
अटल जी ने लिखा था कि जब मैं सांसद बना कुल चार थे
Hapur News - अटल जयंती:::::: वाजपेयी पिलखुवा में पुस्तक संग्राहलय में पहुंचे थे -ये भी लिखा था कि हारा थका सिपाही, घाव ठीक होने में लगता है थोड़ा समय -अटली जी द्वा
हापुड़। पूर्व प्रधानमंत्री द्वारा खुद अपने कलम से लिखे गए शब्द आज भी हापुड़ की हैंडलूम नगरी पिलखुवा में रखे हुए हैं। 45 साल पहले कागज के पेज में उकेरे गए शब्दों के अर्थ आज भी उस समय की सियासत को बखान कर रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री ने लिखा था कि जब मै पहली बार सांसद बना था तो उस समय संसद में हम केवल चार सांस होते थे। चिट्ठी में लिखा है कि 4 जनवरी को मिले पत्र का जवाब 8 फरवरी को दे रहा हूं, क्योंकि हारे थके सिपाही के घाव सहलाने में वक्त लगता हैं। ये शब्द पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी जी के लिखे हुए एक चिट्ठी के माध्यम से पिलखुवा में आए थें।
अटल विहारी वाजपेयी की जयंती को भाजपा शताब्दी वर्ष के रुप में मना रही है। पिलखुवा में स्वर्गीय शिवकुमार गोयल जी के घर देश और दुनिया के लोकप्रिय नेता में से एक रहे देश में तीन बार प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा कागज पर लिखी गई चिट्ठी के शब्द बोल रहे हैं। 1980 में अटल बिहारी वाजपेयी ने 8 फरवरी को चिट्ठी लिखकर शिवकुमार गोयल जी को भेजी थी। जिसमें लिखे शब्द अटल जी की याद ताजा कर रहे हैं। उन्होंने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि 8 जनवरी के पत्र का उत्तर 8 फरवरी को दे रहा हूं। इस लिए रुष्ट न हो। हारा थका सिपाही घाव सहलाने में कुछ तो वक्त लेता ही है। यह भी चिट्ठी में लिखा हुआ हैं कि मैं जब पहली दफा चुना गया था तो हमारे सदस्य केवल 4 थे लोकसभा में। फिर भी अपनी बात कही अब तो कई गुना है। अब तो अनुभव भी है। असम पर जरुर लिखे, स्नेह रखे, आपका अटल बिहारी वाजपेयी। मनोज वाल्मीकि मिले थे साथ--- अटल बिहारी वाजपेयी के साथ युवावस्था के दौरान लिया गया यह दुर्लभ एवं स्मरणीय छायाचित्र भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के समर्पित कार्यकर्ता रहे,मनोज वाल्मीकि का है। लगभग 30 वर्ष पुराना यह ऐतिहासिक छायाचित्र न केवल संगठन के प्रति निष्ठा और समर्पण को दर्शाता है,बल्कि उस दौर की प्रेरणादायी राजनीतिक यात्रा,संघर्ष और राष्ट्रसेवा की भावना को भी जीवंत करता है। यह तस्वीर आज भी विचारधारा, संस्कार और नेतृत्व से जुड़ी अनमोल स्मृतियों को संजोए हुए है संग्राहलय में आए थे अटल--- वर्ष 1991 शिवकुमार गोयल के संग्रहालय को देखने के लिए भी अटल बिहारी वाजपेई आए थे बाजपेई द्वारा नगर में सभा को संबोधित किया और हैंडलूम नगरी की प्रशंसा की उनके द्वारा पिलखुआ क्षेत्र को महत्व देने के लिए नगर की ओर से उन्हें प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित भी किया गया था। :::पिलखुवा निवासी नरेन्द्र गोयल बताते हैं कि पापा जी का काफी आना जाना था। प्रधानमंत्री रहते भी हमे मिलाकर लाए थे। उनकी लिखी हुई चिट्ठी आज भी घर पर संजो कर रखी हुई है।

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