बनवा रखी है। दोनों लोगों के क्रेडिट कार्ड नम्बर व मोबाइल नम्बर का डाटा प्राप्त कर एक बैंक के कर्मचारी बनकर लोगों को सीपीपी प्लान एक्टीवेट या डिएक्टीवेट कराने व ईनाम के प्वांइट के लिये अपनी बातों में फंसा लेते थे। उनसे वे अपनी बेवसाइट पर उनके केडिट कार्ड, जन्मतिथि व ओटीपी की जानकारी ले लेते हैं तथा उक्त बेवसाइट पर प्राप्त की गई जानकारी को लेकर वे अलग-अलग खातों में क्रेडिट कार्ड से धनराशि को फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर कर निकाल लेते हैं। धोखाधडी से निकाली गयी धनराशि आरोपी आपस में बांट लेते हैं।

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