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सौहार्द की मिसाल बनी मीरा बाबा की मजार

सौहार्द की मिसाल बनी मीरा बाबा की मजार

संक्षेप: Hapur News - - नवविवाहिता जोड़े जात लगाकर संतान प्राप्ति की मन्नत मांग रहे मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब फोटो 226, 227 तीर्थ सिंह गढ़मुक्तेश्वर, संवाददाता। पौराणिक

Wed, 5 Nov 2025 01:57 AMNewswrap हिन्दुस्तान, हापुड़
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गढ़मुक्तेश्वर। पौराणिक गढ़ गंगानगरी में स्थित मीरा बाबा की मजार आज भी सांप्रदायिक एकता और भाईचारे की प्रतीक बनी हुई है। कार्तिक माह में गंगा मेले के दौरान यहां भरने वाला मेला श्रद्धा और सौहार्द का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। हर वर्ष की भांति इस बार भी मंगलवार से मजार परिसर में मेला प्रारंभ हुआ, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे। महाभारतकालीन तीर्थस्थली के उत्तरी छोर पर स्थित यह मजार वर्षों से सभी धर्मों के अनुयायियों के लिए आस्था का केंद्र रही है। श्रद्धालु गंगा मेले में जाने से पूर्व बाबा की मजार पर हाजिरी लगाना शुभ मानते हैं।

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विशेष रूप से कुम्हार समुदाय के लोग यहां पड़ाव डालते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मन्नत मांगते हैं। नवविवाहित जोड़े संतान प्राप्ति के लिए जात लगाते हैं और मनोकामना पूर्ण होने पर अगले वर्ष लौटकर चादर, बताशे, लड्डू और नारियल चढ़ाकर बाबा का आभार जताते हैं। अयोध्या विवाद के दौर में जब देशभर में साम्प्रदायिक तनाव फैला था, तब भी मीरा बाबा की मजार शांति और सद्भाव का प्रतीक बनी रही। मजार की देखरेख यामीन शेख का परिवार पीढिय़ों से कर रहा है। बाबा के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था इतनी प्रगाढ़ है कि गंगा मेला उनके आशीर्वाद के बिना अधूरा माना जाता है। -- गरीबों के लिए सेवा और रोजगार का माध्यम मीरा मजार पर भक्त मिट्टी की हांडी में गुड़ और चावल पकाकर प्रसाद तैयार करते हैं, जिसे गरीब और निराश्रितों में वितरित किया जाता है। यही नहीं, मेला क्षेत्र में सैकड़ों स्थानीय लोग प्रसाद, उपले, चावल और चादरें बेचने के लिए दुकानें लगाते हैं, जिससे गरीब तबके को रोजगार का अवसर मिलता है। -- मीरा मजार का संदेश.. धर्म नहीं, मानवता सर्वोपरि गढ़ की यह ऐतिहासिक मजार हर वर्ष यह संदेश देती है कि सच्ची पूजा इंसानियत और साझा प्रेमभाव में निहित है। यहां हर धर्म, हर जाति का व्यक्ति एक समान भाव से सिर झुकाता है, यही इसकी पहचान है। ------