गन्ना काटने को तैयार नहीं हैं किसान, प्रशासन चौतरफा परेशान
Hapur News - -जिला पंचायत को लगानी पड़ रही लेबर लेबर -चीनी मिल चालू न होने से गन्ने की कटाई में हो रहा नुकसान -कोल्हू क्रेशरों पर गन्ने का रेट मिल पा रहा

गढ़मुक्तेश्वर। चीनी मिल में पेराई चालू न होने के कारण कोल्हू क्रेशरों पर गन्ने का दाम बेहद सस्ता मिलने से किसान गन्ने की कटाई करने से कतरा रहे हैं। जिसके चलते पौराणिक खादर मेले की तैयारियों में जुटे जिला पंचायत विभाग को लेबर लगाकर गन्ने की कटाई कराने को मजबूर होना पड़ रहा है।
मिनी कुंभ पौराणिक कार्तिक पूर्णिमा गंगा खादर मेले को लेकर जिला प्रशासन द्वारा कई सप्ताह पहले ही तैयारी प्रारंभ करने का बिगुल बजा दिया गया था। जिसके चलते सडक़ों की मरम्मत से लेकर कच्चे रास्ते और जलाश्यों पर अस्थाई पुल बनाने जैसे कार्यों को लेकर रूपरेखा तैयार करते हुए उनका कार्य भी कराया जा रहा है। डीएम प्रेरणा शर्मा ने पांच और आई नचिकेता झा ने 19 अक्तूबर को मेला स्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लेते हुए मेला स्थल और उससे सटे जंगल में खड़ी गन्ने की फसल को जल्द से जल्द कटवाने की कड़ी हिदायत दी थी। परंतु इसके बाद भी गन्ने की कटाई में अपेक्षित स्तर पर तेजी आनी संभव नहीं हो पा रही है, क्योंकि सिंभावली चीनी मिल का पेराई सत्र अभी तक चालू नहीं हो पाया है। जिसके कारण किसान अपने खेतों में खड़े गन्ने की कटाई करने को घाटे का सौदा मानते हुए इससे पूरी तरह कतरा रहे हैं। चीनी मिल की तुलना में फिलहाल कोल्हू क्रेशरों पर गन्ना बेहद सस्ते रेट में बिक रहा है। भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सोलंकी, प्रधान सुशील राणा, निरंजन सिंह, प्रेमसिंह, टीकम सिंह, पूर्व प्रधान बबलू राणा, साधन सहकारी समिति के चेयरमैन पंडित अमन शर्मा का कहना है कि कोल्हू क्रेशरों पर इस समय गन्ना ढाई सौ रुपये कुंतल की दर से बिक रहा है, जबकि चीनी मिल पर गन्ने का रेट प्रदेश सरकार द्वारा करीब साढ़े तीन सौ रुपये कुंतल का दाम घोषित किया हुआ है। इसलिए चीनी मिल चालू होने से पहले गन्ने की कटाई करने वाले किसानों को मुनाफा तो दूर बल्कि अपनी मेहनत, लागत और भूमि का लगान तक वापस मिल पाना भी संभव नहीं हो पा रहा है। इसलिए जिला प्रशासन द्वारा सिंभावली चीनी मिल को फिलहाल वैकल्पिक तौर पर चालू करवा दिया जाए। जिससे सभी किसान एक दो दिन में ही गन्ने की कटाई कर अपने खेतों को मेला आयोजन के लिए पूरी तरह खाली कर देंगे। किसानों का यह भी कहना है कि गंगा की बाढ़ से पहले ही गन्ने की खेती में बहुत बड़े स्तर पर नुकसान हो चुका है, परंतु अगर चीनी मिल चालू हुए बिना खेतों में खड़े गन्ने को मेला आयोजन के कारण कोल्हू क्रेशरों पर सस्ते दाम में बेचते हैं तो फसल उगाने के लिए बैंक और सरकारी समितियों समेत साहूकारों से ब्याज पर लिए गए कर्ज की अदायगी भी संभव नहीं हो पाएगी।
-किसानों के अडिय़ल रवैये को देखते हुए अब जिला पंचायत को लेबर लगाकर कटवाना पड़ रहा गन्ना
मिनी कुंभ खादर मेले की तैयारी अपेक्षित स्तर पर परवान न चढऩे से कार्यदाई संस्था जिला पंचायत के अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीर उभरने लगी हैं। क्योंकि आला अफसरों द्वारा लगातार दीवाली से पहले हर हाल में सभी तैयारियों को पूरा करने की कड़ी हिदायत दी जा रही हैं। एसडीएम साक्षी शर्मा, तहसीलदार धर्मेंद्र सिंह, नायब तहसीलदार पवन कुमार, वेदप्रकाश सोनी, बीडीओ विजय कुमार, सिंभावली गन्ना समिति सचिव राकेश पटेल समेत कृषि विभाग के अधिकारी कर्मचारी लगातार गांवों में पहुंचकर वार्ता कर रहे हैं, परंतु इसके बाद भी चीनी मिल चालू न होने का हवाला देकर किसान गन्ना कटान में तेजी लाने को तैयार नहीं हैं। मेले से जुड़़ीं तैयारी प्रभावित होती देख अब जिला पंचायत द्वारा अपनी तरफ से लेबर लगाकर मेला स्थल में खड़े गन्ने की कटाई कराई जा रही है। इस दौरान पुलिस को भी साथ में रखा जा रहा है ताकि किसान किसी प्रकार का हंगामा न कर पाएं। लेबर द्वारा काटे गए गन्ने को संबंधित किसानों के माध्यम से कोल्हू क्रेशरों पर भिजवाया जा रहा है।
-भूकटान होने से भोगौलिक स्थिति में बदलाव से उत्पन्न हुई समस्या
बरसात के सीजन में रौद्र रूप लेकर गंगा नदी ने अपने किनारे समेत आसपास के जंगल में भूकटान का जो सिलसिला प्रारंभ किया था, वह अभी तक रुक पाना संभव नहीं हो पाया है। भूकटान के कारण गंगा की जलधारा करीब एक किलोमीटर गढ़ की साइड में खिसक आई है, जिससे मिनी कुंभ मेले का अधिकांश आयोजन अब किसानों की लगानी भूमि में होना है। इसी के चलते किसान अपने खेतों में खड़े गन्ने की कटाई करने में आनाकानी कर रहे हैं, जिससे मेले से जुड़ीं तैयारी प्रभावित होने पर कार्यदाई संस्था समेत जिला और तहसील प्रशासन की चिंता भी बढ़ती जा रही है।
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