
श्रीमद्भावत कथा में राजा परीक्षित का प्रसंग सुनाया
Hapur News - श्रीमां मंशा देवी मंदिर में चल रही कथाश्रद्दालुओं ने कथा में लिया भाग फोटो संख्या-12 हापुड़ संवाददाता। श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार को कथा व्य
श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार को कथा व्यास आचार्य राजीव कृष्ण भारद्वाज ने राजा परीक्षित का प्रसंग सुनाया। जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे। बुलंदशहर रोड स्थित श्री मां मनसा देवी मंदिर के 16वें वार्षिक उत्सव के उपलक्ष में मंदिर प्रांगण में चल रही श्री भद्भागवत कथा में कथाव्यास आचार्य राजीव कृष्ण भारद्वाज ने बताया कि मनुष्य जीवन केवल भौतिक सुखों के लिए नहीं, बल्कि परमात्मा की प्राप्ति के लिए मिला है। उन्होंने राजा परीक्षित के जन्म और उन्हें मिले सात दिन के श्राप का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि राजा परीक्षित ने अपनी मृत्यु को जानकर भी घबराने के स्थान पर मोक्ष के मार्ग को चुना।
जब गुरु का जीवन में आगमन होता है, तभी अज्ञान का अंधेरा दूर होता है। परीक्षित और कलयुग के संवाद के माध्यम से बताया गया कि कलयुग का वास अधर्म, मद और लोभ में होता है, जिससे हमें बचना चाहिए। वराह अवतार की कथा सुनाते हुए बताया कि जब हिरण्याक्ष पृथ्वी को पाताल में ले गया, तब भगवान ने वराह रूप धारण कर पृथ्वी की रक्षा की। भगवान छप्पन भोग छोड़कर विदुर के घर केवल भाव के कारण साग खाने पहुंचे थे। भगवान धन और पद के नहीं, बल्कि केवल सच्चे प्रेम और श्रद्धा के भूखे हैं। कथा के अंत में मुख्य यजमान संदीप गोयल ने परिवार के साथ भागवत की महाआरती की। वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में मंदिर को रंग बिरंगी लाईटों से सजाया गया है। कथा में शिवकुमार मित्तल, महेश तोमर, अनुज मित्तल, विजेंद्र कंसल, मधुसूदन गोयल, लाला राजकिशोर, मनोज कंसल, रितु मित्तल, कविता कंसल, दुर्गेश तोमर, दीपांशी सैनी, पंकिल मित्तल, महिमा सैनी, सोनिया बजाज, सरोज देवी, सोनू सैनी, अजय गुप्ता, पराग कंसल, कालीचरण सैनी, दिव्यांश मित्तल, सुनील सैनी, अनंत स्वामी, रामभुवन, सोनू कुमार, हनी सैनी आदि मौजूद रहे।

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