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चौथे नवरात्र को मां कूष्माण्डा की उपासना की गई

नवरात्र के चौथे दिन शुक्रवार को मां के भक्तों ने घरों में रहकर उपवास रखकर आदि शक्ति श्री दूर्गा के चतुर्थक्रम रूप कुष्माण्डा की पूजा अर्चना...

चौथे नवरात्र को मां कूष्माण्डा की उपासना की गई
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हिन्दुस्तान टीम,हापुड़Sat, 17 Apr 2021 03:21 AM
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पिलखुवा। नवरात्र के चौथे दिन शुक्रवार को मां के भक्तों ने घरों में रहकर उपवास रखकर आदि शक्ति श्री दूर्गा के चतुर्थक्रम रूप कुष्माण्डा की पूजा अर्चना की। पंडित कुलदीप शर्मा ने बताया कि मां दुर्गाजी के चौथे स्वरूप का नाम कुष्माण्डा है। अपनी मंद मुस्कान द्वारा ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने के कारण इन्हे कुष्मांडा देवी के नाम से अभिहित किया गया है। जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था,चारों ओर अंधकार ही अंधकार था,तब इन्ही देवी ने अपने ईषत हास्य से ब्रह्माण्ड की रचना की थी। अत: यही सृष्टि की आदि स्वरूपा और आदि शक्ति है। इनके पूर्व ब्रह्माण्ड का अस्तित्व था ही नहीं। इनका निवास सूर्यमण्डल के भीतर लोक में निवास कर सकने की क्षमता और शक्ति केवल इन्ही में है। इनके शरीर की कान्ति और प्रभा भी सूर्य के समान ही देदीप्यमान और भास्वर है। इन्ही के तेज और प्रकाश से दसों दिशाएं प्रकाशित हो रही है। ब्रह्माण्ड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में अवस्थित तेज इन्ही की छाया है। इनकी आठ भुजाएं है,अत:ये अष्टभुजा देवी के नाम से भी विख्यात है। इनके सात हाथों में क्रमश:कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है। इनका वाहन सिंह है। नवरात्र पूजन की चौथे दिन कुष्माण्डा देवी के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन अनाहत चक्र में अवस्थित होता है।