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Hindi News उत्तर प्रदेश हापुड़बोला गांव, ब्लैक स्पॉट चिंहित कर सिस्टम ने कर लिया अपना काम, रोज होते हैं हादसें

बोला गांव, ब्लैक स्पॉट चिंहित कर सिस्टम ने कर लिया अपना काम, रोज होते हैं हादसें

अंडर पास अथवा ओवरब्रिज न बन पाने से गांव में रहने वाली हजारों की आबादी को जान हथेली पर रखकर अति व्यस्तम दिल्ली लखनऊ नेशनल हाईवे को पार करना मजबूरी...

बोला गांव, ब्लैक स्पॉट चिंहित कर सिस्टम ने कर लिया अपना काम, रोज होते हैं हादसें
हिन्दुस्तान टीम,हापुड़Wed, 15 May 2024 12:00 AM
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अंडर पास अथवा ओवरब्रिज न बन पाने से गांव में रहने वाली हजारों की आबादी को जान हथेली पर रखकर अति व्यस्तम दिल्ली लखनऊ नेशनल हाईवे को पार करना मजबूरी बनी हुई है। इसी के चलते अनियंत्रित हुई कार की ट्रक में भिड़ंत होने से सोमवार की रात में लोनी के छह युवकों की मौत होने के साथ ही एक साल के भीतर एक दर्जन से भी अधिक की जान जा चुकी है। जिससे गांव में हर तरफ गम और गुस्सा का माहौल व्याप्त होने के साथ ही ग्रामीणों ने भविष्य में दुर्घटना होने पर एनएचएआई अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की हुंकार भरी है।

गढ़ क्षेत्र में मिश्रित आबादी वाले गांव अल्लाबख्शपुर की आबादी वर्तमान में बीस हजार से भी अधिक है। यह गांव देश से प्रदेश की राजधानी को जाने वाले अति व्यस्तम दिल्ली लखनऊ नेशनल हाईवे के किनारे स्थित है, परंतु इसके बाद भी यहां अंडरपास अथवा ओवरब्रिज नहीं दिया गया है। जिसके कारण सैकड़ों बच्चों को जान हथेली पर रखते हुए हाईवे को पार कर स्कूल कॉलेज आना जाना मजबूरी बनी हुई है। गांव में रहने वाले अधिकांश ग्रामीण खेतीबाड़ी समेत मेहनत मजदूरी से अपनी गुजर बसर करते हैं, जिन्हें खेतों पर आने जाने के साथ मेहनत मजदूरी के लिए हाईवे को पार करना पड़ता है। अंडरपास अथवा ओवरब्रिज न बन पाने से ग्रामीण जिस अवैध कट से होकर आवागमन करते हैं, वह डैथ प्वाइंट साबित होता आ रहा है। ग्रामीणों के कट से होकर निकलने के दौरान हाईवे की दोनों साइडों से आने जाने वाले वाहन तेज रफ्तार में होने के कारण संतुलन बिगडऩे से अनियंत्रित हो जाते हैं, जो दुर्घटना की बड़ी वनजह साबित हो रही है। सोमवार की देर रात में इसी कट से अचानक बाइक निकलने पर तेज रफ्तार में फर्राटा भरते हुए मुरादाबाद की तरफ जा रही कार बुरी तरह अनियंत्रित हो गई थी। जो करीब पंद्रह फिट चौड़े डिवाइडर को लांघते हुए विपरीत दिशा में जा रहे ट्रक से भिडक़र बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में लोनी कस्बे में रहने वाले छह युवकों की कार के अंदर ही दर्दनाक ढंग में मौत और उनका सातवां साथी बुरी तरह घायल होकर अब मेरठ के अस्पताल में मौत और जिंदगी के बीच जूझ रहा है। इस घटना से गांव में हर तरफ गम और गुस्से का माहौल बना हुआ है, क्योंकि इससे पहले भी एक साल के भीतर इसी कट के आसपास कई दुर्घटना हो चुकी हैं। जिनमें गांव के दूध कारोबारी देवेंद्र प्रजापति की मां पुष्पा और बेटी मंजू समेत एक दर्जन से भी अधिक की मौत हो चुकी है। दुर्घटना का शिकार होने वालों में अधिकांश तादाद उनकी है, जो बाहरी राज्यों गंगा स्नान समेत धार्मिक अनुष्ठान करने आते हैं। लोनी के छह युवकों की सडक़ दुर्घटना में मौत होने की घटना गांव में मुख्य चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसको लेकर जगह जगह बैठे ग्रामीण आपस में चर्चा करते हुए एनएचएआई को जमकर कोस रहे हैं। जगपाल सिंह, इसहाक खां, नासिर अली, जयवीर सिंह, नदीम, कपिल कुमार का कहना है कि अगर अंडरपास अथवा ओवरब्रिज की मांग पूरी हो जाती तो लोनी के छह युवकों समेत एक साल में मरने वाले एक दर्जन से भी अधिक राहगीरों की जान बच सकती थी। ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में डीएम को मांग पत्र देने के साथ ही नई सरकार का गठन होने के बाद लखनऊ जाकर सीएम से भी भेंट करेंगे।

--जनहित की अनदेखी के विरोध में प्रदर्शन कर एनएचएआई पर मुकदमा दर्ज कराने की चेतावनी दी

छोटे सिंह, पुष्पेंद्र, शकील, गुड्डू, जाकिर अली, जगपाल, ईश्वर सिंह, कमल कुमार ने जनहित की अनदेखी होने के विरोध में प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि एनएचएआई अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ती आ रही है और जन प्रतिनिधि भी चुनाव के दौरान हर बार खोखले दावे और वादे कर जाते हैं। अगर गांव के सामने अंडर पास अथवा ओवरब्रिज बन जाता तो लोनी के छह युवकों की जान भी न जा पाती। ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना है कि अगर भविष्य में सडक़ दुर्घटना होने पर किसी की जान जाती है तो इस बार एनएचएआई अफसरों को ही नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। क्योंकि गांव में रहने वालों का अधिकार है कि उन्हें सुरक्षित ढंग में आवागमन करने की सुविधा प्रदान कराई जाए, परंतु एक साल में महिला बच्चों समेत कई मौत होने के बाद भी एनएचएआई अपना दायित्व निभाने को तैयार नहीं है।

--क्या कहते हैं ग्रामीण

ग्राम प्रधान नौरतन प्रजापति का कहना है कि हरिद्वार के उत्तराखंड में जाने के बाद ब्रजघाट तीर्थनगरी में आने वाले श्रद्धालुओं की तादाद में बड़े स्तर पर बढ़ोतरी हुई है, जिन्हें गांव के सामने से होकर ही आवागमन करना पड़ता है। इस दौरान कट के आसपास अक्सर दुर्घटना होती रहती हैं।

पूर्व प्रधान फारूक खां कहते हैं कि गांव के सामने अंडरपास अथवा ओवरब्रिज बनाया जाना बेहद जरूरी है, क्योंकि अति व्यस्तम दिल्ली लखनऊ नेशनल हाईवे पर चौबीस घंटों के भीतर छोटे बड़े पचास हजार से भी अधिक वाहनों का आवागमन होता है। जिसके कारण गांव के सामने वाले कट से होकर आने जाने के दौरान दुर्घटना होने से अक्सर मौत होती रहती हैं।

दूध कारोबारी देवेंद्र प्रजापति का कहना है कि कुछ माह के भीतर ही उसकी मां पुष्पा और बेटी मंजू समेत एक दर्जन से भी अधिक राहगीरों की गांव के सामने बने कट को पार करते समय तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आने से मौत हो चुकी है।

चौधरी यामीन का कहना है कि गांव के सामने वाले कट पर अंडरपास अथवा ओवरब्रिज न बनाया जाना बेहद दुर्भाग्य का विषय है, क्योंकि नेशनल हाईवे को पार करने के दौरान जान हथेली पर रखते हुए सडक़ पार करना मजबूरी बनी हुई है।

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