धूमधाम से मनाई गई महर्षि कश्यप की जयंती
Hapur News - गढ़मुक्तेश्वर में महर्षि कश्यप और महाराजा निषादराज की जयंती का आयोजन अधिवक्ता संदीप निषाद के नेतृत्व में दुर्गा मंदिर में हुआ। कार्यक्रम में दोनों के चित्र पर फूल माला अर्पित कर प्रसाद वितरण किया गया। निषादराज का संबंध राम से था और उन्होंने राम, सीता और लक्ष्मण को गंगा पार कराया था।

गढ़मुक्तेश्वर, संवाददाता।महर्षि कश्यप एवं महाराजा निषादराज की जयंती के अवसर पर अधिवक्ता संदीप निषाद के नेतृत्व में नगर के मीरा रेती स्थित दुर्गा मंदिर में जयंती का आयोजन कर दोनों के चित्र पर फूल माला अर्पण कर प्रसाद वितरण किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ नामित सभासद लता केवट ने दीपप्रज्वल कर किया। अधिवक्ता संदीप निषाद ने बताया कि निषादराज ऋंगवेरपुर के राजा थे, उनका नाम गुह्यराज था। वे [निषाद] या [मल्लाह] समाज के थे और उन्होंने ही वनवासकाल में राम, सीता तथा लक्ष्मण को गंगा पार करया था ।वे भगवान राम के बाल सखा थे। श्री निषाद राज व राम ने एक ही गुरुकुल में रहकर शिक्षा प्राप्त की।
निषाद समाज आज भी इनकी पूजा करते है। वनवास के बाद राम ने अपनी पहली रात अपने मित्र निषादराज के यहां बिताई। निषाद राज की आदिवासी सेना ने ही लंका पर विजय प्राप्त की थी और महर्षि कश्यप ऋषि एक वैदिक ऋषि थे। इनकी गणना सप्तर्षि गणों में की जाती थी। हिंदू मान्यता के अनुसार वह ऋग्वेद के सात प्राचीन ऋषियों, सप्तर्षियों में से एक हैं।कश्यप सबसे प्राचीन और सम्मानित ऋषि हैं ।इनके पिता ब्रह्मा के पुत्र मरीचि ऋषि थे। इन्हे परमपिता ब्रह्मा का अवतार माना गया है। आज के इस कार्यक्रम के अवसर पर रोहित मल्होत्रा सभासद,ललित कश्यप,दीपचंद केवट,गौरव राणा,नरेश केवट,राजेश ठाकुर,प्रकाश राणा,अमित निषाद,आदि लोग मौजूद रहे
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