
रामायण के राम ने 60 साल बाद किया कान्हा वाले गढ़ में गंगा स्नान
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गढ़ मेला। रामायण सीरियल में राम का किरदार निभाकर अभिनय का लोहा मनमाने वाले अरुण गोविल ने अब मेरठ-हापुड़ सीट से सांसद होने के बाद समाज में बदलाव की बयार बहाने का बीड़ा उठा लिया है। जिसका उदाहरण है कि रामायण में राम का किरदार निभाने वाले राम अपने जीवन में 60 साल बाद फिर से गढ़ गंगा के रेतीले मैदान पर पहुंचे। अपनी पत्नी के संग पहुंचे अरुण गोविल ने रात को गंगा किनारे अस्थाई डेरे में विश्राम किया और भोजन किया। सुबह सवेरे गंगा स्नान करने के बाद मेरठ वापस लौट गए। अभिनेता से राजनेता बने अरुण गोविल अब राजनीति का कहकरा अच्छे से पढ़ गए हैं।

जो पहले सांसद है मेरठ के, जिन्होंने गढ़ गंगा मेले में पहुंचकर रात को वहीं ठहरे हैं। रामायण सीरियल में राम का किरदार निभाकर अभिनय का लोहा मनमाने वाले अरुण गोविल ने अब मेरठ-हापुड़ सीट से सांसद होने के बाद समाज में बदलाव की बयार का बीड़ा उठाया है। जिसका उदाहरण है कि वे गढ़ गंगा मेले में पहुंचे और रात को पत्नी श्रीलेखा के साथ रात को अस्थाई तंबू में रेत की धरती पर रुके। साथ ही डेरों में जाकर रामायण भी वितरित की है। गंगा स्नान के बाद डेरों में बांटी रामायण-- अरुण गोविल ने सुबह उठकर गंगा किनारे पहुंच घाट पर गंगा स्नान किया। गंगा स्नान के बाद पूजा अर्चना की गई। गंगा मैया को नमन करने के बाद सांसद अपने डेरे में पहुंच गए। जहां पर उन्होंने आसपास के डेरों में जाकर अपने रामायण अभियान के तहत रामायण वितरित की। बता दे कि अभियान के लिए अरुण गोविल घर-घर रामायण अभियान के तहत 11 लाख परिवारों तक पहुंचेंगे। राम के किरदार में जहां आज भी वे लोगों के दिल में बसे हुए हैं, वहीं अब भाजपा सांसद अरुण गोविल रामचरित मानस के माध्यम से समाज में एकजुटता और आदर्शों का रामराज्य पुनर्स्थापित करने का प्रयास करेंगे। 60 साल पहले आया था गंगा मेला-- हिन्दुस्तान से बात करते हुए सांसद अरुण गोविल ने बताया कि पापा मेरठ में टैंट फायर इंचार्ज थे। 60 साल पहले गढ़ गंगा मेले में पापा आए थे। जिनके साथ मैं भी गढ़ गंगा मेले में आया था। आज भी गढ़ गंगा मेला उसी तरह अच्छा लगता है। बताया कि मेले डेरों में जाकर श्रद्धालुओं को घर घर रामायण वितरित किया था। रामायण सांस्कृतिक धरोहर---- सांसद का मानना है कि रामायण पढ़ने का असर देश व समाज पर दिखाई देगा। रामायण हमारी सांस्कृतिक विरासत है। आज जगह-जगह अपराध हो रहे हैं और लोगों के अंदर नकारात्मकता का भाव भी दिखाई दे रहा है। रामायण पढ़ने और समझने से समाज में चौंकाने वाला परिवर्तन आएगा। घर-घर रामायण पहुंचाना सांसद के नाते नहीं बल्कि देश के एक नागरिक के तौर पर है। अरुण गोविल की पत्नी आज भी रामायण को घर-घर पहुंचाने के अभियान में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हुई हैं। दोनों मेले एक करने की बात होगी-- सांसद अरुण गोविल का कहना है कि मुख्यमंत्री ने जो तिगरी-गढ़ मेले को एक करने की बात कही है उसके लिए मुख्यमंत्री से मिलकर फिर से इस बात को रखेंगे। ताकि आने वाले वर्ष में गढ़ मेले की तस्वीर बदल जाए। हालांकि मेले बहुत अच्छा लग रहा है।

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