
पांच वर्ष का बालक भी भक्ति से भगवान को पा सकता है : तेजस्वनी
Hapur News - गढ़मुक्तेश्वर में श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। यजमान अतुल शर्मा ने कथा व्यास का पूजन किया। कथा वाचक ने ध्रुव और सती चरित्र की प्रेरणादायक कथा सुनाई। ध्रुव ने पांच वर्ष की आयु में भगवान विष्णु को प्रसन्न किया, जबकि सती ने पति के अपमान पर आत्मदाह किया।
गढ़मुक्तेश्वर। श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इस अवसर पर तृतीय दिवस के मुख्य यजमान अतुल शर्मा ने अपनी पत्नी सहित विधि-विधान से कथा व्यास का पूजन किया। इसके बाद कथा व्यास तेजस्वनी किशोरी ने भक्तों को ध्रुव चरित्र और सती चरित्र की भावपूर्ण कथा का श्रवण कराया। मंगलवार को दुर्गा कॉलोनी में आयोजित ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए कथा वाचक ने बताया कि ध्रुव राजा उत्तानपाद के पुत्र और भगवान विष्णु के महान तपस्वी भक्त थे। उन्होंने मात्र पांच वर्ष की आयु में कठोर तपस्या कर भगवान विष्णु को प्रसन्न किया और उनका साक्षात्कार प्राप्त किया।
उन्होंने कहा कि जब एक बालक निष्ठा और दृढ़ विश्वास से भगवान को पा सकता है, तो आज के बच्चों और युवाओं को भी नियमित मंत्र जप, साधना और सच्ची भक्ति के मार्ग पर चलना चाहिए।सती चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि सती ने अपने पति भगवान शिव के अपमान को सहन न करते हुए यज्ञ की अग्नि में स्वयं को समर्पित कर दिया। उन्होंने इस चरित्र कोपति-परायणता, निष्ठा और अटूट प्रेम का अनुपम उदाहरण बताया। कथा वाचक ने कहा कि श्रद्धा और विश्वास के साथ कथा श्रवण करने से पापों का नाश होता है, आत्मा शुद्ध होती है और भक्त को प्रत्येक संकट में भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कथा के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा और श्रद्धालु भजनों व जयकारों में लीन नजर आए।

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