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आसमान की आग ने धरती को तपाया और गंगा के जल को भी किया कम, मानव मित्र पर खतरा

आसमान की आग ने धरती को तपाया और गंगा के जल को भी किया कम, मानव मित्र पर खतरा

कई साल बाद मई तप रही है जिसमें पारा 45 डिग्री तक पहुंच गया जबकि जून के पहले सप्ताह में पारा 48 डिग्री तक पहुंचने का वैज्ञानिक अनुमान लगा रहे हैं। आसमान से आग बरस रही है जिसके चलते धरती की कोख पर भी असर पड़ना शुरू हो गया है। एक तरफ चार साल बाद गंगा का जल स्तर सबसे कम हो गया है जिसमें ब्रजघाट गंगा पुल के कई पिलर के नीचे पानी सूख चुका है जबकि कई स्थानों पर टापू छोड़ दिए है। वहीं भूगर्र्भीय जल स्तर नीचे जाने से किसानों के टयूबवैलों ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया है।ग्लोबल वार्मिंग के चलते मौसम ने रंग दिखाना शुरू कर दिया है जिसके चलते इस वर्ष मई माह में केवल दो बार हल्की बारिश से किसानों की फसल को पानी मिल पाया है जबकि दो बार आंधी तूफान ने तबाही जरुर मचाई है। मई माह में पारा 45 डिग्री तक जा पहुंचा है जबकि पश्चिमी दिशा से चल रही लू के झोंकों ने धरती को तपाना शुरू कर दिया है। जहां मई के अंत में पारा 44 पर पहुंचेगा वहीं जून के पहले सप्ताह में मौसम वैज्ञानिक पारा 48 डिग्री तक पहुंचने का दावा कर रहे हैं। बताया गया है कि रविवार को पारा 48 डिग्री पर पहुंच जाएगा। जिसके चलते भूगर्भीय जलस्तर पर प्रभाव पड़ने लगा है। किसानों के टयूूबवैलों ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया है। जून में बारिश ज्यादा होने के कारण गंगा के जल स्तर में बढ़ोतरी होने लगती है जिसके चलते 20 जून से मध्य गंग नहर में पानी छोड़ दिया जाता है। लेकिन इस बार मई के अंतिम सप्ताह तक गंगा का जल स्तर पहाड़ी तथा मैदानी क्षेत्र में बारिश न होने के कारण बढ़ नहीं पाया है। जिस कारण मई के अंतिम सप्ताह में गंगा का जल स्तर काफी कम हो गया है। बाढ आयोग के सूत्रों के मुताबिक चार साल में गंगा का जल स्तर सबसे कम है। जिसमें इस बार गंगा कई स्थानों पर टापू छोेड़ चुकी है जबकि ब्रजघाट तीर्थनगरी में एक दो स्थानों पर गंगा ने नाले का रुप से धारण कर लिया है। हालांकि स्नानघाट की तरफ काफी जल आने के कारण कोई दिक्कत नहीं हो रही है। बताया गया है कि गंगा का जल स्तर 2017 में 15 मई तक समुन्द्र तल से 196. 100 मीटर था जबकि 15 मई के बाद अंतिम सप्ताह में 196.700 मीटर तक पहुंच गया था। लेकिन इस बार वर्तमान में गंगा का जल स्तर समुन्द्र तल से 196.080 मीटर पर चल रहा है। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि करीब .620 सेमी गंगा का जल स्तर कम चल रहा है जिसके चलते गंगा टापू छोड़ रही है।कम जल स्तर से डॉल्फिन को खतरा--मानव मित्र कहलाए जाने वाली डॉल्फिन का जीवन सुरक्षित रखने के लिए विश्व स्तर पर कार्य चल रहा है। जिसमें बिजनौर से नरौरा तक गंगा में 54 से अधिक डॉल्फिा है। परंतु आसमान से बरस रही आग और गंगा का जल स्तर कम होना खतरनाक साबित हो सकता है। संस्था से जुड़ी स्वेता सिंह का कहना है कि कम जल स्तर होने से जहां पर मोटर वोट चल रही है वहां पर डॉल्फिन को खतरा हो सकता है। हालांकि एनजीटी ने मोटर वोट पर प्रतिबंध लगा रखा है।लगातार घट रहा है धरती का पानी---1998 में जल स्तर करीब 25 फुट नीचे पहुंच गया था लेकिन उसके बाद से किये जा रहे भूजल दोहन के चलते हापुड़ में जल स्तक 125 फुट नीचे पहुंच गया हैं। भले ही केंद्रीय सरकार भू जल आकलन समिति की रिपोर्ट पर हापुड़ के ब्लाकों को डार्क जोन में घोषित कर दिया गया। गर्मी के साथ नीचे जा रहा है पानी---भूजल अतिदोहन के चलते धरती में पानी धीरे धीरे कम होता जा रहा हैं। इसका खुलासा भारत सरकार की भूजल आकलन समिति के सर्वे में किया गया है। दो साल पहले भारत सरकार की भूजल आकलन समिति ने एनसीआर के जनपदों समेत यूपी के जनपदों में यह रिपोर्ट तैयार करके यूपी सरकार को भेजी थी। बता दें कि लगातार भूजल अति दोहन से यूपी के 820 ब्लाकों में से 111 ब्लाकों में अतिदोहन की रिपोर्ट सामने आई है जबकि 68 ब्लाक क्रिटिकल श्रेणी में आ गए हैं। भरात सरकार की भूजल आकलन समिति की रिपोर्ट में हापुड़ के चार ब्लाक आ गए हैं। जिसके चलते प्रदेश सरकार की भूजल संसाधनों को आकलन किया गया हैं। सूख गई बूढी गंगा और प्राकृतिक झील--जनपद की गढ़ तहसील में जहां झील में पानी हुआ करता था तथा गांवों के तालाब पानी से लबालब रहते थे। इसके अलावा बूढी गंगा में पानी बहता था। परंतु आज न झील में पानी रहा है और बूढी गंगा सूख गई हैं।

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  • Web Title: The fire of the sky turned the earth and made the Ganges water even less, threat to human friend