
मकर संक्रांति पर मंथन, 14 जनवरी पर मुहर
Hapur News - मकर संक्रांति पर मंथन, 14 जनवरी पर मुहर
हर वर्ष 14 जनवरी को मनाया जाने वाला मकर संक्रांति का पर्व सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है। परंतु इस बार एकादशी को लेकर दो तिथि सामने आ गई है। जिसको लेकर हापुड़ के एक मंदिर में ज्योतिषाचार्यों का महा मंथन हुआ। सभी ग्रहों की चाल आदि पर बहस के बाद 14 जनवरी को ही मनाए जाने का निर्णय लिया गया है। क्योंकि यह दिन केवल एक खगोलीय परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2026 में मकर संक्रांति ऐसे समय पर पड़ रही है, जब सूर्यदेव के उत्तरायण होने के साथ कई शुभ संयोग बन रहे हैं।
खरमास का समापन 14 जनवरी 2026 दिन बुधवार को अपरान्ह 3 बजकर 04 मिनट पर सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ होगा अतः 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति पर्व मनाया जाएगा। भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित के सी पाण्डेय काशी वाले ने उदाहरण देते हुए बताया कि धर्मशास्त्र के वचन अनुसार मुहूर्त चिंतामणि में लिखा है संक्रान्तिकालादुभयत्र नाडिकाः पुण्या मताः षोडश षोडशोष्णगोः उष्णगोः संक्रान्तिकालात् उभयत्र षोडश षोडश नाडिकाः पुण्या मताः। अर्थात सूर्य के संक्रान्ति समय से १६ घटी पूर्व (पहले) और १६ घटी बादका समय पुण्यकाल होता है इसी प्रकार निर्णय सिन्धु के अनुसार यदा तु सूर्यास्तात्पूर्वं संक्रान्तिर्भवति तदोभयमते पूर्वमेव पुण्यकालः। अर्थात जब सूर्यास्त के पहले ही संक्रान्ति होती है तो उभयमत में पूर्व ही पुण्यकाल होता है। यानि मकर संक्रांति के बारे में धर्मग्रंथो के अनुसार जिस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है उसी दिन मकर संक्रांति होता है। अर्थात 14 जनवरी 2026 कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि को सर्वार्थसिद्धि योग एवं अमृतसिद्धि शुभ योग के साथ सूर्य जिसका पुण्यकाल सुबह 8.39 बजे से विशेष मान्य होगा। महासभा विद्वानों ने कहा कि 14 जनवरी 2026 को षटतिला एकादशी, अनुराधा नक्षत्र, बुधवार के दिन मकर संक्रांति होने से मन्दाकिनी नामक संक्रांति है। जो और भी शुभ फलदायी होगा। जिसमें स्नान, दान करना अत्यंत पुण्यफल प्रदान करने वाला होगा इस दिन गंगा स्नान और दान का ही विशेष महत्व है। चावल दान का संशय खत्म---- बैठक में एकादशी तिथि होने से चावल दान के संशय को समाप्त करते हुए विद्वानों ने बताया कि कच्चे चावल का दान किया जा सकता है। साथ ही सायंकाल 5 बजकर 53 मिनट पर एकादशी तिथि समाप्ति के बाद गृहस्थ परम्परानुसार खिचड़ी भी बनाया जा सकता है। बैठक में परामर्श मंडल विद्वान पंडित ओमप्रकाश पोखरीयाल, पंडित आशुतोष शुक्ला, पंडित आदित्य भारद्वाज, समन्वयक पंडित अजय पाण्डेय, कोषाध्यक्ष पंडित मित्र प्रसाद काफ्ले, उपाध्यक्ष पंडित ब्रजेश कौशिक, मंत्री पंडित देवी प्रसाद तिवारी, मंत्री डॉ करुण शर्मा, महामंत्री अनिशा सोनी पाण्डेय, प्रचार मंत्री पंडित प्रशांत वशिष्ठ, पंडित अमर प्रकाश पाण्डेय, आचार्य सर्वेश तिवारी,पंडित शैलेन्द्र मिश्रा शास्त्री, डॉ वासुदेव शर्मा, पंडित संतोष तिवारी, पंडित अजय त्रिपाठी, पंडित उमेश शर्मा,पंडित आशुतोष नंदन द्विवेदी, पंडित राहुल शर्मा ऑडिटर, पंडित शिवम पाण्डेय, पंडित दीपक मिश्रा, पंडित अनुज मिश्रा, पंडित शैलेन्द्र अवस्थी, पंडित जय प्रकाश त्रिवेदी,पंडित दुर्गाशरण वाजपेयी, पंडित गौरव कौशिक आदि विद्वानों ने विचार रखें।

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