
जनपद की जहरीली हवा ने बदल दिया विदेशी परिंदों का रास्ता
Hapur News - - और साल की तुलना में इस बार कम आए विदेशी परिंदेजार से अत्यधिक विदेशी परिंदे यहां आकर बनाते है अस्थाई आशियाना - इस बार संख्या 100 से भी कम हुई - बढ़ते
ब्रजघाट। जनपद की आवोहवा पिछले कुछ दिन से ठीक नहीं है। जनपद प्रदूषित शहरों की सूची में दूसरे नंबर पर है। इसलिए आसमान में फैली जहरीले वायू ने अपना असर मुनष्य के साथ साथ सात समुंद्र पार कर गंगा नगरी में आने वाले विदेशी परिंदों पर डाल दिया है। यहीं कारण है कि इस बार हस्तिनापुर वन्य सेंचुरी के किनारे स्थित गंगा नदी में आने वाले सैकड़ों प्रवासी परिंदों ने आगमन से दूरी बनाकर दूसरी दिशा पकड़ ली है। अब तक मात्र 100 से अधिक पक्षी ही यहां आ सकें है जबकि दिसंबर माह में यहां पक्षियों की संख्या हजारों में पहुंच जाती थी।
हालांकि आने वाले दिनों में प्रवासी पक्षियों के आने की उम्मीद जताई जा रही है। गढ़मुक्तेश्वर हस्तिनापुर वन्य जीव विहार पश्चिमी उत्तर प्रदेश की एक मात्र सेंचुरी है। यह क्षेत्र हजारों वर्ग किमी में फैला हुआ है। हस्तिनापुर सेंचुरी में से सटी गंगा नदी में हर वर्ष दिसंबर के पहले सप्ताह तक सात समुंद्र पार कर साबेरियान पक्षी यहां भोजन की तलाश के लिए आते है। दिसंबर से लेकर मार्च तक यहां की झीलों में प्रवास कर मार्च माह के अंतिम सप्ताह तक अपने वतन वापस लौट जाते है। साबेरियान पक्षियों का दलदली झीलों में प्रवास यहां के अनुपम सौंदर्य को और अधिक बढ़ा देता है। लेकिन इस बार मौसम में छाई प्रदूषण की धुंध के कारण वातावरण हिसाब से अनुकूल नही होने पर इन पक्षियों ने रास्ता बदल लिया। पर्यावरणविदों ने इसको लेकर बिगड़े पारिस्थितिकी तंत्र को जिम्मेदार माना है और गहरी चिंता जताई। वन क्षेत्राधिकारी करन सिंह ने बताया कि हर वर्ष साइबेरिया सहित चीन और लद्दाख के सैकड़ों पक्षी दिसंबर माह स्थानीय गंगा नदी में आते थे। लेकिन अभी तक प्रवासी पक्षी की संख्या काफी कम देखे गए है। इसमें वायू प्रदूषित होना भी है। उनका कहना है कि वायू दूषित होने से काफी फर्क पड़ता है। उनका कहना है कि संभावना है कि प्रदूषण कम हो जाने पर विदेशी परिंदे यहां आ सकते है।

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