Hapur News: मेरठ की घटना को लेकर अधिवक्ता नाराज
Hapur News: मेरठ में गढ़ बार एसोसिएशन और आर्थिक शैक्षिक समानता अभियान के पदाधिकारियों ने लाठीचार्ज के विरोध में एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि पुलिस ने निहत्थे नागरिकों, खासकर महिलाओं और बच्चों पर अत्याचार किया। एसएसपी अविनाश पांडे की जातिवादी मानसिकता की आलोचना की गई और मामले की सीबीआई से जांच की मांग की गई।

Hapur News: मेरठ में लाठीचार्ज के विरोध में शुक्रवार को गढ़ बार एसोसिएशन और आर्थिक शैक्षिक समानता अभियान के पदाधिकारियों ने एसडीएम को ज्ञापन देकर मामले की गहनता से जांच करते हुए उचित कार्रवाई करने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। गढ़ बार एसोसिएशन और आर्थिक शैक्षिक समानता अभियान के पदाधिकारियों ने एसडीएम श्रीराम सिंह को ज्ञापन सौंपा। जिसमें उल्लेख किया है कि ग्राम विरोट थाना-रोहटा जिला मेरठ निवासी छात्रा ललिता गौतम का अपहरण करके हत्या करने को लेकर आठ जुलाई को छात्रा ललिता गौतम के परिवार के साथ निहत्थे बुजुर्ग, महिलाऐं व बच्चे शांति पूर्ण तरीके से जिलाधिकारी मेरठ को प्रार्थना-पत्र देने जा रहे थे।
इसी दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा पहले से ही कलक्ट्रेट का गेट बंद कर दिया था। जिसे खुलवाने के लिए महिलाओं व बच्चों और सामाजिक लोगों ने काफी मिन्नतें की परन्तु पीड़ित परिवार को जिलाधिकारी से मिलने नही दिया गया। जिसके बाद सभी लोग वहीं धरने पर बैठ गए। कुछ देर बाद एसएसपी अविनाश पांड़े गन्दी गन्दी गालियां देते हुए कलक्ट्रेट गेट पर पहुंचते हैं और पहुंचते ही पीड़ित परिवार सहित महिला, बुजुर्ग व बच्चों के साथ मारपीट करने लगे। एसएसपी अविनाश पांड़े ने मौके पर गालियां देते हुए जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। इस घटना से उनकी मानसिकता रखते हुए मारपीट करना दर्शाता है कि वो कानून में विश्वास न रखकर निरंकुशता एवं तानाशाही में विश्वास रखते हैं। जिसके बाद एसएसपी अविनाश पांड़े खोलकर उसमें अधिवक्ता रवि गौतम आदि के साथ गाली गलौंच कर मारपीट करना उनकी घोर जातिवादी मानसिकता दर्शाता है। एसएसपी अविनाश पांड़े द्वारा की गई इस प्रकार की कार्यवाही असंवैधानिक व अलोकतांत्रिक है। इस घटना का सम्पूर्ण वीड़ियो पूरे देश में सोशल मीड़िया प्रसारित है। जिससे एसएसपी स्वयं गाली गलौंच, जातिसूचक शब्दों के साथ मारपीट करते करते नजर आ रहे हैं। ऐसे अधिकारी का अपने पद पर बने रहना लोकतंत्र के लिए घातक है। पुलिस द्वारा निहत्थे व शांतिपूर्ण रूप से प्रदर्शन कर रहे लोगों पर गंभीर धाराओं में झूठे मुकदमे दर्ज कर धरनारत निर्दोषों को जेल भेजना लोकतंत्र की हत्या है। सभी मुकदमें वापस लिए जाना अति आवश्यक है। संबंधित लोगों ने उक्त प्रकरण की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराई जाने की मांग की। इस अवसर पर इस दौरान मनीष सागर, मोहन लाल, मिलिन कुमार समेत अन्य मौके पर मौजूद रहें।


